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Ambedkar Nagar News: गुड़ की सोंधी महक से चमक रहा अनिल का घर-आंगन
Wed, 29 Jan 2025 11:13 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Wed, 29 Jan 2025 11:13 PM IST
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टांडा के आलमपुर शेखपुर में गुड़ तैयार करते अनिल वर्मा।
अंबेडकरनगर। गांव की माटी से प्रेम व घर परिवार की जिम्मेदारी के चलते अनिल रोजी-रोटी के लिए बाहर नहीं जा सके। यहीं पर रहकर कुछ करने की सोच रहे थे कि बगल गांव के किसान ने गुड़ बनाकर बेचने का सुझाव दिया। पारंपरिक धान-गेहूं की खेती छोड़ अनिल ने पहली बार दो बीघा गन्ना तैयार कर क्रेशर लगाया और गुड़ बनाना शुरू किया। पहली बार मुनाफा तो नहीं हुआ, लेकिन स्वरोजगार का रास्ता जरूर मिल गया। इसी के बाद से उनका व्यवसाय चल निकला तो आर्थिक तरक्की भी होने लगी।
टांडा ब्लॉक के आलमपुर शेखपुर निवासी अनिल वर्मा का संयुक्त परिवार है। पांच भाइयों में वे दूसरे नंबर के हैं। खेती-किसानी इनका पुश्तैनी काम रहा है। परिवार में सदस्यों के बढ़ने के साथ ही जिम्मेदारियां भी बढ़ गईं। पारंपरिक खेती से घर-परिवार का खर्च चलने में दिक्कत हुई तो सभी ने मिलकर कुछ नया करने की ठानी। घर से बाहर भी नहीं जाना पड़े और यहीं से परिवार की गाड़ी चले, इसके लिए अन्य भाइयों की सहमति से अनिल ने शुरुआत में दो बीघे गन्ना व दो बीघे केला की खेती से शुरुआत की। गन्ने को चीनी मिल में देने के बजाय अनिल ने क्रेशर लगाकर गुड़ बनाने का प्लांट लगा दिया। तरीका न पता होने से पहली बार नुकसान जरूर हुआ, लेकिन बहुत कुछ सीखने को मिला। अगले साल पूरी तैयारी के साथ क्रेशर शुरू किया और मुनाफा आया। तब से इसको अपना व्यवसाय बनाकर पूरा परिवार इसी काम में लग गया है। इस बार इनका तीसरा वर्ष है। अब अनिल इस व्यवसाय में पूरी तरह परिपक्व हो चुके हैं। उधर, केले की खेती भी तैयार हो चुकी है। वे बताते हैं कि दोनों फसलों को एक साथ करने से पैसे के लिए भटकना नहीं पड़ता है। एक फसल की पूंजी दूसरे में लगाकर दोनों से आय करते हैं।
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टांडा ब्लॉक के आलमपुर शेखपुर निवासी अनिल वर्मा का संयुक्त परिवार है। पांच भाइयों में वे दूसरे नंबर के हैं। खेती-किसानी इनका पुश्तैनी काम रहा है। परिवार में सदस्यों के बढ़ने के साथ ही जिम्मेदारियां भी बढ़ गईं। पारंपरिक खेती से घर-परिवार का खर्च चलने में दिक्कत हुई तो सभी ने मिलकर कुछ नया करने की ठानी। घर से बाहर भी नहीं जाना पड़े और यहीं से परिवार की गाड़ी चले, इसके लिए अन्य भाइयों की सहमति से अनिल ने शुरुआत में दो बीघे गन्ना व दो बीघे केला की खेती से शुरुआत की। गन्ने को चीनी मिल में देने के बजाय अनिल ने क्रेशर लगाकर गुड़ बनाने का प्लांट लगा दिया। तरीका न पता होने से पहली बार नुकसान जरूर हुआ, लेकिन बहुत कुछ सीखने को मिला। अगले साल पूरी तैयारी के साथ क्रेशर शुरू किया और मुनाफा आया। तब से इसको अपना व्यवसाय बनाकर पूरा परिवार इसी काम में लग गया है। इस बार इनका तीसरा वर्ष है। अब अनिल इस व्यवसाय में पूरी तरह परिपक्व हो चुके हैं। उधर, केले की खेती भी तैयार हो चुकी है। वे बताते हैं कि दोनों फसलों को एक साथ करने से पैसे के लिए भटकना नहीं पड़ता है। एक फसल की पूंजी दूसरे में लगाकर दोनों से आय करते हैं।
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