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Ambedkar Nagar News: समितियों पर ताले, नहीं मिली खाद
Sun, 10 Nov 2024 12:06 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sun, 10 Nov 2024 12:06 AM IST
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जलालपुर के अरई में सहकारी समिति पर लटकता ताला।
अंबेडकरनगर। गेहूं, चना, मटर व सरसों की बोआई के लिए किसान डीएपी खाद के लिए परेशान हैं। कई समितियों पर शनिवार को पहुंचे किसानों को लाइन में लगने के बाद भी निराश होकर वापस लौटना पड़ा। समितियों पर ताला लटका मिलने से निराश किसानों ने कहा कि खाद की उपलब्धता तेजी से सुनिश्चित कराई जाए।
गेहूं के साथ ही दलहन, तिलहन फसलों व आलू की बोआई का दौर शुरू है। 119261 हेक्टेअर में गेहूं, 13551 हेक्टेअर में सरसों, 1682 हेक्टेअर में मटर तथा 408 हेक्टेअर में मंसूर बोआई का लक्ष्य है। आलू समेत अन्य फसलों के लिए भी किसान बड़े पैमाने पर बोआई करते हैं। बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को इस समय खेतों में डीएपी का प्रयोग करना है। यह खाद किसानों को आसानी से नहीं मिल पा रही।
अकबरपुर तहसील के अशरफपुर बरवां स्थित सहकारी केंद्र पर शनिवार को महिला व पुरुष किसान खाद पाने के लिए पहुंचे, लेकिन निराश होकर लौटना पड़ा। यहां काफी देर तक किसान लाइन में लगे रहे, लेकिन खाद नहीं मिल पाई। भियांव के दुल्हूपुर सहकारी समिति, अरईपुर सहकारी समिति समेत अन्य समितियों में ताला लटका देख किसान बैरंग लौट गए। महरुआ समिति पर यूरिया व एनपीके खाद है, लेकिन किसान नहीं दिखे। जलालपुर सहकारी संघ पर खाद तो उपलब्ध थी, लेकिन तकनीकी समस्या से वितरण नहीं हो पाया। यहां से भी किसानों को निराश लौटना पड़ा।
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कागजों में आंकड़े सुहावने, हकीकत इतर
खाद की उपलब्धता को लेकर आंकड़ों की बात करें तो स्थिति बेहतर नजर आती है। यह बात अलग है कि किसान खाद के लिए परेशान हैं। जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय कहते हैं कि नवंबर माह का लक्ष्य 5150 मीट्रिक टन है। इससे अधिक 5210 मीट्रिक टन खाद मिल चुकी है। 1151 मीट्रिक टन का वितरण कर दिया गया है। अयोध्या में रैक से भी खाद मिल गई है। समितियों पर जा रही है। एआर कोऑपरेटिव राघवेंद्र प्रताप शुक्ल ने बताया कि 90 समितियों पर डीएपी व एनपीके खाद उपलब्ध है। आठ समिति नहीं चल रही हैं। खाद को लेकर किसानों को कोई दिक्कत नहीं है। आठ समितियों पर खाद भेजी जा रही है।
खाद मिले तो बने बात
रफीगंज के राजितराम राजभर कहते हैं कि परिश्रम कर हमने फसल तो लगा दी। अब खाद की जरूरत है तो भटकना पड़ रहा है। प्रशासन को समय रहते खाद का प्रबंध कर लेना चाहिए था। गोविंद गनेशपुर अटिका के आनंद त्रिपाठी ने कहा कि प्रत्येक वर्ष इसी तरह की दिक्कत होती है। यह स्थिति ठीक नहीं है। किसानों की सुध न जाने क्यों समय रहते नहीं ली जाती।
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गेहूं के साथ ही दलहन, तिलहन फसलों व आलू की बोआई का दौर शुरू है। 119261 हेक्टेअर में गेहूं, 13551 हेक्टेअर में सरसों, 1682 हेक्टेअर में मटर तथा 408 हेक्टेअर में मंसूर बोआई का लक्ष्य है। आलू समेत अन्य फसलों के लिए भी किसान बड़े पैमाने पर बोआई करते हैं। बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को इस समय खेतों में डीएपी का प्रयोग करना है। यह खाद किसानों को आसानी से नहीं मिल पा रही।
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अकबरपुर तहसील के अशरफपुर बरवां स्थित सहकारी केंद्र पर शनिवार को महिला व पुरुष किसान खाद पाने के लिए पहुंचे, लेकिन निराश होकर लौटना पड़ा। यहां काफी देर तक किसान लाइन में लगे रहे, लेकिन खाद नहीं मिल पाई। भियांव के दुल्हूपुर सहकारी समिति, अरईपुर सहकारी समिति समेत अन्य समितियों में ताला लटका देख किसान बैरंग लौट गए। महरुआ समिति पर यूरिया व एनपीके खाद है, लेकिन किसान नहीं दिखे। जलालपुर सहकारी संघ पर खाद तो उपलब्ध थी, लेकिन तकनीकी समस्या से वितरण नहीं हो पाया। यहां से भी किसानों को निराश लौटना पड़ा।
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कागजों में आंकड़े सुहावने, हकीकत इतर
खाद की उपलब्धता को लेकर आंकड़ों की बात करें तो स्थिति बेहतर नजर आती है। यह बात अलग है कि किसान खाद के लिए परेशान हैं। जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय कहते हैं कि नवंबर माह का लक्ष्य 5150 मीट्रिक टन है। इससे अधिक 5210 मीट्रिक टन खाद मिल चुकी है। 1151 मीट्रिक टन का वितरण कर दिया गया है। अयोध्या में रैक से भी खाद मिल गई है। समितियों पर जा रही है। एआर कोऑपरेटिव राघवेंद्र प्रताप शुक्ल ने बताया कि 90 समितियों पर डीएपी व एनपीके खाद उपलब्ध है। आठ समिति नहीं चल रही हैं। खाद को लेकर किसानों को कोई दिक्कत नहीं है। आठ समितियों पर खाद भेजी जा रही है।
खाद मिले तो बने बात
रफीगंज के राजितराम राजभर कहते हैं कि परिश्रम कर हमने फसल तो लगा दी। अब खाद की जरूरत है तो भटकना पड़ रहा है। प्रशासन को समय रहते खाद का प्रबंध कर लेना चाहिए था। गोविंद गनेशपुर अटिका के आनंद त्रिपाठी ने कहा कि प्रत्येक वर्ष इसी तरह की दिक्कत होती है। यह स्थिति ठीक नहीं है। किसानों की सुध न जाने क्यों समय रहते नहीं ली जाती।

जलालपुर के अरई में सहकारी समिति पर लटकता ताला।