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एंबुलेंस की हड़ताल से गंभीर मरीजों की जान पर बनी
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फोटो 16, अंबेडकरनगर जिला अस्पताल परिसर में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते एंबुलेंस कर्मी।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। मरीजों के लिए लाइफ लाइन साबित होने वाले ज्यादातर एंबुलेंस वाहनों का संचालन मंगलवार को ठप रहा। इसके चलते जरूरतमंद मरीजों को अस्पताल पहुंचने के लिए खासी परेशानी झेलनी पड़ी। तीमारदारों को अपने मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए मनमाना किराया वसूल रहे निजी वाहनों की मदद लेनी पड़ी। जिले में संचालित 56 में से 40 एंबुलेंस वाहनों के न चलने का सीधा खामियाजा मरीजों व उनके तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। दूसरी तरफ ठेका प्रथा समाप्त करने समेत अन्य मांगों को लेकर अड़े एंबुलेंस कर्मियों ने साफ चेताया है कि बिना मांग पूरी हुए वह काम काज पर वापस नहीं लौटेंगे।
एंबुलेंस सेवा के जिले में बेपटरी होने की दशा में गंभीर मरीजों के साथ उनके परिजनों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक पहुंचाने के लिए मात्र 16 एंबुलेंस ही वर्तमान में संचालित हैं। इसके चलते मरीजों को अस्पताल तक ले जाने के लिए तीमारदारों को घंटों एंबुलेंस का इंतजार करने के बाद मनमाना किराया वसूल रहे निजी वाहनों की मदद लेनी पड़ रही है। मंगलवार को भी तीमारदारों को एंबुलेंस न मिलने की दशा में निजी वाहन से मरीज को जिला अस्पताल में ले जाने को विवश होना पड़ा।
फोन करने पर बताया एंबुलेंस उपलब्ध नहीं
निजी साधन से अपनी सास चमेली देवी को लेकर जिला अस्पताल पहुंची टीकमपारा निवासी सरोज ने कहा कि उसकी सास की तबियत खराब है। सोमवार रात तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ जाने के बाद जब अस्पताल ले जाने को एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया, तो बताया गया कि कोई एंबुलेंस मौजूद नहीं है। मजबूर होकर उन्हें निजी वाहन की व्यवस्था कर जिला अस्पताल जाना पड़ा। पिता धरमचंद्र को दो दिन पहले भर्ती कराने वाले पलई नरऊपुर निवासी दीपक तिवारी ने कहा कि उसके पिता को पीलिया है। जिला अस्पताल में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर उन्हें लखनऊ ले जाने को कहा गया। एंबुलेंस सेवा पर फोन करने पर बताया गया कि सभी कर्मचारी व्यस्त हैं। निजी वाहन की मदद से पिता को लखनऊ ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
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हड़ताल पर डटे रहे एंबुलेंस कर्मचारी
ठेका प्रथा को समाप्त करने, नियमित किए जाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। जिला अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे एंबुलेंस कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से ठेका प्रथा को समाप्त किए जाने की मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है। एंबुलेंस कर्मियों की उपेक्षा कतई बर्दाश्त नहीं होगी। सूर्यप्रकाश त्रिपाठी, आलोक, सीमा, राकेश पाल, रमाकांत, स्नेहलता, शेषराम चौधरी ने अधिकार की आवाज बुलंद करते हुए चेताया कि जब तक उनकी मांगों का निस्तारण नहीं होगा, तब तक उनकी हड़ताल समाप्त होने वाली नहीं है।
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एंबुलेंस सेवा के जिले में बेपटरी होने की दशा में गंभीर मरीजों के साथ उनके परिजनों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मरीजों को जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी तक पहुंचाने के लिए मात्र 16 एंबुलेंस ही वर्तमान में संचालित हैं। इसके चलते मरीजों को अस्पताल तक ले जाने के लिए तीमारदारों को घंटों एंबुलेंस का इंतजार करने के बाद मनमाना किराया वसूल रहे निजी वाहनों की मदद लेनी पड़ रही है। मंगलवार को भी तीमारदारों को एंबुलेंस न मिलने की दशा में निजी वाहन से मरीज को जिला अस्पताल में ले जाने को विवश होना पड़ा।
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फोन करने पर बताया एंबुलेंस उपलब्ध नहीं
निजी साधन से अपनी सास चमेली देवी को लेकर जिला अस्पताल पहुंची टीकमपारा निवासी सरोज ने कहा कि उसकी सास की तबियत खराब है। सोमवार रात तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ जाने के बाद जब अस्पताल ले जाने को एंबुलेंस सेवा के लिए फोन किया, तो बताया गया कि कोई एंबुलेंस मौजूद नहीं है। मजबूर होकर उन्हें निजी वाहन की व्यवस्था कर जिला अस्पताल जाना पड़ा। पिता धरमचंद्र को दो दिन पहले भर्ती कराने वाले पलई नरऊपुर निवासी दीपक तिवारी ने कहा कि उसके पिता को पीलिया है। जिला अस्पताल में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर उन्हें लखनऊ ले जाने को कहा गया। एंबुलेंस सेवा पर फोन करने पर बताया गया कि सभी कर्मचारी व्यस्त हैं। निजी वाहन की मदद से पिता को लखनऊ ले जाकर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
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हड़ताल पर डटे रहे एंबुलेंस कर्मचारी
ठेका प्रथा को समाप्त करने, नियमित किए जाने समेत विभिन्न मांगों को लेकर एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल मंगलवार को भी जारी रही। जिला अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे एंबुलेंस कर्मचारियों ने कहा कि लंबे समय से ठेका प्रथा को समाप्त किए जाने की मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है। एंबुलेंस कर्मियों की उपेक्षा कतई बर्दाश्त नहीं होगी। सूर्यप्रकाश त्रिपाठी, आलोक, सीमा, राकेश पाल, रमाकांत, स्नेहलता, शेषराम चौधरी ने अधिकार की आवाज बुलंद करते हुए चेताया कि जब तक उनकी मांगों का निस्तारण नहीं होगा, तब तक उनकी हड़ताल समाप्त होने वाली नहीं है।