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Ambedkar Nagar News: दस साल पुराने अपहरण मामले में आरोपी दोषमुक्त
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अंबेडकरनगर। अपहरण के करीब दस साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (त्वरित प्रथम) परविंद कुमार की अदालत ने आरोपी अनिल कुमार को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान अपने पूर्व के बयानों से पलटने और अभियोजन का समर्थन न करने पर पीड़िता व उसके पिता के खिलाफ झूठा साक्ष्य देने के मामले में प्रकीर्ण वाद दर्ज करने का आदेश दिया है।
आलापुर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने 20 मई 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 14 मई को उनकी 19 वर्षीय बेटी को दीपक कुमार शादी का झांसा देकर बाइक से भगा ले गया था। आरोप था कि दीपक को भगाने में उसके मामा अनिल कुमार ने भी सहयोग किया। पुलिस ने विवेचना के बाद अनिल के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादी ने मुख्य परीक्षा में अभियोजन का समर्थन किया, लेकिन जिरह में अपने पूर्व बयान से मुकर गए। उन्होंने कहा कि घटना में अनिल की कोई भूमिका नहीं थी और दीपक का मामा होने के कारण उसे फर्जी तरीके से फंसाया गया। पीड़िता ने भी अदालत में कहा कि उसे दीपक ही अपने साथ ले गया था। अनिल का इसमें कोई सहयोग नहीं था। उसने पूर्व में अनिल का नाम माता-पिता के कहने पर लिखवाने की बात कही।
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अन्य गवाहों ने भी अभियोजन का समर्थन नहीं किया। अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपी के खिलाफ अपहरण का आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। इसी आधार पर उसे दोषमुक्त कर दिया गया।
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आलापुर क्षेत्र के एक व्यक्ति ने 20 मई 2016 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 14 मई को उनकी 19 वर्षीय बेटी को दीपक कुमार शादी का झांसा देकर बाइक से भगा ले गया था। आरोप था कि दीपक को भगाने में उसके मामा अनिल कुमार ने भी सहयोग किया। पुलिस ने विवेचना के बाद अनिल के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था।
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मुकदमे की सुनवाई के दौरान वादी ने मुख्य परीक्षा में अभियोजन का समर्थन किया, लेकिन जिरह में अपने पूर्व बयान से मुकर गए। उन्होंने कहा कि घटना में अनिल की कोई भूमिका नहीं थी और दीपक का मामा होने के कारण उसे फर्जी तरीके से फंसाया गया। पीड़िता ने भी अदालत में कहा कि उसे दीपक ही अपने साथ ले गया था। अनिल का इसमें कोई सहयोग नहीं था। उसने पूर्व में अनिल का नाम माता-पिता के कहने पर लिखवाने की बात कही।
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अन्य गवाहों ने भी अभियोजन का समर्थन नहीं किया। अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपी के खिलाफ अपहरण का आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। इसी आधार पर उसे दोषमुक्त कर दिया गया।