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एंबुलेंस कर्मियों ने मांगों को लेकर आठवें दिन भी बुलंद की आवाज
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अंबेडकरनगर। विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर डटे एंबुलेंस कर्मियों ने गुरुवार आठवें दिन भी आवाज बुलंद की। उनका कहना है कि जब तक ठेका प्रथा समाप्त नहीं हो जाती तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। एंबुलेंस कर्मी दिन रात अपनी सेवाएं देते हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं के निस्तारण में हीलाहवाली बरती जाती है। तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई है।
ठेका प्रथा को समाप्त करने की मांग को लेकर धरने पर डटे एंबुलेंस कर्मियों ने गुरुवार को भी कलेक्ट्रेट पर आवाज मुखर की। शिवप्रकाश त्रिपाठी के नेतृत्व में आवाज बुलंद कर रहे कर्मियों ने कहा कि एंबुलेंस कर्मियों ने कोविड के दौर में बगैर किसी परवाह के दिन रात अपनी सेवाएं दी। उनके इस समर्पण को समझने की कोशिश नहीं की जा रही। ठेका प्रथा से एंबुलेंस कर्मियों को तमाम मुश्किलों से गुजरने पर मजबूर होना पड़ेगा।
वक्ताओं ने कहा कि एंबुलेंस कर्मियों की मांगे जायज हैं, इस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। जान बूझकर उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं किया जा रहा। कर्मियों ने एक स्वर में मांगों के निस्तारण की मांग की। मौके पर स्नेह लता, राकेश, प्रेमनाथ, सीमा, आलोक, सेवाराम आदि मौजूद रहे। (संवाद)
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ठेका प्रथा को समाप्त करने की मांग को लेकर धरने पर डटे एंबुलेंस कर्मियों ने गुरुवार को भी कलेक्ट्रेट पर आवाज मुखर की। शिवप्रकाश त्रिपाठी के नेतृत्व में आवाज बुलंद कर रहे कर्मियों ने कहा कि एंबुलेंस कर्मियों ने कोविड के दौर में बगैर किसी परवाह के दिन रात अपनी सेवाएं दी। उनके इस समर्पण को समझने की कोशिश नहीं की जा रही। ठेका प्रथा से एंबुलेंस कर्मियों को तमाम मुश्किलों से गुजरने पर मजबूर होना पड़ेगा।
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वक्ताओं ने कहा कि एंबुलेंस कर्मियों की मांगे जायज हैं, इस पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। जान बूझकर उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं किया जा रहा। कर्मियों ने एक स्वर में मांगों के निस्तारण की मांग की। मौके पर स्नेह लता, राकेश, प्रेमनाथ, सीमा, आलोक, सेवाराम आदि मौजूद रहे। (संवाद)
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