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समय के साथ बढ़ रहीं गन्ना किसानों की मुसीबतें
AmbedkarNagar
Updated Mon, 25 Nov 2013 05:41 AM IST
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अंबेडकरनगर। जिले की एकमात्र चीनी मिल में पेराई सत्र की शुरुआत को लेकर कोई संकेत तक न मिलना गन्ना किसानों पर भारी पड़ रहा है।
बीते वर्ष 29 नवंबर से मिल में पेराई सत्र की शुरुआत हुई थी, लेकिन इस वर्ष अब तक गन्ना खरीद केंद्रों का निर्धारण तक सामने नहीं आ सका है। ऐसे में जो किसान गेहूं की बोआई के लिए अपना गन्ना क्रेशरों तक ले जा रहे हैं, उन्हें आर्थिक चपत लग रही है। वहीं ऐसे किसान जो चीनी मिल शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, उनके गेहूं की बोआई पिछड़ने के आसार बन गए हैं। विगत वर्ष गन्ना बिक्री में आई विभिन्न प्रकार की होने वाली समस्याओं एवं भुगतान में होने वाली परेशानियों के चलते इस बार वैसे भी गन्ना बोआई को लेकर किसानों का आकर्षण विगत वर्ष की अपेक्षा कुछ कम रहा। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विगत वर्ष जहां लगभग 27 हजार किसानों ने 21 हेक्टेअर क्षेत्रफल में गन्ने की बोआई की थी। वहीं इस वर्ष लगभग 25 हजार किसानों ने 20 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में खेती की है। गन्ना किसानों की समस्या समय बीतने के साथ बढ़ती जा रही है। चीनी मिल प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा गन्ना किसानों को भुगतना पड़ रहा है। बीते वर्ष गन्ना बिक्री के लिए किसानों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों से जूझना पड़ा था। कभी उन्हें घटतौली का शिकार होना पड़ा था, तो कभी पर्ची के लिए उन्हें भटकने के लिए मजबूर होना पड़ा। भुगतान में भी उन्हें विभिन्न प्रकार की समस्याओं से दो-चार होना पड़ा। चीनी मिल प्रशासन के अनुसार गत वर्ष 28 मार्च तक की बिक्री करने वाले किसानों का भुगतान हो चुका है, जबकि लगभग ढाई हजार किसानों का लगभग तीन करोड़ रुपये का भुगतान अभी तक नहीं हो सका है। जिले में एकमात्र अकबरपुर चीनी मिल में विगत वर्ष 29 नवंबर से पेराई का कार्य प्रारंभ होकर 14 अप्रैल को समाप्त हुआ था। इससे किसानों का खेत समय से खाली हो गया था, जिससे उन्हें गेहूं की बोआई करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई थी। इस वर्ष अब तक चीनी मिल में पेराई का कोई संकेत नहीं मिल सका है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक बिक्री के लिए गन्ना क्रय केंद्रों की स्थापना नहीं की जा सकी है। नतीजतन किसानों की चिंता बढ़ गई है। इस वर्ष लगभग 25 हजार किसानों ने 20 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में गन्ने की बोआई की है। जिसमें 11 हजार हेक्टेअर पेड़ी गन्ना व नौ हजार हेक्टेअर पौधा लगाया गया है। किसानों का कहना है कि यदि समय से पेराई का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ, तो खेत खाली न होने से गेहूं की बोआई का कार्य पिछड़ जाएगा।
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बीते वर्ष 29 नवंबर से मिल में पेराई सत्र की शुरुआत हुई थी, लेकिन इस वर्ष अब तक गन्ना खरीद केंद्रों का निर्धारण तक सामने नहीं आ सका है। ऐसे में जो किसान गेहूं की बोआई के लिए अपना गन्ना क्रेशरों तक ले जा रहे हैं, उन्हें आर्थिक चपत लग रही है। वहीं ऐसे किसान जो चीनी मिल शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, उनके गेहूं की बोआई पिछड़ने के आसार बन गए हैं। विगत वर्ष गन्ना बिक्री में आई विभिन्न प्रकार की होने वाली समस्याओं एवं भुगतान में होने वाली परेशानियों के चलते इस बार वैसे भी गन्ना बोआई को लेकर किसानों का आकर्षण विगत वर्ष की अपेक्षा कुछ कम रहा। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विगत वर्ष जहां लगभग 27 हजार किसानों ने 21 हेक्टेअर क्षेत्रफल में गन्ने की बोआई की थी। वहीं इस वर्ष लगभग 25 हजार किसानों ने 20 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में खेती की है। गन्ना किसानों की समस्या समय बीतने के साथ बढ़ती जा रही है। चीनी मिल प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा गन्ना किसानों को भुगतना पड़ रहा है। बीते वर्ष गन्ना बिक्री के लिए किसानों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों से जूझना पड़ा था। कभी उन्हें घटतौली का शिकार होना पड़ा था, तो कभी पर्ची के लिए उन्हें भटकने के लिए मजबूर होना पड़ा। भुगतान में भी उन्हें विभिन्न प्रकार की समस्याओं से दो-चार होना पड़ा। चीनी मिल प्रशासन के अनुसार गत वर्ष 28 मार्च तक की बिक्री करने वाले किसानों का भुगतान हो चुका है, जबकि लगभग ढाई हजार किसानों का लगभग तीन करोड़ रुपये का भुगतान अभी तक नहीं हो सका है। जिले में एकमात्र अकबरपुर चीनी मिल में विगत वर्ष 29 नवंबर से पेराई का कार्य प्रारंभ होकर 14 अप्रैल को समाप्त हुआ था। इससे किसानों का खेत समय से खाली हो गया था, जिससे उन्हें गेहूं की बोआई करने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई थी। इस वर्ष अब तक चीनी मिल में पेराई का कोई संकेत नहीं मिल सका है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक बिक्री के लिए गन्ना क्रय केंद्रों की स्थापना नहीं की जा सकी है। नतीजतन किसानों की चिंता बढ़ गई है। इस वर्ष लगभग 25 हजार किसानों ने 20 हजार हेक्टेअर क्षेत्रफल में गन्ने की बोआई की है। जिसमें 11 हजार हेक्टेअर पेड़ी गन्ना व नौ हजार हेक्टेअर पौधा लगाया गया है। किसानों का कहना है कि यदि समय से पेराई का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ, तो खेत खाली न होने से गेहूं की बोआई का कार्य पिछड़ जाएगा।