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किसानों पर जुल्म बर्दाश्त नहीं
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अंबेडकरनगर कलेक्ट्रेट पर लखीमपुर कांड को लेकर धरना देते भाकियू कार्यकर्ता।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। लखीमपुर खीरी कांड को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा व भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के निकट प्रदर्शन कर केंद्र व प्रदेश सरकार पर हमला बोला। कहा गया कि जिस प्रकार से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने वाले किसानों को रौंदा गया है, वह अत्यंत निंदनीय व भारत के भविष्य के लिए चिंताजनक है। किसानों पर जुल्म कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चेतावनी दी कि यदि मृतकों के परिवारीजनों को एक करोड़ व घायलों को 50 लाख रुपये की सहायता देने के साथ ही आश्रितों को सरकारी नौकरी नहीं दी गई, तो सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।
संयुक्त किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष विजय कुमार ने केंद्र व प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों का उत्पीड़न लगातार किया जा रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि करीब नौ माह हो गए किसानों को धरना देते हुए, लेकिन सरकार बात करने के लिए आगे नहीं आ रही है। लखीमपुर खीरी में जिस प्रकार से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे किसानों को रौंदा गया है, वह अत्यंत चिंताजनक है। भारत में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि अधिकार की मांग करने वालों को रौंद दिया गया हो। परशुराम पटेल, चलाकू पाल, राजनाथ पांडेय ने कहा कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज से कराई जाए। दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि घटना में मृतकों के परिवारीजन को एक करोड़ रुपये व घायलों को 50 लाख रुपये की सहायता दी जाए। इसके साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। गृह राज्यमंत्री को तत्काल बर्खास्त किया जाए। रणजीत वर्मा, मनोज कुमार, मोहनलाल, मस्तराम, त्रिभुवन, महमूद खान, शिवनरायन, सत्यदेव, रामतीरथ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही जरूरी कदम नहीं उठाया गया, तो सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।
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संयुक्त किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष विजय कुमार ने केंद्र व प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों का उत्पीड़न लगातार किया जा रहा है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि करीब नौ माह हो गए किसानों को धरना देते हुए, लेकिन सरकार बात करने के लिए आगे नहीं आ रही है। लखीमपुर खीरी में जिस प्रकार से शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे किसानों को रौंदा गया है, वह अत्यंत चिंताजनक है। भारत में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि अधिकार की मांग करने वालों को रौंद दिया गया हो। परशुराम पटेल, चलाकू पाल, राजनाथ पांडेय ने कहा कि पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज से कराई जाए। दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए।
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भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि घटना में मृतकों के परिवारीजन को एक करोड़ रुपये व घायलों को 50 लाख रुपये की सहायता दी जाए। इसके साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। गृह राज्यमंत्री को तत्काल बर्खास्त किया जाए। रणजीत वर्मा, मनोज कुमार, मोहनलाल, मस्तराम, त्रिभुवन, महमूद खान, शिवनरायन, सत्यदेव, रामतीरथ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही जरूरी कदम नहीं उठाया गया, तो सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा।
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