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Ambedkar Nagar News: शहर के साथ 200 गांवों की 24 घंटे गुल रही बिजली

Fri, 19 Jun 2026 10:53 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jun 2026 10:53 PM IST
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Electricity running 24 hours in the city along with 200 villages
मरैला पुलिस चौकी के निकट फुंकी भूमिगत केबल को खुदाई के बाद ठीक करते बिजलीकर्मी। स्रोत विभाग
अंबेडकरनगर। मरैला पुलिस चौकी के पास 33 हजार वोल्ट का भूमिगत बिजली केबल जलने से शहर सहित लगभग 200 गांवों की बिजली आपूर्ति 24 घंटे तक गुल रही। बिजली के बिना भीषण गर्मी में लोग बेहाल रहे।
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बृहस्पतिवार की शाम लगभग 5:30 बजे मरैला उपकेंद्र से संचालित चार फीडरों की बिजली आपूर्ति अचानक ठप हो गई। इसके बाद अकबरपुर शहरी क्षेत्र के शहजादपुर, दोस्तपुर, पहितीपुर मार्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के नवगवां, इटरौरा, बेवाना, कलुआकौरा, मुसईपुर, जगदीशपुर, कूढामोहमदगढ़, सस्पना, अटंगी, मुबारकपुर, मुखियहवां, इब्राहिमपुर, धौरहरा, सिसवा, टिकरिया, रामपुर सकरवारी, हसनपुर, शिवराजपुर, अहलादे, शिवरानाली, कुर्चा, गौहन्ना सहित करीब 200 गांवों को बिजली गुल हो गई।
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एक घंटे बाद भी आपूर्ति बहाल न होने पर बिजलीकर्मियों ने फाॅल्ट ढूढ़ना शुरू किया। कई घंटों की मशक्कत के बाद भी समस्या का पता नहीं चल सका तो अयोध्या से फॉल्ट ढूढ़ने वाली विशेष मशीन मंगानी पड़ी। रात करीब 11 बजे मरैला पुलिस चौकी के पास नाले के निकट भूमिगत केबल फुंकने का पता चला। रात का समय होने के कारण केबल को तुरंत बदला नहीं जा सका। इस दौरान, घरों में लगे इन्वर्टर भी जवाब दे गए, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई।
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भीषण गर्मी के कारण लोगों को रात भर जागना पड़ा। मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ हो गए, साथ ही लोगों को पानी की किल्लत का भी सामना करना पड़ा। शुक्रवार की सुबह जेसीबी मशीन की मदद से खोदाई कर केबल बदलने का काम शुरू हुआ, जो शाम चार बजे तक चला। शुक्रवार सुबह कुछ देर के लिए दूसरे बिजली घर से आपूर्ति बहाल की गई, जिससे लोगों ने सबमर्सिबल चलाकर घरों में पानी भरा। हालांकि, मुख्य आपूर्ति शुक्रवार शाम पांच बजे तक पूरी बहाल नहीं हो सकी थी। एक्सईएन प्रेमचंद ने बताया कि केबल जलने से आपूर्ति बाधित हुई थी। देर शाम केबल बदलकर आपूर्ति बहाल करा दी गई।

नहरें सूखीं, बिजली न होने से नलकूप भी दे रहे दगा
अंबेडकरनगर। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान की लंबी अवधि वाली प्रजातियों मंसूरी, सांभा और नरेंद्र की नर्सरी तैयार हो चुकी है। खेतों में रोपाई का समय भी आ गया है। धान की रोपाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। नहरों में अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया है। जबकि, अधिकतर किसानों की खेती नहरों के पानी या बारिश पर ही निर्भर है। मजबूरी में किसानों को प्राइवेट नलकूपों से खेत तक पानी पहुंचाना पड़ रहा है। इससे फसल उत्पादन की लागत बढ़ रही है। जिले में छोटी-बड़ी नहरों की संख्या 100 से अधिक है, लेकिन सभी सूखी हुई हैं। इस बार एक लाख हेक्टेयर में धान के बोने का लक्ष्य तय किया गया है। अब समय से नहरों में पानी नहीं आएगा तो इस लक्ष्य को पूरा करना मुश्किल होगा। जहांगीरगंज रजवाहा 50 किलोमीटर लंबा है। इसके किनारे लाखों हेक्टेयर खेत हैं। जिनकी सिंचाई इसी पर निर्भर है। किसान दीपक कुमार, सुरेश कुमार, रंजीत तिवारी, विवेक वर्मा आदि ने बताया की नहर में पानी नहीं है। वहीं, बिजली की आवाजाही से नलकूप से भी खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
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