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पटरी व बोगी के बीच टिकी जांच
AmbedkarNagar
Updated Wed, 30 Apr 2014 05:30 AM IST
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लखनऊ /अंबेडकरनगर। दून एक्सप्रेस हादसे के पीछे कपलिंग खुलने के रेलवे के दावे पर मंगलवार सुबह घटनास्थल का निरीक्षण करने पहुंचे उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक वीके गुप्ता ने ही संदेह जता दिया। इस दुर्घटना के पीछे पटरी में गड़बड़ी की बात सामने आ रही है जबकि बोगी एस-सात में तकनीकी खराबी आने से भी इंकार नहीं किया जा रहा है। इसे देखते हुए रेलवे ने अपनी जांच पटरी की खराबी और बोगी की तकनीकी गड़बड़ी की ओर केंद्रित कर दी है। रेल संरक्षा आयुक्त घटना की जांच करेंगे जबकि उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के मंडल अभियंता (5) और मंडल यांत्रिक अभियंता घटना के कारणों की पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट देंगे।
सोमवार को दुर्घटना के बाद रेलवे दून एक्सप्रेस की बोगी की कपलिंग खुलने को हादसे का कारण बता रहा था। हालांकि ट्रेन की एसी तृतीय बोगी बी-2 और उसके पीछे की शयनयान बोगी एस-सात की कपलिंग इतनी अधिक मजबूत थी कि उनको अलग ही नहीं किया जा सका। कपलिंग खुलने के बाद पीछे छूट गई बोगियों की गति कम हो जाती और इंजन वाला हिस्सा आगे निकल जाता है। ऐसे में यदि इंजन का ड्राइवर इमरजेंसी ब्रेक भी लगाता तो पीछे आ रही बोगियों की टक्कर के बाद वह एक दूसरे पर चढ़ जाती। यहां ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। एस -7 के आगे की तीन बोगियों के यात्रियों को अचानक ही जबरदस्त झटके लगे और कुछ सेकेंड में उनके पीछे की बोगियां पटरी से उतर गईं। यहीं कारण है कि पटरी में बैलास्ट कम होने पर उनके फैलाव होने की आशंका जतायी जा रही है। हालांकि रेलवे ने दून एक्सप्रेस की बोगी एस-सात या एस-आठ से व्हील ट्रॉली का कोई हिस्सा टूटकर गिरने से भी हादसा होने की संभावना जता रहा है। इसकी जांच के लिए मंगलवार को हावड़ा रेल मंडल से यांत्रिक से जुड़े अधिकारी घटनास्थल पहुंच गए हैं। पिछले साल मई में जौनपुर के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई दून एक्सप्रेस के मामले में भी रेलवे ने बोगियों में तकनीकी गड़बड़ी की आशंका जतायी थी लेकिन मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त की जांच में पटरियों के बीच फैलाव होने से दुर्घटना होने की रिपोर्ट सामने आयी थी।
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सोमवार को दुर्घटना के बाद रेलवे दून एक्सप्रेस की बोगी की कपलिंग खुलने को हादसे का कारण बता रहा था। हालांकि ट्रेन की एसी तृतीय बोगी बी-2 और उसके पीछे की शयनयान बोगी एस-सात की कपलिंग इतनी अधिक मजबूत थी कि उनको अलग ही नहीं किया जा सका। कपलिंग खुलने के बाद पीछे छूट गई बोगियों की गति कम हो जाती और इंजन वाला हिस्सा आगे निकल जाता है। ऐसे में यदि इंजन का ड्राइवर इमरजेंसी ब्रेक भी लगाता तो पीछे आ रही बोगियों की टक्कर के बाद वह एक दूसरे पर चढ़ जाती। यहां ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। एस -7 के आगे की तीन बोगियों के यात्रियों को अचानक ही जबरदस्त झटके लगे और कुछ सेकेंड में उनके पीछे की बोगियां पटरी से उतर गईं। यहीं कारण है कि पटरी में बैलास्ट कम होने पर उनके फैलाव होने की आशंका जतायी जा रही है। हालांकि रेलवे ने दून एक्सप्रेस की बोगी एस-सात या एस-आठ से व्हील ट्रॉली का कोई हिस्सा टूटकर गिरने से भी हादसा होने की संभावना जता रहा है। इसकी जांच के लिए मंगलवार को हावड़ा रेल मंडल से यांत्रिक से जुड़े अधिकारी घटनास्थल पहुंच गए हैं। पिछले साल मई में जौनपुर के पास दुर्घटनाग्रस्त हुई दून एक्सप्रेस के मामले में भी रेलवे ने बोगियों में तकनीकी गड़बड़ी की आशंका जतायी थी लेकिन मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त की जांच में पटरियों के बीच फैलाव होने से दुर्घटना होने की रिपोर्ट सामने आयी थी।
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