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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   Five thousand farmers relief

पांच हजार किसानों को राहत

Thu, 19 Nov 2015 10:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर Updated Thu, 19 Nov 2015 10:56 PM IST
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राज्य सरकार ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। इससे करीब पांच हजार किसानों को राहत मिल गई है। उन्हें करीब साढ़े चार करोड़ की देनदारी से 31 मार्च तक छूट मिल गई है। ऐसे में सबसे अधिक उन किसानों को राहत मिलेगी, जिन्होंने कृषि कार्य के लिए बैंकों से ऋण ले रखा है।

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फसल खराब होने से उनके समक्ष ऋण की अदायगी का संकट खड़ा हो गया था। प्रदेश सरकार ने जिन 50 जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है, उनमें अंबेडकरनगर भी शुमार है। धान की फसल के लिए अग्रणी जिले में शामिल अंबेडकरनगर में इस बार औसत से कम बारिश होने का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
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प्रशासन ने 33 प्रतिशत से अधिक धान की फसल नष्ट होने का अनुमान लगाया है, जबकि किसानों के मुताबिक नुकसान 40 प्रतिशत से भी अधिक है। सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद किसानों को फिलहाल विभिन्न प्रकार के बैंक देय के जो 4 करोड़ 56 लाख 21 हजार 575 रुपये की अदायगी करनी थी, उससे अब कुछ दिनों के लिए निजात मिल जाएगी।
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कुल बैंक देय किसानों के ऊपर 13 करोड़ 7 लाख 69 हजार 153 रुपये थे, जिनमें से अक्तूबर तक 8 करोड़ 51 लाख 47 हजार रुपये की वसूली हो चुकी थी। राज्य सरकार ने सभी प्रकार की वसूली पर रोक लगा दी है। ऐसे में किसानों को अब साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक की अदायगी नहीं करनी पड़ेगी।

जिले में 23 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में धान की फसल लगाई गई थी। किसानों को उम्मीद थी कि बेहतर पैदावार होगी, लेकिन शुरुआती दौर से ही प्रकृति के साथ न देने से किसानों को झटका लगने लगा था। कई किसान तो ऐसे हैं, जिन्हें फसल की खराब हालत देखकर मड़ाई करने का ही साहस नहीं हो रहा है।

उनकी फसल अभी भी खेतों में खड़ी है। रामपुर सकरवारी के किसान सूर्यप्रकाश ने कहा कि फसल में दाने ही नहीं हैं, कटाई कराकर क्या फायदा होगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ सूखाग्रस्त घोषित करने से काम नहीं चलेगा। फसलों के समुचित मुआवजे के साथ ही पशुओं के चारे व पानी के बेहतर संसाधन का भी प्रबंध करना होगा।

गुरुवार को पुरसावां के निकट मड़ाई कर रहे गजराज ने कहा कि सरकार ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया है तो फायदा भी दिलाना चाहिए। सैदापुर के किसान रामअवतार के मुताबिक सरकार को सरकारी नलकूपों की संख्या बढ़ाने के साथ ही माइनर में टेल तक पानी की उपलब्धता तय करना होगा।


जून में सामान्य बारिश 221.56 मिमी होनी चाहिए थी लेकिन सिर्फ 90.45 मिमी हुई। जुलाई में 302.41 के सापेक्ष 184.35, अगस्त में 263.57 के सापेक्ष 344.55 मिमी वर्षा हुई। सितंबर में औसत वर्षा 250.60 मिमी होनी चाहिए थी, लेकिन पूरे माह बरसात ही नहीं हुई। चार माह में बारिश का औसत 938.14 मिमी होना चाहिए था, लेकिन बारिश हो सकी सिर्फ 619.35 मिमी।

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