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प्राथमिक विद्यालय को कान्वेंट जैसी सुविधा दिला रहे गुरुजी
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जलालपुर (अंबेडकरनगर)। सकारात्मक सोच हो और कुछ अलग करने का जज्बा तो संसाधनों का अभाव लक्ष्य में व्यवधान नहीं बनता। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है मुरवाह प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक रतन सिंह ने। एक तरफ जहां परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा की गुणवत्ता व संसाधनों का अभाव सवालों के घेरे में है, वहीं इस शिक्षक ने अपने तैनाती वाले विद्यालय को एक नया लुक दे दिया है। शिक्षा की गुणवत्ता से लेकर विद्यालय का रंगरोगन देखकर इसे किसी कॉन्वेंट स्कूल से कम नहीं आंका जा सकता।
प्रभारी प्रधानाध्यापक रतन सिंह के अंदर जुनून है कि वह परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को भी कॉन्वेंट जैसी सुविधाओं के बीच शिक्षा देंगे। इसके लिए चाहें उन्हें खुद के पास से धन खर्च करना पड़े। उनका यह प्रयास प्राथमिक विद्यालय मुरवाह में रंग भी दिखा रहा है। शिक्षा व्यवस्था के पुराने ढांचे में उन्होंने सकारात्मक परिवर्तन कर आधुनिक युग की शिक्षा व्यवस्था को विद्यालय में संचालित करने की ठान ली है।
अपने निजी खर्चें से विद्यालय में एक एक संसाधनों को वह जुटा रहे हैं। विद्यालय के बच्चों के लिए उन्होंने स्मार्ट क्लासरूम तैयार कर लिया है। कम्प्यूटर व एलईडी के माध्यम से वह बच्चों को कई बुनियादी शिक्षा दे रहे हैं। उनका मानना है कि ब्लैक बोर्ड पर समझाने की अपेक्षा बच्चे जब एलईडी पर वीडियो के माध्यम से देखते हैं, तो वह तेजी से समझ पाते हैं। बच्चों को पढ़ाई करने में आनंद महसूस करते हैं।
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यही नहीं वह विद्यालय के बच्चों को स्वच्छता का भी पाठ पूरी ईमानदारी से पढ़ा रहे हैं। विद्यालय परिसर की साफ-सफाई के साथ ही अपने पैसे से दो कूड़ेदान भी रखवाया, जिससे बच्चे कूड़े को इधर-उधर न फेंके। यही नहीं विद्यालय का रंगरोगन देखकर लोग इसे कॉन्वेंट स्कूल का एहसास करते हैं। विद्यालय में कुल 110 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।
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प्रभारी प्रधानाध्यापक रतन सिंह के अंदर जुनून है कि वह परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को भी कॉन्वेंट जैसी सुविधाओं के बीच शिक्षा देंगे। इसके लिए चाहें उन्हें खुद के पास से धन खर्च करना पड़े। उनका यह प्रयास प्राथमिक विद्यालय मुरवाह में रंग भी दिखा रहा है। शिक्षा व्यवस्था के पुराने ढांचे में उन्होंने सकारात्मक परिवर्तन कर आधुनिक युग की शिक्षा व्यवस्था को विद्यालय में संचालित करने की ठान ली है।
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अपने निजी खर्चें से विद्यालय में एक एक संसाधनों को वह जुटा रहे हैं। विद्यालय के बच्चों के लिए उन्होंने स्मार्ट क्लासरूम तैयार कर लिया है। कम्प्यूटर व एलईडी के माध्यम से वह बच्चों को कई बुनियादी शिक्षा दे रहे हैं। उनका मानना है कि ब्लैक बोर्ड पर समझाने की अपेक्षा बच्चे जब एलईडी पर वीडियो के माध्यम से देखते हैं, तो वह तेजी से समझ पाते हैं। बच्चों को पढ़ाई करने में आनंद महसूस करते हैं।
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यही नहीं वह विद्यालय के बच्चों को स्वच्छता का भी पाठ पूरी ईमानदारी से पढ़ा रहे हैं। विद्यालय परिसर की साफ-सफाई के साथ ही अपने पैसे से दो कूड़ेदान भी रखवाया, जिससे बच्चे कूड़े को इधर-उधर न फेंके। यही नहीं विद्यालय का रंगरोगन देखकर लोग इसे कॉन्वेंट स्कूल का एहसास करते हैं। विद्यालय में कुल 110 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।