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आजादी की दास्तां बयां कर भावुक हो गए धर्मराज

Thu, 12 Aug 2021 11:18 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 12 Aug 2021 11:18 PM IST
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Dharmraj became emotional after telling the story of freedom
अंबेडकरनगर। देश इस बार आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। लोग देश की आजादी के संघर्षों पर लंबी चर्चाएं भी करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में अमर उजाला टीम ने आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल रहे जलालपुर तहसील क्षेत्र के शेखूपुर निवासी धर्मराज वर्मा से मुलाकात की। आजादी की लड़ाई में सक्रिय भागीदारी करने वाले धर्मराज लगभग 12 माह तक जेल में रह चुके हैं। आजादी के संघर्षों को वे जब याद करते हैं, तो भावुक हो जाते हैं। मौजूदा व्यवस्था को लेकर उन्होंने खुलकर अपनी राय भी दी।
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जलालपुर तहसील क्षेत्र के शेखूपुर निवासी धर्मराज वर्मा आजादी के दीवानों में प्रमुखता से गिने जाते थे। क्षेत्र के युवाओं को एकजुट करने और उन्हें अंग्रेजी व्यवस्था के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित करने में उनका अहम योगदान रहा। तीन भाइयों में सबसे बड़े धर्मराज ने परिवार की जिम्मेदारियों से मुक्त होकर देश की सेवा को प्राथमिकता दी थी। आजादी का जुनून उन पर इस कदर सवार था कि शादी तक नहीं की। आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर गुरुवार को अमर उजाला टीम उनके घर पहुंची। उम्र के अंतिम पड़ाव में चल रहे धर्मराज का देश प्रेम आज भी उतना ही जवां है।
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आजादी की दास्तां सुनाते हुए वे कई बार भावुक हो उठे। उन्होंने बताया कि संघर्ष के उस दौर में उन्हें व उनके सहयोगियों को कई बार कई दिनों तक भूखे ही रहना पड़ा था, लेकिन साथियों का हौसला अडिग रहा। देशवासियों में आजादी की आग जब चहुंओर धधक रही थी, तो उस समय मैंने अपने सहयोगियों के साथ मालीपुर रेलवे स्टेशन के पास तार को काटकर कार्य को बाधित कर दिया था। इसके चलते अंग्रेजी सरकार ने उन्हें 12 माह फैजाबाद जेल में बंद रखा था। जेल में रहने के दौरान आजादी की लड़ाई को कुंद नहीं होने दिया। वहां से छूटने के बाद वे फिर पूरी सक्रियता से अंग्रेजों की खिलाफत करते रहे। बताया कि महात्मा गांधी के आंदोलन को धार देने के लिए वे प्रमुखता से जुटते थे।
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आजादी के संघर्षों को सुनाने के साथ ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी धर्मराज मौजूदा व्यवस्था को लेकर खिन्न दिखे। कहा कि मौजूदा समय में किसानों व गरीबों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। भ्रष्टाचार चहुंओर पसरा हुआ है। देश की आजादी के लिए लड़ने वालों ने कभी इस तरह की स्थिति के बारे में नहीं सोचा था। देश के किसानों, जवानों व गरीबों को अपनी प्राथमिकता में रखना चाहिए।
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