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प्रतिकूल परिस्थिति से निपटने को जरूर लें आत्मरक्षा का प्रारंभिक प्रशिक्षण
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अंबेडकरनगर। युवतियां भयमुक्त होकर अपनी सफलता तय करने के लिए आगे बढ़ें। किसी प्रतिकूल परिस्थिति से निपटने के लिए उन्हें आत्मरक्षा का प्रारंभिक प्रशिक्षण जरूर लेना चाहिए। यह आह्वान प्रसिद्ध ताइक्वांडो प्रशिक्षक मंगेश ने बालिकाओं से किया। वे मंगलवार को अमर उजाला की अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत रामलौट श्यामादेवी इंटर कॉलेज दहीरपुर में आयोजित आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे सफलता के पायदान पर आगे तभी बढ़ सकती हैं, जब उनमें किसी भी प्रकार का भय नहीं होगा। खुद को हालात के अनुरूप ढालने के लिए छात्राओं को सदैव तैयार रहना चाहिए। मतलब यह कि परिस्थिति प्रतिकूल हो, तो हार मानने की बजाए डटकर मुकाबला करना चाहिए।
प्रतिकूल परिस्थिति का मतलब सिर्फ शारीरिक उत्पीड़न से ही नहीं। मानसिक, आर्थिक या सामाजिक स्तर पर भी कोई प्रतिकूल परिस्थिति आ जाए, तो घबराने की बजाए धैर्य का परिचय देना चाहिए। ऐसा करने पर ही इन परिस्थितियों से उबरने का रास्ता निकलता है।
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प्रशिक्षक ने अमर उजाला के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन जरूर करना चाहिए। इसमें जो आत्म संतुष्टि इससे जुड़े लोगों को मिलती है, उसका कोई मोल नहीं है। छात्राओं से कहा कि उन्हें आत्मरक्षा का प्रारंभिक प्रशिक्षण जरूर समय-समय पर लेते रहना चाहिए। प्रशिक्षक मन्नू चौहान ने कहा कि प्रगति के मामले में युवतियां अब काफी आगे निकल रही हैं। यह एक अच्छा संकेत है। इसमें अभिभावकों व नजदीकी लोगों को पूरी मदद करनी चाहिए।
मील का पत्थर साबित होगा यह अभियान
प्रबंधक राजेंद्र वर्मा ने कहा कि अमर उजाला का यह प्रयास निश्चित तौर पर मील का पत्थर साबित होगा। पिछले काफी दिनों से लगातार जिले में यह मुहिम चलाई जा रही है। अब इसकी अच्छी खासी चर्चा होने लगी है। युवतियों और महिलाओं को इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए। शिक्षक आवेश चौधरी व संदीप मौर्य ने छात्राओं से आह्वान किया कि वे मजबूत इरादों के साथ अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ें। सामाजिक अभियानों में भी सक्रिय भागीदारी में आह्वान किया। दिलीप कुमार, कलावती, कुसुम व सुनील ने भी छात्राओं को कई टिप्स दिए।
आत्मनिर्भर बनें युवतियां
छात्रा शिवांगी त्रिपाठी, नेहा वर्मा व प्रिया ने कहा कि युवतियों व महिलाओं का उत्थान तभी होगा, जब वे आत्मनिर्भर होंगी। उन्हें अपने अधिकार के बारे में जानकारी होनी चाहिए और समय पड़ने पर उसका प्रयोग करना चाहिए। ऐसा तभी होगा, जब महिलाएं पूर्ण रूप से शिक्षित होंगी।
आत्मरक्षा को लेकर रहें सजग
छात्रा साधना, प्रीति व अनुपम ने कहा कि ताइक्वांडो आत्मरक्षा का एक बेहतर माध्यम है। अपनी सुरक्षा के लिए सभी को यह कला सीखना चाहिए। हम सभी को आत्मरक्षा के सजग रहना होगा। अभिभावकों को चाहिए कि वे युवतियों को ताइक्वांडो जैसी कला सीखने से कतई न रोकें।
अधिकारों का करें पूरा प्रयोग
छात्रा संध्या, सावित्री व प्रीति गुप्ता ने कहा कि ने कहा कि महिला उत्पीड़न व घरेलू हिंसा पर अंकुश न लगने का मुख्य कारण युवतियों व महिलाओं का अपने अधिकार का समुचित प्रयोग न करना है। वे सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर रहती हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी। इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है।
जागरूकता से ही मिलेगी सुरक्षा
छात्रा प्रिंसी वर्मा, प्रिया सोनी व अंशू वर्मा ने कहा कि पुरुष प्रधान समाज में सुरक्षा को लेकर हम सभी को जागरूक होना होगा। ताइक्वांडो, मार्शल आर्ट जैसी कलाओं में हम सभी को निपुण होना होगा। साथ ही अपनी रक्षा के लिए इन कला का समय पर प्रयोग करना सीखना होगा।
दिखानी होगी दृढ़ इच्छाशक्ति
