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बिना पानी सूख रही 600 बीघा फसल
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Mon, 19 Sep 2016 12:49 AM IST
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छह माइनरों से जुड़े लगभग 250 किसानों को सिंचाई का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बदतर विद्युत आपूर्ति व नहर विभाग की उदासीनता भी किसानों पर भारी पड़ रही है। इन माइनरों की हालत यह है कि साफ सफाई के अभाव में इनका अस्तित्व ही समाप्त होता जा रहा है।
अकबरपुर तहसील क्षेत्र के शुकलहिया बनगांव माइनर, बनगांव रम्मनपुर माइनर, डड़वा मरथुआ सरैया माइनर व यरकी बट्टूगढ़ समेत कुल छह माइनरों में साफ सफाई के अभाव के चलते टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे 600 बीघा से अधिक फसल की सिंचाई प्रभावित हो रही है। विभागीय उदासीनता से किसानों में आक्रोश है।
जिले में बड़ी संख्या में फसलों की सिंचाई नहरों व माइनरों के माध्यम से होती है। नहरों के आसपास के किसानों को सिंचाई का लाभ मिल जाता है, लेकिन माइनरों की सफाई न होने से टेल की तरफ स्थित किसानों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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इससे बड़ी संख्या में किसानों को माइनर होने के बावजूद वैकल्पिक साधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है। कई माइनरों का तो अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया हैं। किसानों की तमाम शिकायतों के बाद भी नहर विभाग व प्रशासन इनकी दुर्दशा दूर करने को लेकर गंभीर नहीं है। किसानों धान की फसल की सिंचाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर हो गए हैं।
माइनरों की दुर्दशा का आलम देखना है तो शुकलहिया बनगांव माइनर को देखें। यह माइनर डिहवा बनगांव होते हुए मरथुआ सरैया की सीमा तक जाती है। इससे करीब 100 किसानों की 250 बीघा फसल की सिंचाई होती है। हालत यह है कि लगभग तीन किलोमीटर लंबी इस माइनर में महज एक किलोमीटर की दूरी तक ही पानी जा पा रहा है।
बनगांव के किसान अनिल सिंह व दिनेश सिंह का कहना है कि कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी माइनर से बनगांव के पास से दूसरी माइनर रम्मनपुर गांव को जाती है। इस माइनर में भी लंबे अर्से से पानी नहीं जा पा रहा है। डड़वा मरथुआ सरैया माइनर से भी लगभग आधा दर्जन गांव के किसान जुड़े हैं।
एक-दो गांव के किसानों को सिंचाई का लाभ मिल पा रहा हैै। पंडितपूरा गांव के ओमप्रकाश तिवारी व सोनू तिवारी ने बताया कि कई बार माइनर साफ कराने की मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में 150 बीघा फसल प्रभावित हो रही है। यरकी बट्टूगढ़ माइनर, जैनपुर पंडित पूरा गांव से गुजरी माइनर, लालापुर अरजानीपुर माइनर में सिल्ट व घास- फूस जमा हो गई है। इससे करीब 200 बीघा फसल की सिंचाई प्रभावित है।
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अकबरपुर तहसील क्षेत्र के शुकलहिया बनगांव माइनर, बनगांव रम्मनपुर माइनर, डड़वा मरथुआ सरैया माइनर व यरकी बट्टूगढ़ समेत कुल छह माइनरों में साफ सफाई के अभाव के चलते टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इससे 600 बीघा से अधिक फसल की सिंचाई प्रभावित हो रही है। विभागीय उदासीनता से किसानों में आक्रोश है।
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जिले में बड़ी संख्या में फसलों की सिंचाई नहरों व माइनरों के माध्यम से होती है। नहरों के आसपास के किसानों को सिंचाई का लाभ मिल जाता है, लेकिन माइनरों की सफाई न होने से टेल की तरफ स्थित किसानों को इसकी सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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इससे बड़ी संख्या में किसानों को माइनर होने के बावजूद वैकल्पिक साधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है। कई माइनरों का तो अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया हैं। किसानों की तमाम शिकायतों के बाद भी नहर विभाग व प्रशासन इनकी दुर्दशा दूर करने को लेकर गंभीर नहीं है। किसानों धान की फसल की सिंचाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर हो गए हैं।
माइनरों की दुर्दशा का आलम देखना है तो शुकलहिया बनगांव माइनर को देखें। यह माइनर डिहवा बनगांव होते हुए मरथुआ सरैया की सीमा तक जाती है। इससे करीब 100 किसानों की 250 बीघा फसल की सिंचाई होती है। हालत यह है कि लगभग तीन किलोमीटर लंबी इस माइनर में महज एक किलोमीटर की दूरी तक ही पानी जा पा रहा है।
बनगांव के किसान अनिल सिंह व दिनेश सिंह का कहना है कि कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसी माइनर से बनगांव के पास से दूसरी माइनर रम्मनपुर गांव को जाती है। इस माइनर में भी लंबे अर्से से पानी नहीं जा पा रहा है। डड़वा मरथुआ सरैया माइनर से भी लगभग आधा दर्जन गांव के किसान जुड़े हैं।
एक-दो गांव के किसानों को सिंचाई का लाभ मिल पा रहा हैै। पंडितपूरा गांव के ओमप्रकाश तिवारी व सोनू तिवारी ने बताया कि कई बार माइनर साफ कराने की मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में 150 बीघा फसल प्रभावित हो रही है। यरकी बट्टूगढ़ माइनर, जैनपुर पंडित पूरा गांव से गुजरी माइनर, लालापुर अरजानीपुर माइनर में सिल्ट व घास- फूस जमा हो गई है। इससे करीब 200 बीघा फसल की सिंचाई प्रभावित है।