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4970 रसोइयों को दो माह से मानदेय का इंतजार
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अंबेडकरनगर। जिले के 2049 स्कूलों में मिड-डे मील बनाने वाले 4970 रसोइया मजदूरों को अब तक अप्रैल का मानदेय नहीं मिल पाया है। दो माह से अधिक बीत गये, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हो सका। इसके चलते रसोइया मजदूरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रसोइया मजदूरों ने अविलंब मानदेय का भुगतान कराने की मांग की है। कहा कि लगातार उनके भुगतान में हीलाहवाली की जा रही है।
महज 1500 रुपये के मानदेय पर विद्यालयों में बच्चों को भोजन परोसने वाले रसोइया मजदूरों को दो माह से मानदेय भुगतान का इंतजार है। विभाग की ओर से उन्हें मई व जून का मानदेय नहीं दिया जाता, लेकिन अप्रैल का भी भुगतान अब तक नहीं किया जा सका। इससे रसोइया मजदूरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने पिछले दिनों उनके मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी भी की है। ऐसे में इस बार उन्हें दो हजार रुपये मिलने की आस है, लेकिन विभाग के पास धनाभाव का संकट है। इसके चलते विभाग उनका बकाया मानदेय भुगतान नहीं कर पा रहा है। अकबरपुर की रसोइया सुशीला, राजकली व रामअजोर आदि का कहना है कि उन्हें अप्रैल के दो हजार रुपये मिलने थे, परंतु अब तक भुगतान नहीं किया जा सका।
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जुलाई चल रहा है। ऐसे में उनके पास भी कई खर्चे हैं। बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ खेती के कई खर्च आ चुके हैं। ऐसे में उन्हें पैसों की जरूरत है। परंतु विभाग भुगतान नहीं कर रहा है। उधर, एमडीएम प्रभारी सत्यप्रकाश मौर्य ने बताया कि मांग शासन को भेजी गई है। धन अवमुक्त होते ही प्राथमिकता के आधार पर भुगतान किया जाएगा।
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महज 1500 रुपये के मानदेय पर विद्यालयों में बच्चों को भोजन परोसने वाले रसोइया मजदूरों को दो माह से मानदेय भुगतान का इंतजार है। विभाग की ओर से उन्हें मई व जून का मानदेय नहीं दिया जाता, लेकिन अप्रैल का भी भुगतान अब तक नहीं किया जा सका। इससे रसोइया मजदूरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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सरकार ने पिछले दिनों उनके मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी भी की है। ऐसे में इस बार उन्हें दो हजार रुपये मिलने की आस है, लेकिन विभाग के पास धनाभाव का संकट है। इसके चलते विभाग उनका बकाया मानदेय भुगतान नहीं कर पा रहा है। अकबरपुर की रसोइया सुशीला, राजकली व रामअजोर आदि का कहना है कि उन्हें अप्रैल के दो हजार रुपये मिलने थे, परंतु अब तक भुगतान नहीं किया जा सका।
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जुलाई चल रहा है। ऐसे में उनके पास भी कई खर्चे हैं। बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ खेती के कई खर्च आ चुके हैं। ऐसे में उन्हें पैसों की जरूरत है। परंतु विभाग भुगतान नहीं कर रहा है। उधर, एमडीएम प्रभारी सत्यप्रकाश मौर्य ने बताया कि मांग शासन को भेजी गई है। धन अवमुक्त होते ही प्राथमिकता के आधार पर भुगतान किया जाएगा।