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आरसी के बाद भी वसूल नहीं हो पा रहा एमडीएम का सवार दो करोड़ बकाया
Updated Sun, 14 Jan 2018 10:33 PM IST
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अंबेडकरनगर। आरसी जारी हुए छह वर्ष से अधिक का समय बीत गया, लेकिन अब तक जिले के तत्कालीन 990 ग्राम प्रधानों से एमडीएम की लगभग सवा दो करोड़ रुपये राशि की वसूली राजस्व विभाग की ओर से नहीं की जा सकी है। अब शासन ने संबंधित विभाग से ऐसे ग्राम प्रधानों की सूची मांगी है, जो एमडीएम की राशि वर्षों से दबाए बैठे हैं।
गौरतलब है कि परिषदीय विद्यालयों में एमडीएम योजना के तहत बच्चों को भोजन मिल सके, इसके लिए अनाज की व्यवस्था ग्राम प्रधान द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। पंचायत चुनाव होने के बाद तमाम ग्राम पंचायतों में नए ग्राम प्रधान निर्वाचित हुए। नतीजा यह रहा कि पराजित ग्राम प्रधानों द्वारा एमडीएम का अनाज दबा लिया गया। उसे नए ग्राम प्रधानों को हस्तांतरित नहीं कराया गया। विभाग की तरफ से कई बार नोटिस जारी किया गया, लेकिन प्रधानों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नतीजा यह रहा कि 5 मई 2011 को तत्कालीन बीएसए की संस्तुति पर संबंधित तहसीलों के एसडीएम की ओर से तत्कालीन कुल 990 ग्राम प्रधानों के विरुद्ध आरसी जारी किया गया। इन ग्राम प्रधानों पर कुल 2 करोड़ 19 लाख 77 हजार 424 रुपये का बकाया था।
जिन प्रधानों को आरसी जारी की गई, उनमें भियांव विकास खंड के 136 ग्राम प्रधान पर 51 लाख 63 हजार 690 रुपये, भीटी विकास खंड के 91 ग्राम प्रधानों पर 9 लाख 7 हजार 390 रुपये, रामनगर के 136 ग्राम प्रधानों पर 24 लाख 17 हजार 163 रुपये, जहांगीरगंज के 116 ग्राम प्रधानों पर 22 लाख 52 हजार 501 रुपये, जलालपुर के 158 ग्राम प्रधान के 35 लाख 78 हजार 139, कटेहरी विकास खण्ड के 106 ग्राम प्रधानों पर 23 लाख 30 हजार 852 रुपये, टांडा के 127 ग्राम प्रधानों पर 24 लाख 65 हजार 567, बसखारी के 87 ग्राम प्रधानों पर 21 लाख 64 हजार 583 व अकबरपुर विकास खण्ड के 33 ग्राम प्रधानों पर 6 लाख 97 हजार 527 रुपये का बकाया है। राजस्व विभाग के बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद संबंधित ग्राम प्रधानों ने राशि जमा नहीं की। अब जबकि बच्चों को अक्षय पात्र योजना के तहत दोपहर का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा, तो शासन ने विभाग से ऐसे प्रधानों सूची मांगी है, जिन्होंने अब तक राशि नहीं जमा की है। उधर बीएसए अतुल कुमार सिंह ने बताया कि एमडीएम की राशि दबाए बैठे तत्कालीन ग्राम प्रधानों की सूची शीघ्र ही शासन को भेज दी जाएगी।
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गौरतलब है कि परिषदीय विद्यालयों में एमडीएम योजना के तहत बच्चों को भोजन मिल सके, इसके लिए अनाज की व्यवस्था ग्राम प्रधान द्वारा उपलब्ध कराई जाती है। पंचायत चुनाव होने के बाद तमाम ग्राम पंचायतों में नए ग्राम प्रधान निर्वाचित हुए। नतीजा यह रहा कि पराजित ग्राम प्रधानों द्वारा एमडीएम का अनाज दबा लिया गया। उसे नए ग्राम प्रधानों को हस्तांतरित नहीं कराया गया। विभाग की तरफ से कई बार नोटिस जारी किया गया, लेकिन प्रधानों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। नतीजा यह रहा कि 5 मई 2011 को तत्कालीन बीएसए की संस्तुति पर संबंधित तहसीलों के एसडीएम की ओर से तत्कालीन कुल 990 ग्राम प्रधानों के विरुद्ध आरसी जारी किया गया। इन ग्राम प्रधानों पर कुल 2 करोड़ 19 लाख 77 हजार 424 रुपये का बकाया था।
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जिन प्रधानों को आरसी जारी की गई, उनमें भियांव विकास खंड के 136 ग्राम प्रधान पर 51 लाख 63 हजार 690 रुपये, भीटी विकास खंड के 91 ग्राम प्रधानों पर 9 लाख 7 हजार 390 रुपये, रामनगर के 136 ग्राम प्रधानों पर 24 लाख 17 हजार 163 रुपये, जहांगीरगंज के 116 ग्राम प्रधानों पर 22 लाख 52 हजार 501 रुपये, जलालपुर के 158 ग्राम प्रधान के 35 लाख 78 हजार 139, कटेहरी विकास खण्ड के 106 ग्राम प्रधानों पर 23 लाख 30 हजार 852 रुपये, टांडा के 127 ग्राम प्रधानों पर 24 लाख 65 हजार 567, बसखारी के 87 ग्राम प्रधानों पर 21 लाख 64 हजार 583 व अकबरपुर विकास खण्ड के 33 ग्राम प्रधानों पर 6 लाख 97 हजार 527 रुपये का बकाया है। राजस्व विभाग के बार-बार नोटिस जारी करने के बावजूद संबंधित ग्राम प्रधानों ने राशि जमा नहीं की। अब जबकि बच्चों को अक्षय पात्र योजना के तहत दोपहर का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा, तो शासन ने विभाग से ऐसे प्रधानों सूची मांगी है, जिन्होंने अब तक राशि नहीं जमा की है। उधर बीएसए अतुल कुमार सिंह ने बताया कि एमडीएम की राशि दबाए बैठे तत्कालीन ग्राम प्रधानों की सूची शीघ्र ही शासन को भेज दी जाएगी।
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