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मई में रामअचल को आना था, आई मौत की खबर
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अंबेडकरनगर। अपनी ही राइफल की गोली लगने से जिस सीआरपीएफ जवान की मौत हुई है, वह एक माह बाद ही घर आने वाला था। हालांकि उसके आने से पहले मौत की मनहूस खबर यहां पहुंच गई। इसके बाद से ही पूरे परिवार में कोहराम सा मचा है। सीआरपीएफ जवान रामअचल की मौत ने उसके परिवार को ऐसा सदमा दिया है, जिसे सुनकर हर कोई द्रवित हो जा रहा।
दरअसल बीते दिनों ही रामअचल के पिता भोरई का भी निधन हुआ था। अब बेटे रामअचल की मौत ने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया है। परिवारीजनों ने बताया कि वह बीते 14 नवंबर को मखदूमपुर आया था। लगभग एक माह तक यहां रहने के बाद वह 19 दिसंबर को यहां से वापस गया था। मई में वह यहां फिर से आनेे वाला था। परिवार के लोग एक एक दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन इस बीच 15 अप्रैल को उसके निधन की मनहूस खबर आ गई। परिवार के लोगों के अनुसार उसने मौत से एक दिन पहले अपनी पत्नी से सामान्य बातचीत की थी। वह अक्सर फोन करता रहता था।
सीआरपीएफ बटालियन की तरफ से दो दिन पहले रामअचल के मौत की खबर पहुंचते ही परिवार में कोहराम सा मच गया। इसके बाद से ही गांव में लोगों के आनेजाने का तांता लगा हुआ था। बुधवार को शव पहुंचा, तो बड़ी तादाद में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। सैनिक के सम्मान में शहीद रामअचल अमर रहे के खूब नारे लगे। तिरंगे झंडे लेकर लोग घर से लेकर अकबरपुर नगर तक पहुंचे। युवाओं की टोली ने उस वाहन की अगुवानी की, जिसमें जवान का शव रखा हुआ था।
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दरअसल बीते दिनों ही रामअचल के पिता भोरई का भी निधन हुआ था। अब बेटे रामअचल की मौत ने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया है। परिवारीजनों ने बताया कि वह बीते 14 नवंबर को मखदूमपुर आया था। लगभग एक माह तक यहां रहने के बाद वह 19 दिसंबर को यहां से वापस गया था। मई में वह यहां फिर से आनेे वाला था। परिवार के लोग एक एक दिन का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, लेकिन इस बीच 15 अप्रैल को उसके निधन की मनहूस खबर आ गई। परिवार के लोगों के अनुसार उसने मौत से एक दिन पहले अपनी पत्नी से सामान्य बातचीत की थी। वह अक्सर फोन करता रहता था।
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सीआरपीएफ बटालियन की तरफ से दो दिन पहले रामअचल के मौत की खबर पहुंचते ही परिवार में कोहराम सा मच गया। इसके बाद से ही गांव में लोगों के आनेजाने का तांता लगा हुआ था। बुधवार को शव पहुंचा, तो बड़ी तादाद में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। सैनिक के सम्मान में शहीद रामअचल अमर रहे के खूब नारे लगे। तिरंगे झंडे लेकर लोग घर से लेकर अकबरपुर नगर तक पहुंचे। युवाओं की टोली ने उस वाहन की अगुवानी की, जिसमें जवान का शव रखा हुआ था।
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