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बदली सोच से सफलता की गाथा लिख रहे किसान
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केदारनगर (अंबेडकरनगर)। टांडा विकास खंड के विभिन्न क्षेत्रों में किसान बदली सोच के साथ की जा रही खेती से सफलता की नयी गाथा लिख रहे हैं। इसके तहत कुछ वर्ष पहले धान, गेहूं, गन्ना व मेंथा की खेती करने वाले उतरेथू क्षेत्र के किसान अब इनसे इतर फसलों को तरजीह दे रहे हैं। इस क्षेत्र में हरी सब्जियों की खेती के साथ लहसुन, प्याज, सरसों के अलावा सहफसली खेती बड़ेे पैमाने पर हो रही है। इसका किसानों को भरपूर लाभ भी मिल रहा है। नवाचार की इस खेती से किसानों को अच्छा फायदा हो रहा है और वह तरक्की के पथ पर आगे बढ़ने लगे हैं।
टांडा तहसील क्षेत्र व्यवसाय के मामले में हमेशा अव्वल रहा है। खेती किसानी की बात हो या फिर अन्य व्यवसाय की । इससे जुड़े लोग हमेशा नवाचार को प्राथमिकता देने में आगे रहते हैं। टांडा तहसील क्षेत्र के पश्चिमांचल में स्थित उतरेथू
भुवालपुर, देईपुर, हरिनाथपुर, मीठेपुर, महुवारी, मदारपुर, फरीदपुर, डींगरपुर, जियापुर, बलराम और इसके आस पास के कई गांवों के किसानों के बीच इन दिनों नवाचार खेती का असर साफ दिख रहा है। किसान पारंपरिक खेती से इतर अब तकनीक के सहारे हरी साग सब्जियों के साथ ही अन्य खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। किसानों का मानना है कि नवाचार के तहत शुरु हुई इस खेती से उन्हें बेहतर लाभ हो रहा है।
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मौसमी मार के कारण पारंपरिक धान व गेहूं की खेती अब तमाम बार घाटे का सौदा साबित होती है। मेंथा से किसानों को कुछ उम्मीद थी, लेकिन अब उसका भी दाम कुछ खास नही रह गया है। गन्ने की खेती में फायदा तो है, लेकिन मजूदरों के अभाव ने इस खेती को कठिन बना दिया है। ऐसे में अब इस क्षेत्र के किसानों को सरसों, लहसुन, प्याज व हरी सब्जियों की खेती से ज्यादा लाभ आ रहा है। साथ ही तमाम किसान सहफसली खेती को भी खूब कर रहे हैं। इससे उन्हें कम लागत में दोहरा लाभ मिल रहा है। इससे धान व गेहूं की खेती का क्षेत्रफल घटकर अन्य फसलों की खेती का क्षेत्रफल तेजी से बढ़ रहा है। देईपुर के विजय वर्मा, डींगुरपुर के विश्वनाथ जायसवाल, बलराम के भोला पटेल, आशापारा के राजेश पांडेय, खूखूतारा के रामायण सिंह के मुताबिक बढ़ती महंगाई के हिसाब से धान व गेहूं की खेती में लागत अधिक आ रही है।
नई खेती ने किसानों को दिखाया फायदा
चिनगी के बृजेंद्र वर्मा व भुवालपुर के रामतीरथ वर्मा ने इस बार 10-10 बीघा सरसों की खेती की है जबकि पहले धान व गेहूं की बड़े पैमाने पर खेती करते थे। उतेरथू के इन्द्रजीत मौर्य ने 2 बीघे लहसुन की खेती की है। बताया कि पिछली बार इससे कम क्षेत्रफल था। बेहतर लाभ होने पर उन्होंने इस बार इसका क्षेत्रफल बढ़ा दिया है। हरिनाथपुर के अरुण सिंह, मीठेपुर के अशोक कुमार सिंह, देईपुर के बवाली वर्मा शीतकालीन गन्ने के साथ सहफसली का लाभ उठा रहे हैं। सेनी का पूरा के जियालाल वर्मा दो बीघा क्षेत्रफल में गन्ने के साथ चने की सहफसली का फायदा ले रहे हैं।
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टांडा तहसील क्षेत्र व्यवसाय के मामले में हमेशा अव्वल रहा है। खेती किसानी की बात हो या फिर अन्य व्यवसाय की । इससे जुड़े लोग हमेशा नवाचार को प्राथमिकता देने में आगे रहते हैं। टांडा तहसील क्षेत्र के पश्चिमांचल में स्थित उतरेथू
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भुवालपुर, देईपुर, हरिनाथपुर, मीठेपुर, महुवारी, मदारपुर, फरीदपुर, डींगरपुर, जियापुर, बलराम और इसके आस पास के कई गांवों के किसानों के बीच इन दिनों नवाचार खेती का असर साफ दिख रहा है। किसान पारंपरिक खेती से इतर अब तकनीक के सहारे हरी साग सब्जियों के साथ ही अन्य खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। किसानों का मानना है कि नवाचार के तहत शुरु हुई इस खेती से उन्हें बेहतर लाभ हो रहा है।
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मौसमी मार के कारण पारंपरिक धान व गेहूं की खेती अब तमाम बार घाटे का सौदा साबित होती है। मेंथा से किसानों को कुछ उम्मीद थी, लेकिन अब उसका भी दाम कुछ खास नही रह गया है। गन्ने की खेती में फायदा तो है, लेकिन मजूदरों के अभाव ने इस खेती को कठिन बना दिया है। ऐसे में अब इस क्षेत्र के किसानों को सरसों, लहसुन, प्याज व हरी सब्जियों की खेती से ज्यादा लाभ आ रहा है। साथ ही तमाम किसान सहफसली खेती को भी खूब कर रहे हैं। इससे उन्हें कम लागत में दोहरा लाभ मिल रहा है। इससे धान व गेहूं की खेती का क्षेत्रफल घटकर अन्य फसलों की खेती का क्षेत्रफल तेजी से बढ़ रहा है। देईपुर के विजय वर्मा, डींगुरपुर के विश्वनाथ जायसवाल, बलराम के भोला पटेल, आशापारा के राजेश पांडेय, खूखूतारा के रामायण सिंह के मुताबिक बढ़ती महंगाई के हिसाब से धान व गेहूं की खेती में लागत अधिक आ रही है।
नई खेती ने किसानों को दिखाया फायदा
चिनगी के बृजेंद्र वर्मा व भुवालपुर के रामतीरथ वर्मा ने इस बार 10-10 बीघा सरसों की खेती की है जबकि पहले धान व गेहूं की बड़े पैमाने पर खेती करते थे। उतेरथू के इन्द्रजीत मौर्य ने 2 बीघे लहसुन की खेती की है। बताया कि पिछली बार इससे कम क्षेत्रफल था। बेहतर लाभ होने पर उन्होंने इस बार इसका क्षेत्रफल बढ़ा दिया है। हरिनाथपुर के अरुण सिंह, मीठेपुर के अशोक कुमार सिंह, देईपुर के बवाली वर्मा शीतकालीन गन्ने के साथ सहफसली का लाभ उठा रहे हैं। सेनी का पूरा के जियालाल वर्मा दो बीघा क्षेत्रफल में गन्ने के साथ चने की सहफसली का फायदा ले रहे हैं।