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मिट्टी के दीपों की मांग बढ़ी, तेजी से चल रहे चाक
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अंबेडकरनगर। रंग-बिरंगी झालरों व मोमबत्तियों के बीच मिट्टी के दीपक आज भी लोगों के बीच अपनी उपयोगिता बनाए हुए हैं। मिट्टी के दीपों की मांग बढ़ती देख कुम्हारों के हाथ तेजी से दीप बनाने के लिए चलने लगे हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार के मिट्टी के खिलौने की भी बिक्री बढ़-चढ़कर हो रही है। मिट्टी के दीपों की लगातार बढ़ती मांग का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि न सिर्फ ग्रामीण क्षेत्र, बल्कि नगरीय व शहरी क्षेत्रों में डोर-टू-डोर पहुंचकर कुम्हार बिक्री कर रहे हैं। मिट्टी के दीपों की मांग बढ़ने से कुम्हारों के चेहरे खिल गए हैं। इसके अलावा जिले की बाजारों में जगह-जगह ऐसी तमाम दुकानें भी सज गई हैं, जहां पहुंचकर उपभोक्ता खरीदारी कर रहे हैं।
रोशनी के पर्व के मौके पर लोग घरों से लेकर प्रतिष्ठानों को रंग-बिरंगी झालरों से भव्य ढंग से सजाते हैं। रंग-बिरंगी झालरों के बढ़ते प्रचलन के बावजूद नागरिकों के बीच मिट्टी के दीपों की मांग कम नहीं हुई है। विगत वर्षों की तुलना में इस बार दीपावली पर्व पर मिट्टी के दीपों की मांग अधिक है। दीपों की बढ़ती मांग को देखते हुए कुम्हारों के हाथ तेजी से चलने लगे हैं। कुम्हार अपने परिवार के साथ दीपों के साथ मिट्टी के बर्तन तैयार करने में जुटे हुए हैं।
मिट्टी के दीप व खिलौने तैयार कर बिक्री करने वाले कोटवा निवासी राजेश ने कहा कि विगत वर्षों की तुलना में इस बार मिट्टी के दीपों की मांग अधिक है। इसके अलावा खिलौने की भी बिक्री बढ़-चढ़कर हो रही है। इसे देखते हुए उनका पूरा परिवार परिश्रम से जुटा हुआ है। कहा कि जिस प्रकार से महंगाई है, उसके अनुसार दीपों के दाम में वृद्धि नहीं हुई है। 150 रुपये से 200 रुपये प्रति सैकड़ा की दर से बिक्री हो रही है। उकरा निवासी गंगाराम ने कहा कि मांग को देखते हुए उनका पूरा परिवार दिन-रात मिट्टी के दीपों व खिलौनों को तैयार करने में जुटा हुआ है। इस बार इनकी अच्छी बिक्री हो रही है। पटेलनगर तिराहे के निकट मिट्टी के दीपों व खिलौनों की दुकान करने वाले श्यामजीत ने कहा कि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में अधिक बिक्री हो रही है।
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रोशनी के पर्व के मौके पर लोग घरों से लेकर प्रतिष्ठानों को रंग-बिरंगी झालरों से भव्य ढंग से सजाते हैं। रंग-बिरंगी झालरों के बढ़ते प्रचलन के बावजूद नागरिकों के बीच मिट्टी के दीपों की मांग कम नहीं हुई है। विगत वर्षों की तुलना में इस बार दीपावली पर्व पर मिट्टी के दीपों की मांग अधिक है। दीपों की बढ़ती मांग को देखते हुए कुम्हारों के हाथ तेजी से चलने लगे हैं। कुम्हार अपने परिवार के साथ दीपों के साथ मिट्टी के बर्तन तैयार करने में जुटे हुए हैं।
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मिट्टी के दीप व खिलौने तैयार कर बिक्री करने वाले कोटवा निवासी राजेश ने कहा कि विगत वर्षों की तुलना में इस बार मिट्टी के दीपों की मांग अधिक है। इसके अलावा खिलौने की भी बिक्री बढ़-चढ़कर हो रही है। इसे देखते हुए उनका पूरा परिवार परिश्रम से जुटा हुआ है। कहा कि जिस प्रकार से महंगाई है, उसके अनुसार दीपों के दाम में वृद्धि नहीं हुई है। 150 रुपये से 200 रुपये प्रति सैकड़ा की दर से बिक्री हो रही है। उकरा निवासी गंगाराम ने कहा कि मांग को देखते हुए उनका पूरा परिवार दिन-रात मिट्टी के दीपों व खिलौनों को तैयार करने में जुटा हुआ है। इस बार इनकी अच्छी बिक्री हो रही है। पटेलनगर तिराहे के निकट मिट्टी के दीपों व खिलौनों की दुकान करने वाले श्यामजीत ने कहा कि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में अधिक बिक्री हो रही है।
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