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धड़ल्ले से यहां भी चल रहा अवैध कच्ची शराब का धंधा
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राजेसुल्तानपुर। आलापुर तहसील क्षेत्र में आबकारी विभाग की नाकामी व पुलिसिया गठजोड़ के चलते गांव-गांव मौत का जाम छलक रहा है। आबादी के बीच कई गांवों में अवैध कच्ची शराब बनने के साथ ही बिक भी रही है। प्रतिदिन इसका सेवन कर लोग उत्पात भी करते हैं। ऐसा नहीं है कि पुलिस को इसकी जानकारी नहीं है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है।
ऐसे में जरूरत है कि तहसील क्षेत्र में अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए। नहीं तो यहां भी बाराबंकी जैसी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
बाराबंकी में हुई घटना के बाद भी जिले में प्रशासन की नींद अभी नहीं टूटी है। आलापुर तहसील क्षेत्र के बिशनपुर बजदहां, आदमपुर, हिछना, किन्नूपुर, बंगालपुर, कम्हरिया, केवटाही, साबितपुर, मदैनिया, ढोलीपुर, नई बस्ती, मुड़ियारी, माझा कम्हरिया, आराजी देवारा, सिद्धनाथ की कुटी, देवरिया भवनाथपुर, इसौरी नसीरपुर, रामनगर महुवर सहित ऐसे दर्जनों गांव हैं, जहां कच्ची शराब की भट्ठियां धधकती रहती हैं। इन क्षेत्रों में शाम होने के साथ ही कच्ची शराब का धंधा शुरू हो जाता है।
पीने पिलाने से लेकर खरीद फरोख्त व सरयू नदी के माझा क्षेत्र में उसे बनाने का खेल पूरी रात चलता है। ऐसा नहीं कि पुलिस व आबकारी विभाग को इसकी भनक नहीं। बल्कि स्थानीय लोगों का आरोप है कि आपसी साठगांठ होती है। इसके चलते ही पुलिस या आबकारी महकमा इनके विरोध कठोर कार्रवाई नहीं करता। कुछ स्थानों पर छापेमारी आदि करके अपनी जिम्मेदारियों का कोरम पूरा कर दिया जाता है।
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ऐसे में जरूरत है कि तहसील क्षेत्र में अभियान चलाकर कार्रवाई की जाए। नहीं तो यहां भी बाराबंकी जैसी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
बाराबंकी में हुई घटना के बाद भी जिले में प्रशासन की नींद अभी नहीं टूटी है। आलापुर तहसील क्षेत्र के बिशनपुर बजदहां, आदमपुर, हिछना, किन्नूपुर, बंगालपुर, कम्हरिया, केवटाही, साबितपुर, मदैनिया, ढोलीपुर, नई बस्ती, मुड़ियारी, माझा कम्हरिया, आराजी देवारा, सिद्धनाथ की कुटी, देवरिया भवनाथपुर, इसौरी नसीरपुर, रामनगर महुवर सहित ऐसे दर्जनों गांव हैं, जहां कच्ची शराब की भट्ठियां धधकती रहती हैं। इन क्षेत्रों में शाम होने के साथ ही कच्ची शराब का धंधा शुरू हो जाता है।
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पीने पिलाने से लेकर खरीद फरोख्त व सरयू नदी के माझा क्षेत्र में उसे बनाने का खेल पूरी रात चलता है। ऐसा नहीं कि पुलिस व आबकारी विभाग को इसकी भनक नहीं। बल्कि स्थानीय लोगों का आरोप है कि आपसी साठगांठ होती है। इसके चलते ही पुलिस या आबकारी महकमा इनके विरोध कठोर कार्रवाई नहीं करता। कुछ स्थानों पर छापेमारी आदि करके अपनी जिम्मेदारियों का कोरम पूरा कर दिया जाता है।
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