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Ambedkar Nagar News: बाढ़ पीड़ितों के लिए बनाए गए चार अस्थायी राहत केंद्र
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टांडा में बह रही सरयू नदी। संवाद
विद्युतनगर(अंबेडकरनगर)। जुलाई में सरयू नदी में बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए टांडा तहसील प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों को लेकर प्रशासन ने जरूरी संसाधनों की व्यवस्था करनी शुरू कर दी है। बाढ़ राहत केंद्र घोषित करने के साथ ही गोताखोरों और नाविकों का चयन भी किया है।
जुलाई के तीसरे व चौथे सप्ताह से बाढ़ का कहर टांडा तहसील क्षेत्र के मांझा क्षेत्रों में आमतौर पर शुरू हो जाता है। बाढ़ व कटान की चपेट में टांडा तहसील के उल्टहवा, माझा, माझा कला, माझा चिंतौरा, केवटला, नदी नसरुल्लापुर, अवसानपुर, नैपुरा, सलोनाघाट, ढेलमऊ व डुहिया समेत लगभग डेढ़ दर्जन गांव आते हैं। बरसात में स्थिति काफी भयावह हो जाती है। मांझा समेत नदी किनारे स्थित गांवों के लोगों को घर छोड़कर बाढ़ राहत चौकियों पर शरण लेने को विवश होना पड़ता है।
इसी दौरान टांडा नगर स्थित थिरुआ नाला भी विकराल रूप ले लेता है। इससे मेहनियां समेत नाले के आसपास के गांव भी बाढ़ की चपेट आ जाते हैं। प्रशासन द्वारा हर वर्ष बाढ़ राहत चौकिया बनाई जाती हैं। ग्राम वासियों को बाढ़ से निकालने के लिए नाव भी लगाई जाती हैं। बाढ़ के दौरान लोगों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने चार बाढ़ शरणालय बनाए हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालय अवसानपुर, प्राथमिक विद्यालय महरीपुर, प्राथमिक विद्यालय चिंतौरा और लालता प्रसाद इंटर कॉलेज डुहियां को अस्थायी राहत केंद्र घोषित किया गया है।
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आपात स्थिति में बचाव कार्यों के लिए 12 प्रशिक्षित गोताखोरों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही 29 नाव तैयार रखी गई हैं, जिनका संचालन 76 अनुभवी नाविक करेंगे। प्रशासन का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीम को अलर्ट मोड में रखा गया है।
बरती जा रही सतर्कता
बाढ़ के संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए पूरी सतर्कता बरती जा रही है। राहत केंद्र बना लिए गए हैं। बाढ़ के समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, उसकी जानकारी देकर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। - निखलेश कुमार, तहसीलदार टांडा
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जुलाई के तीसरे व चौथे सप्ताह से बाढ़ का कहर टांडा तहसील क्षेत्र के मांझा क्षेत्रों में आमतौर पर शुरू हो जाता है। बाढ़ व कटान की चपेट में टांडा तहसील के उल्टहवा, माझा, माझा कला, माझा चिंतौरा, केवटला, नदी नसरुल्लापुर, अवसानपुर, नैपुरा, सलोनाघाट, ढेलमऊ व डुहिया समेत लगभग डेढ़ दर्जन गांव आते हैं। बरसात में स्थिति काफी भयावह हो जाती है। मांझा समेत नदी किनारे स्थित गांवों के लोगों को घर छोड़कर बाढ़ राहत चौकियों पर शरण लेने को विवश होना पड़ता है।
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इसी दौरान टांडा नगर स्थित थिरुआ नाला भी विकराल रूप ले लेता है। इससे मेहनियां समेत नाले के आसपास के गांव भी बाढ़ की चपेट आ जाते हैं। प्रशासन द्वारा हर वर्ष बाढ़ राहत चौकिया बनाई जाती हैं। ग्राम वासियों को बाढ़ से निकालने के लिए नाव भी लगाई जाती हैं। बाढ़ के दौरान लोगों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने चार बाढ़ शरणालय बनाए हैं। इनमें प्राथमिक विद्यालय अवसानपुर, प्राथमिक विद्यालय महरीपुर, प्राथमिक विद्यालय चिंतौरा और लालता प्रसाद इंटर कॉलेज डुहियां को अस्थायी राहत केंद्र घोषित किया गया है।
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आपात स्थिति में बचाव कार्यों के लिए 12 प्रशिक्षित गोताखोरों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही 29 नाव तैयार रखी गई हैं, जिनका संचालन 76 अनुभवी नाविक करेंगे। प्रशासन का कहना है कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीम को अलर्ट मोड में रखा गया है।
बरती जा रही सतर्कता
बाढ़ के संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए पूरी सतर्कता बरती जा रही है। राहत केंद्र बना लिए गए हैं। बाढ़ के समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, उसकी जानकारी देकर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है। - निखलेश कुमार, तहसीलदार टांडा