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सात दिन बाद दर्ज हुआ घायल युवती का केस
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अंबेडकरनगर। दबंगों की पिटाई से घायल युवती को मालीपुर थाने से बैरंग लौटाये जाने के मामले में सात दिन बाद पुलिस ने आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया। इस पूरे मामले में मालीपुर पुलिस के रवैये को लेकर लोगों में रोष है। पीड़िता के समर्थन में आगे आए लोग अब इस मामले की शिकायत पुलिस महानिदेशक तथा प्रमुख सचिव से किये जाने की तैयारी में है।
करीब एक सप्ताह पहले मालीपुर थाना क्षेत्र के अनुसूचित वर्ग से जुड़े चितौना कला निवासी धीरज व उनकी बहन नेहा की दबंगों ने पिटाई कर दी थी। इसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गये थे। थाने पहुंचने पर पुलिस ने केस दर्ज करने की बजाय उन्हें समझा बुझा कर वापस लौटा दिया।
अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद ही एसपी आलोक प्रियदर्शी की नाराजगी के बाद मालीपुर पुलिस सक्रिय हुई। इसके बाद बीते गुरुवार को पूरे दिन घायल युवती के भाई व पीड़ित धीरज को केस दर्ज कराने के लिए बुलाकर थाने में बैठाए रखा।
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पीड़ित धीरज ने बताया कि उसका केस दर्ज कर पुलिस ने शुक्रवार को एफआईआर की कापी दी है। इसके लिए धीरज ने अमर उजाला का आभार जताते हुए कहा कि बेबाकी के साथ इस पूरे मामले को उठाने के कारण ही इस मामले में केस दर्ज हो पाया है। उसने बताया कि अभी मेडिकल के आधार पर धाराएं नही लगी हैं।
दिखावे को फोटो, हकीकत में बेफिक्री
मालीपुर पुलिस की मनमानी को लेकर लगातार गंभीर सवाल खड़े होते रहते हैं। अक्सर पुलिस मीडिया सेल की तरफ से थाने पर पहुंचने वाली महिलाओं को कहीं मिठाई खिलाते तो कहीं पानी पिलाते दिखाया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता बालमुकुंद धुरिया कहते हैं कि यह सब दिखावा है। सच यह है कि अभी भी थानों में पीड़ित महिलाओं व अन्य लोगों की सुनवाई नहीं हो पाती है। मालीपुर में खून से लथपथ युवती का केस दर्ज करने की बजाय उसे वापस लौटा देने की घटना इसका सीधा प्रमाण है।
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करीब एक सप्ताह पहले मालीपुर थाना क्षेत्र के अनुसूचित वर्ग से जुड़े चितौना कला निवासी धीरज व उनकी बहन नेहा की दबंगों ने पिटाई कर दी थी। इसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हो गये थे। थाने पहुंचने पर पुलिस ने केस दर्ज करने की बजाय उन्हें समझा बुझा कर वापस लौटा दिया।
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अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद ही एसपी आलोक प्रियदर्शी की नाराजगी के बाद मालीपुर पुलिस सक्रिय हुई। इसके बाद बीते गुरुवार को पूरे दिन घायल युवती के भाई व पीड़ित धीरज को केस दर्ज कराने के लिए बुलाकर थाने में बैठाए रखा।
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पीड़ित धीरज ने बताया कि उसका केस दर्ज कर पुलिस ने शुक्रवार को एफआईआर की कापी दी है। इसके लिए धीरज ने अमर उजाला का आभार जताते हुए कहा कि बेबाकी के साथ इस पूरे मामले को उठाने के कारण ही इस मामले में केस दर्ज हो पाया है। उसने बताया कि अभी मेडिकल के आधार पर धाराएं नही लगी हैं।
दिखावे को फोटो, हकीकत में बेफिक्री
मालीपुर पुलिस की मनमानी को लेकर लगातार गंभीर सवाल खड़े होते रहते हैं। अक्सर पुलिस मीडिया सेल की तरफ से थाने पर पहुंचने वाली महिलाओं को कहीं मिठाई खिलाते तो कहीं पानी पिलाते दिखाया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता बालमुकुंद धुरिया कहते हैं कि यह सब दिखावा है। सच यह है कि अभी भी थानों में पीड़ित महिलाओं व अन्य लोगों की सुनवाई नहीं हो पाती है। मालीपुर में खून से लथपथ युवती का केस दर्ज करने की बजाय उसे वापस लौटा देने की घटना इसका सीधा प्रमाण है।