छात्रा अमिता, अर्चिता व शानू प्रजापति ने कहा कि युवतियों व महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए ताइक्वांडो, जूडो कराटे व मार्शल आर्ट जैसी तो सीखनी ही चाहिए। साथ ही उन्हें बालपिन भी सदैव अपने साथ रखनी होगी। समय पर इसका प्रयोग करना भी सीखें। इसके लिए उन्हें अंदर से मजबूत होना होगा।
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उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे सफलता के पायदान पर आगे तभी बढ़ सकती हैं, जब उनमें किसी भी प्रकार का भय नहीं होगा। खुद को हालात के अनुरूप ढालने के लिए छात्राओं को सदैव तैयार रहना चाहिए। मतलब यह कि परिस्थिति प्रतिकूल हो, तो हार मानने की बजाए डटकर मुकाबला करना चाहिए।
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प्रतिकूल परिस्थिति का मतलब सिर्फ शारीरिक उत्पीड़न से ही नहीं। मानसिक, आर्थिक या सामाजिक स्तर पर भी कोई प्रतिकूल परिस्थिति आ जाए, तो घबराने की बजाए धैर्य का परिचय देना चाहिए। ऐसा करने पर ही इन परिस्थितियों से उबरने का रास्ता निकलता है।
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प्रशिक्षक ने अमर उजाला के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन जरूर करना चाहिए। इसमें जो आत्म संतुष्टि इससे जुड़े लोगों को मिलती है, उसका कोई मोल नहीं है। छात्राओं से कहा कि उन्हें आत्मरक्षा का प्रारंभिक प्रशिक्षण जरूर समय-समय पर लेते रहना चाहिए। प्रशिक्षक मन्नू चौहान ने कहा कि प्रगति के मामले में युवतियां अब काफी आगे निकल रही हैं। यह एक अच्छा संकेत है। इसमें अभिभावकों व नजदीकी लोगों को पूरी मदद करनी चाहिए।
मील का पत्थर साबित होगा यह अभियान
प्रबंधक राजेंद्र वर्मा ने कहा कि अमर उजाला का यह प्रयास निश्चित तौर पर मील का पत्थर साबित होगा। पिछले काफी दिनों से लगातार जिले में यह मुहिम चलाई जा रही है। अब इसकी अच्छी खासी चर्चा होने लगी है। युवतियों और महिलाओं को इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए। शिक्षक आवेश चौधरी व संदीप मौर्य ने छात्राओं से आह्वान किया कि वे मजबूत इरादों के साथ अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ें। सामाजिक अभियानों में भी सक्रिय भागीदारी में आह्वान किया। दिलीप कुमार, कलावती, कुसुम व सुनील ने भी छात्राओं को कई टिप्स दिए।
आत्मनिर्भर बनें युवतियां
छात्रा शिवांगी त्रिपाठी, नेहा वर्मा व प्रिया ने कहा कि युवतियों व महिलाओं का उत्थान तभी होगा, जब वे आत्मनिर्भर होंगी। उन्हें अपने अधिकार के बारे में जानकारी होनी चाहिए और समय पड़ने पर उसका प्रयोग करना चाहिए। ऐसा तभी होगा, जब महिलाएं पूर्ण रूप से शिक्षित होंगी।
आत्मरक्षा को लेकर रहें सजग
छात्रा साधना, प्रीति व अनुपम ने कहा कि ताइक्वांडो आत्मरक्षा का एक बेहतर माध्यम है। अपनी सुरक्षा के लिए सभी को यह कला सीखना चाहिए। हम सभी को आत्मरक्षा के सजग रहना होगा। अभिभावकों को चाहिए कि वे युवतियों को ताइक्वांडो जैसी कला सीखने से कतई न रोकें।
अधिकारों का करें पूरा प्रयोग
छात्रा संध्या, सावित्री व प्रीति गुप्ता ने कहा कि ने कहा कि महिला उत्पीड़न व घरेलू हिंसा पर अंकुश न लगने का मुख्य कारण युवतियों व महिलाओं का अपने अधिकार का समुचित प्रयोग न करना है। वे सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर रहती हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी। इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत है।
जागरूकता से ही मिलेगी सुरक्षा
छात्रा प्रिंसी वर्मा, प्रिया सोनी व अंशू वर्मा ने कहा कि पुरुष प्रधान समाज में सुरक्षा को लेकर हम सभी को जागरूक होना होगा। ताइक्वांडो, मार्शल आर्ट जैसी कलाओं में हम सभी को निपुण होना होगा। साथ ही अपनी रक्षा के लिए इन कला का समय पर प्रयोग करना सीखना होगा।
दिखानी होगी दृढ़ इच्छाशक्ति
छात्रा अमिता, अर्चिता व शानू प्रजापति ने कहा कि युवतियों व महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए ताइक्वांडो, जूडो कराटे व मार्शल आर्ट जैसी तो सीखनी ही चाहिए। साथ ही उन्हें बालपिन भी सदैव अपने साथ रखनी होगी। समय पर इसका प्रयोग करना भी सीखें। इसके लिए उन्हें अंदर से मजबूत होना होगा।