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कहीं मां की प्रेरणा से लिखी जा रही सफलता, तो कहीं ममतामयी सेल्फी
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अंबेडकरनगर। कहीं मां की ममता की छांव में बेटी सफलता की गाथा लिख रही, तो कहीं बेटियां मां के साथ ममतामयी सेल्फी ले रहीं। दोनों ही स्थितियां मां के लिए अत्यंत सुखद एहसास वाली हैं। मदर्स डे की पूर्व संध्या पर अमर उजाला ने कई जगहों पर पहुंचकर महिलाओं से बात की। मां को लेकर लगभग सभी के मन में सर्वोच्च भाव दिखाई पड़ा। उम्र की सीमाएं इसमें कहीं आड़े नहीं आती दिखीं। युवतियां हों या फिर शादीशुदा महिलाएं, बच्चियां हों या फिर किशोरी। इन सभी के मन में अपनी मां को लेकर अगाध स्नेह व प्यार देखने को मिला।
अकबरपुर नगर निवासिनी शिक्षिका अर्चना अग्रहरि की छह वर्षीय बेटी आराध्या अपने परिवार की लाड़ली है। उसके नाम पर ही अर्चना व उनके पति मृत्युंजय ने एक संस्थान स्थापित कर रखा है। दंपती को जितना लगाव बेटी अराध्या से है, उतना ही लगाव बेटे चैतन्य से भी है। यह बात अलग है कि बेटी अराध्या में भी ममता की वही छाप दिखाई देती है, जो आगे चलकर मां की ममता का रूप ले लेती है। आराध्या परिवार के सदस्यों को देखकर मोबाइल से सेल्फी लेना सीख गई है। वह अक्सर अपनी मां के साथ अलग अलग अंदाज में सेल्फी लेती रहती। शनिवार को उसने मदर्स डे की पूर्व संध्या पर मां के साथ सेल्फी ली, तो वह कुछ खास अंदाज में निखरकर सामने आई। मां अर्चना बेटी की इस अदा पर अभिभूत हो गईं, तो मृत्युंजय भी मां-बेटी के इस स्नेह को देख भावुक हो उठे। अर्चना बोलीं कि हम सबके लिए बेटी व बेटे में कोई भेद नहीं। बेटियों को भी बेटों जैसा स्नेह व प्यार देने की जरूरत है।
मेरी मां मेरा संबल व मनोबल हैं। वर्ष 2013 में अचानक पिता आरबी पाल का देहांत हो गया तो मेरे जीवन में अंधेरा सा छा गया। उनके निधन के बाद मेरी मां राजपत्ती देवी ने मुझे कभी हतोत्साहित नहीं होने दिया। मुझे अपनी मां पर गर्व है। मेरी मां किताबी ज्ञान भले नहीं अर्जित की हैं, लेकिन सामाजिक सूझबूझ व संस्कार के बूते मुझे बेहतर करने में भरपूर योगदान देती हैं। उन्होंने हमें हमेशा इस बात के लिए प्रेरित किया कि सिर्फ घर की दहलीज के अंदर ही अपनी पहचान मत बनाओ। बल्कि सकारात्मक सोच व कार्य के साथ आगे बढ़ों, जिससे तुम्हारी एक अलग पहचान बने। पिता ने समाज सेवा की जो मुहिम शुरु की थी, उसे आगे बढ़ाने में आज मेरी मां का बहुत बड़ा योगदान है। मेरे कार्यों को देख कर मेरी मां जब खुश होती है, तो मुझे उस कार्य को करने के लिए दोगुनी ऊर्जा मिलती है। मदर्स-डे के मौके पर मैं ईश्वर से प्रार्थना करुंगी कि भगवान मेरी मां का आशीर्वाद हमेशा मेरे ऊपर बनाए रखें।
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पुष्पा पाल रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित
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अकबरपुर नगर निवासिनी शिक्षिका अर्चना अग्रहरि की छह वर्षीय बेटी आराध्या अपने परिवार की लाड़ली है। उसके नाम पर ही अर्चना व उनके पति मृत्युंजय ने एक संस्थान स्थापित कर रखा है। दंपती को जितना लगाव बेटी अराध्या से है, उतना ही लगाव बेटे चैतन्य से भी है। यह बात अलग है कि बेटी अराध्या में भी ममता की वही छाप दिखाई देती है, जो आगे चलकर मां की ममता का रूप ले लेती है। आराध्या परिवार के सदस्यों को देखकर मोबाइल से सेल्फी लेना सीख गई है। वह अक्सर अपनी मां के साथ अलग अलग अंदाज में सेल्फी लेती रहती। शनिवार को उसने मदर्स डे की पूर्व संध्या पर मां के साथ सेल्फी ली, तो वह कुछ खास अंदाज में निखरकर सामने आई। मां अर्चना बेटी की इस अदा पर अभिभूत हो गईं, तो मृत्युंजय भी मां-बेटी के इस स्नेह को देख भावुक हो उठे। अर्चना बोलीं कि हम सबके लिए बेटी व बेटे में कोई भेद नहीं। बेटियों को भी बेटों जैसा स्नेह व प्यार देने की जरूरत है।
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मेरी मां मेरा संबल व मनोबल हैं। वर्ष 2013 में अचानक पिता आरबी पाल का देहांत हो गया तो मेरे जीवन में अंधेरा सा छा गया। उनके निधन के बाद मेरी मां राजपत्ती देवी ने मुझे कभी हतोत्साहित नहीं होने दिया। मुझे अपनी मां पर गर्व है। मेरी मां किताबी ज्ञान भले नहीं अर्जित की हैं, लेकिन सामाजिक सूझबूझ व संस्कार के बूते मुझे बेहतर करने में भरपूर योगदान देती हैं। उन्होंने हमें हमेशा इस बात के लिए प्रेरित किया कि सिर्फ घर की दहलीज के अंदर ही अपनी पहचान मत बनाओ। बल्कि सकारात्मक सोच व कार्य के साथ आगे बढ़ों, जिससे तुम्हारी एक अलग पहचान बने। पिता ने समाज सेवा की जो मुहिम शुरु की थी, उसे आगे बढ़ाने में आज मेरी मां का बहुत बड़ा योगदान है। मेरे कार्यों को देख कर मेरी मां जब खुश होती है, तो मुझे उस कार्य को करने के लिए दोगुनी ऊर्जा मिलती है। मदर्स-डे के मौके पर मैं ईश्वर से प्रार्थना करुंगी कि भगवान मेरी मां का आशीर्वाद हमेशा मेरे ऊपर बनाए रखें।
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पुष्पा पाल रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित