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खिचड़ी में करें दान, मिलेगा पुण्य
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आलापुर (अंबेडकरनगर)। 14 जनवरी शुक्रवार को रात 8 बजकर 34 मिनट पर भगवान भास्कर मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे। मकर संक्रांति का आरंभ रोहिणी नक्षत्र में हो रहा है। इसी के साथ सूर्य भी उत्तरायण हो जाएंगे और खरमास समाप्त होगा। रात में संक्रांति लग रही है, इसलिए इसका पुण्य काल अगले दिन 15 जनवरी शनिवार को माना जाएगा। खिचड़ी का प्रसिद्ध पर्व एवं मकर संक्रांति का पवित्र स्नान 15 जनवरी शनिवार को मध्यान्ह काल तक किया जायेगा। वैदिक आश्रम नयागांव के आचार्य आशुतोष शुक्ल ने ये बातें कहीं।
आचार्य ने कहा कि गंगा नदी व अन्य नदियों तथा सरोवर इत्यादि में स्नान किया जा सकता है। इसी दिन खिचड़ी खाने और खिलाने की प्रथा है। साथ ही सूखा अन्न, खिचड़ी दान का भी विशेष महत्व है। इसके अलावा ऊनी वस्त्र, कंबल का दान पुण्यफल कारक होता है। कहा कि यह पर्व पूरे देश में अपनी अपनी परंपरा के अनुसार मनाया जाता है। पुत्र की कामना से शनि प्रदोष व्रत भी 15 जनवरी को किया जाएगा।
कहा जाता है कि इसी दिन गंगा मां भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी। ऐसे में इस दिन गंगा स्नान व तीर्थ स्थलों पर स्नान दान का विशेष महत्व माना गया है। मकर संक्रान्ति से मौसम में बदलाव आना आरंभ होता है। यही कारण है कि रातें छोटी व दिन बड़े होने लगते हैं। सूर्य के उतरी गोलार्द्ध की ओर जाने के कारण प्रकाश में तेजी बढ़ने लगती है। इसके फलस्वरूप प्राणियों में चेतना और कार्यशक्ति का विकास होता है।
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मकर संक्रान्ति के दिन देव भी धरती पर अवतरित होते हैं, आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है। अंधकार का नाश व प्रकाश का आगमन होता है। इस दिन पुण्य, दान, जप तथा धार्मिक अनुष्ठानों का अनन्य महत्व है। इस दिन गंगा स्नान व सूर्योपासना के बाद गुड़, चावल और तिल का दान श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन तिल का सेवन और साथ ही दान करना शुभ होता है। तिल का उबटन, तिल के तेल का प्रयोग, तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल मिश्रित जल का पान, तिल- हवन, तिल की वस्तुओं का सेवन व दान करना व्यक्ति के पापों में कमी करता है।
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आचार्य ने कहा कि गंगा नदी व अन्य नदियों तथा सरोवर इत्यादि में स्नान किया जा सकता है। इसी दिन खिचड़ी खाने और खिलाने की प्रथा है। साथ ही सूखा अन्न, खिचड़ी दान का भी विशेष महत्व है। इसके अलावा ऊनी वस्त्र, कंबल का दान पुण्यफल कारक होता है। कहा कि यह पर्व पूरे देश में अपनी अपनी परंपरा के अनुसार मनाया जाता है। पुत्र की कामना से शनि प्रदोष व्रत भी 15 जनवरी को किया जाएगा।
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कहा जाता है कि इसी दिन गंगा मां भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी। ऐसे में इस दिन गंगा स्नान व तीर्थ स्थलों पर स्नान दान का विशेष महत्व माना गया है। मकर संक्रान्ति से मौसम में बदलाव आना आरंभ होता है। यही कारण है कि रातें छोटी व दिन बड़े होने लगते हैं। सूर्य के उतरी गोलार्द्ध की ओर जाने के कारण प्रकाश में तेजी बढ़ने लगती है। इसके फलस्वरूप प्राणियों में चेतना और कार्यशक्ति का विकास होता है।
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मकर संक्रान्ति के दिन देव भी धरती पर अवतरित होते हैं, आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है। अंधकार का नाश व प्रकाश का आगमन होता है। इस दिन पुण्य, दान, जप तथा धार्मिक अनुष्ठानों का अनन्य महत्व है। इस दिन गंगा स्नान व सूर्योपासना के बाद गुड़, चावल और तिल का दान श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन तिल का सेवन और साथ ही दान करना शुभ होता है। तिल का उबटन, तिल के तेल का प्रयोग, तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल मिश्रित जल का पान, तिल- हवन, तिल की वस्तुओं का सेवन व दान करना व्यक्ति के पापों में कमी करता है।