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अरदास और लंगर के साथ मना पर्व
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टांडा। नगर के मोहल्ला छज्जापुर स्थित गुरुद्वारा गुरुसिंह सभा में गुरुग्रंथ साहिब के प्रकाश पर्व पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन हुआ। सभा में धार्मिक वातावरण में पांच सितंबर की सुबह प्रारंभ हुआ श्री अखंड पाठ मंगलवार की सुबह संपन्न हुआ। अखंड पाठ समापन के बाद शब्द कीर्तन हुआ और दोपहर में गुरु का अटूट लंगर बंटा।
प्रकाश पर्व के बारे में ज्ञानी सरदार हरप्रीत सिंह व गुरुसिंह सभा के संरक्षक सरदार राजेश सिंह सलूजा ने बताया कि गुरु गोविंद साहिब ने वर्ष 1706 में गुरु तेगबहादुर की वाणी जोड़ी थी, वर्ष 1708 में गुरु गद्दी पर आसीन किया। तब से इसे श्रीगुरु ग्रंथ साहिब कहा जाने लगा। गुरु अरजन साहिब को ग्रंथ का संपादन कार्य पूर्ण करने में करीब पांच वर्ष का समय लगा था। कुल 1430 पृष्ठों में पृष्ठ संख्या 14 से पृष्ठ 1335 तक की वाणी रागों पर आधारित है। प्रयुक्त हुए रागों की संख्या 31 है। वाणी का मुख्य संदेश एकत्व है।
सभा के प्रधान सरदार अरमजीत सिंह ने बताया कि श्रीगुरुग्रंथ साहिब में परमात्मा के निराकार, अविनाशी, सृष्टि के सृजनकर्ता पालक, उद्वारकर्ता के रूप की चर्चा की गई है। परमात्मा की कृपा प्राप्त करने एक ही मार्ग बताया गया है, प्रेम का। गुरू की वाणी परमात्मा को मन में खोजने व घट घट में देखने की प्रेरणा देती है। रात में शब्द कीर्तन के साथ तीन दिवसीय कार्यक्रम संपन्न हुआ। तीन दिवसीय कार्यक्रम में गुरदीप सिंह, हरजीत सिंह, राजेन्द्र सिंह सलूजा, त्रिलोक सिंह, अंशू बग्गा समेत तमाम गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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प्रकाश पर्व के बारे में ज्ञानी सरदार हरप्रीत सिंह व गुरुसिंह सभा के संरक्षक सरदार राजेश सिंह सलूजा ने बताया कि गुरु गोविंद साहिब ने वर्ष 1706 में गुरु तेगबहादुर की वाणी जोड़ी थी, वर्ष 1708 में गुरु गद्दी पर आसीन किया। तब से इसे श्रीगुरु ग्रंथ साहिब कहा जाने लगा। गुरु अरजन साहिब को ग्रंथ का संपादन कार्य पूर्ण करने में करीब पांच वर्ष का समय लगा था। कुल 1430 पृष्ठों में पृष्ठ संख्या 14 से पृष्ठ 1335 तक की वाणी रागों पर आधारित है। प्रयुक्त हुए रागों की संख्या 31 है। वाणी का मुख्य संदेश एकत्व है।
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सभा के प्रधान सरदार अरमजीत सिंह ने बताया कि श्रीगुरुग्रंथ साहिब में परमात्मा के निराकार, अविनाशी, सृष्टि के सृजनकर्ता पालक, उद्वारकर्ता के रूप की चर्चा की गई है। परमात्मा की कृपा प्राप्त करने एक ही मार्ग बताया गया है, प्रेम का। गुरू की वाणी परमात्मा को मन में खोजने व घट घट में देखने की प्रेरणा देती है। रात में शब्द कीर्तन के साथ तीन दिवसीय कार्यक्रम संपन्न हुआ। तीन दिवसीय कार्यक्रम में गुरदीप सिंह, हरजीत सिंह, राजेन्द्र सिंह सलूजा, त्रिलोक सिंह, अंशू बग्गा समेत तमाम गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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