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335 मवेशियों के लिए सिर्फ चार शेड का ही प्रबंध

Sun, 18 Aug 2019 12:21 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Aug 2019 12:21 AM IST
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Animal
अंबेडकरनगर। राज्य सरकार भले ही पशु आश्रय स्थलों पर चाक-चौबंद व्यवस्था को लेकर संवेदनशील हो, लेकिन जिले में इन आश्रय स्थलों का हाल काफी खराब है। कहीं 335 मवेशियों के लिए सिर्फ दो टिन शेड व दो छप्पर के शेड मौजूद हैं तो कहीं डेढ़ सौ मवेशियों को सिर्फ तीन शेड में रखा गया है। पशुओं की देखभाल के लिए रात में कोई मौजूद भी नहीं रहता। ज्यादातर जगहों पर पशुओं के लिए हरा चारा नहीं है सिर्फ भूसे से काम चलाया जा रहा है। सफाई का भी बुरा हाल है। ज्यादातर जगह कटिया से बिजली कनेक्शन लेकर काम चलाया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पशु आश्रय स्थलों को लेकर खासे गंभीर हैं, लेकिन जिले के अफसरों के इन बेजुवानों की कोई फिक्र नहीं है। जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने भी बीते दिनों कई बार फरमान जारी किए। लोगों को लगा कि व्यवस्थाएं चाक चौबंद हो जाएंगी, लेकिन अब भी आश्रय स्थलों में बड़े पैमाने पर लापरवाही व मनमानी बरती जा रही है।
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अधिकारियों को यह देखने व समझने की फुरसत नहीं है कि जिला स्तर से लेकर शासन स्तर से दिए जा रहे निर्देशों का पालन हो भी पा रहा है या नहीं, जबकि कर्मचारी इसलिए मनमानी कर रहे हैं, क्योंकि जमीनी स्तर तक जाने की सुध उच्चाधिकारियों को नहीं है। यह हाल तब है जबकि जिले में बीते दिनों पशु आश्रय स्थलों के लिए अलग से जिलास्तरीय अधिकारियों को प्रभारी बनाया गया था। हालांकि, यह सब कुछ भी सिर्फ रस्मअदायगी बनकर रह गया। अमर उजाला टीम ने शनिवार को पशु आश्रय स्थलों का जायजा लिया तो वहां अव्यवस्थाओं का आलम नजर आया।
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आलापुर तहसील के तेंदुआईकला स्थित पशु आश्रय स्थल पूरी तरह बदहाल मिला। 150 मवेशियों के लिए मात्र दो छप्पर व एक टिन शेड हैं। लापरवाही का आलम यह कि शाम सात बजे से सुबह आठ बजे तक मवेशी भगवान भरोसे रहते हैं। कारण यह कि यहां तैनात कर्मचारी इस दौरान स्थल पर रहते ही नहीं हैं। मवेशियों की भूख मिटाने के लिए न तो भूसा है और न हरा चारा। मात्र चार किलो पशु आहार ही शनिवार को पशु आश्रय स्थल पर मिला। मनरेगा मजदूर रामधारी व राजबहादुर को मजदूरी नहीं मिली है। कहने को सात कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन वे अपनी जिम्मेदारी का निर्वह्न बेहतर ढंग से नहीं कर रहे। पंचायत सचिव कमलेश निषाद स्वयं कहते हैं कि रात में कोई भी कर्मचारी नहीं रहता। ऐसे में यदि पशुओं को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
जलालपुर तहसील क्षेत्र के मालीपुर स्थित पशु आश्रय स्थल तक पहुंचने का रास्ता तक नहीं है। पशुओं की देखभाल के लिए कर्मचारी सुभाष व इंद्रेश की तैनाती है, लेकिन वह भी रात में नहीं रहते। मौके पर 38 मवेशी आश्रयस्थल में मौजूद हैं। इनके चारे के लिए 25 क्विलंट भूसा तो था, लेकिन हरे चारे की कोई व्यवस्था नहीं थी। परिसर में चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ मिला। कटिया डालकर बिजली का कनेक्शन लिया गया है। टिन शेड बरसात होने पर टपकता है।
भीटी तहसील क्षेत्र के केवारी परमानंद गांव स्थित पशु आश्रयस्थल में मौजूदा समय में 335 मवेशी मौजूद हैं। इनके भोजन के लिए सिर्फ भूसा व पशु आहार ही स्थल पर मौजूद है। हरे चारे की कोई व्यवस्था नहीं है। इनके रहने के लिए दो छप्पर व दो टिन शेड हैं जो पशुओं की संख्या को देखते हुए काफी कम हैं। पशुओं की देखभाल के लिए चिकित्सक डॉ. सुमित कुमार की ड्यूटी है, लेकिन वह नियमित जांच के लिए नहीं पहुंचते। कहने को दो चौकीदार व 10 सफाईकर्मी मौजूद हैं, लेकिन साफ सफाई पूरी तरह बेपटरी है। चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है।
अकबरपुर तहसील क्षेत्र के मिर्जापुर स्थित पशु आश्रय स्थल पूरी तरह बदहाल है। यहां दो टीन शेड हैं। मौजूदा समय में 31 पशु आश्रयस्थल में मौजूद हैं। तीन दिन से एक मवेशी बीमार है। उसका इलाज चल तो रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार लापरवाही बरती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते पशुओं का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहां साफ सफाई व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी है। समुचित साफ सफाई न होने से चारों तरफ गंदगी पसरी हुई है। चारे के लिए 10 क्विंटल भूसा तो है, लेकिन हरा चारा नहीं मिला।

पशु आश्रय स्थलों पर लगातार सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। कई जगह स्थायी निर्माण कराया जा रहा है। हर दिन पशुओं के उपचार का प्रबंध है। चारे का फिलहाल कोई संकट नहीं है। साफ-सफाई के निर्देश दिए जाते हैं। आने वाले कुछ दिनों में पशु आश्रय स्थलों की दशा में और सुधार देखने को मिलेगा।
- अमरनाथ रॉय, एडीएम
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