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बुनकरी हुनर से जन्मांधता को मात दे रहे नगर के तीन सगे भाई
Updated Tue, 04 Dec 2018 10:47 PM IST
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टांडा। दिव्यांगता कभी हौसलों को नहीं डिगा सकती। यदि सच्चे इरादे व अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का जज्बा हो तो असंभव भी संभव हो जाता है। यह लाइनें टांडा के जन्म से दृष्टिहीन तीन सगे भाइयों पर एकदम सटीक बैठती हैं। दृष्टिहीन तीनों भाई भले ही सरकारी योजनाओं का समुचित लाभ नहीं पा रहे हैं, लेकिन कभी अपनी दिव्यांगता को खुद पर हावी नहीं होने दिया।
बुलंद हौसले के बल पर तीनों भाई कई साल से पावरलूम चलाकर अपने परिवार की जीविका चला रहे हैं। वे मशीन पर सिर्फ कपड़े बुनने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उसमें आई गड़बड़ी को भी वह बगैर किसी मिस्त्री के ही ठीक कर देते हैं।
आपको यह सब जानकर आश्चर्य हो रहा होगा, लेकिन टांडा नगर के मुसहां मोहल्ले के तीनों भाइयों ने यह सब सच कर दिखाया है। नगर के अख्तर हुसैन (55) को जन्म से ही दिखाई नहीं पड़ता। उनके दो भाई मोहम्मद सलीम (38) व अर्से आलम (32) भी जन्म से दृष्टिहीन हैँ। मुसहां मोहल्ला बुनकरी के उद्योग में काफी आगे है।
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पावरलूमों की खटर-पटर के बीच पले बढ़े दृष्टिहीन तीनों भाई अपनी दिव्यांगता को मात देते हुए पावरलूमों पर कपड़े की बुनकरी सीख गए। सिर्फ कपड़ों की बुनाई ही नहीं, बल्कि पावरलूम में आने वाली खराबी को भी वह लोग ठीक करने में माहिर हैं। तीनों भाई एक कारखाने में ही काम करते हैं। तीनों की शादी भी हुई है और बच्चे भी हैं।
तीनों भाइयों की आंखों में रोशनी भले ही नहीं है, लेकिन वह अपने परिवार के लिए किसी प्रकाशपुंज से कम नहीं हैं। तीनों भाइयों ने कभी खुद को दिव्यांग महसूस नहीं होने दिया। तीनों भाई न सिर्फ अपने मोहल्ले व आसपास के क्षेत्रों में घूम टहल लेते हैं, बल्कि दुकानों पर सामानों की खरीदारी व पैसों का लेनदेन भी कर लेते हैं।
दिव्यांगता व आर्थिक तंगी से जूझ रहे इन तीनों भाइयों की सुध न तो कभी प्रशासन ने ली और न ही जनप्रतिनिधियों ने। इनके लिए जन प्रतिनिधियों व अधिकारियों के भाषण व दावे निरर्थक ही साबित हो रहे हैं। इस परिवार को सरकारी सुविधा के नाम पर सिर्फ गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाला राशनकार्ड उपलब्ध है।
सरकार भले ही दिव्यांगों व गरीबों के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। दिव्यांग अख्तर हुसैन की मानें तो कई बार पक्की छत की मांग की गई, लेकिन आवास नहीं मिल सका। सूची में नाम भी भिजवाया गया, लेकिन कुछ लोगों द्वारा अवैध धन की मांग की गई। धन न उपलब्ध करा पाने के चलते उसका भी लाभ नहीं मिल सका। इसके चलते टिनशेड में ही बीवी-बच्चों के साथ जिंदगी गुजारनी पड़ रही है।
दिलाया जाएगा योजनाओं का लाभ
संबंधित लोगों के बारे में अब तक मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं है। इसके बारे में जानकारी कराई जाएगी। पात्रता के अनुसार उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। सरकार दिव्यांगों के हितों को लेकर गंभीर है। इसमें कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
- कोमल यादव, एसडीएम
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बुलंद हौसले के बल पर तीनों भाई कई साल से पावरलूम चलाकर अपने परिवार की जीविका चला रहे हैं। वे मशीन पर सिर्फ कपड़े बुनने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि उसमें आई गड़बड़ी को भी वह बगैर किसी मिस्त्री के ही ठीक कर देते हैं।
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आपको यह सब जानकर आश्चर्य हो रहा होगा, लेकिन टांडा नगर के मुसहां मोहल्ले के तीनों भाइयों ने यह सब सच कर दिखाया है। नगर के अख्तर हुसैन (55) को जन्म से ही दिखाई नहीं पड़ता। उनके दो भाई मोहम्मद सलीम (38) व अर्से आलम (32) भी जन्म से दृष्टिहीन हैँ। मुसहां मोहल्ला बुनकरी के उद्योग में काफी आगे है।
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पावरलूमों की खटर-पटर के बीच पले बढ़े दृष्टिहीन तीनों भाई अपनी दिव्यांगता को मात देते हुए पावरलूमों पर कपड़े की बुनकरी सीख गए। सिर्फ कपड़ों की बुनाई ही नहीं, बल्कि पावरलूम में आने वाली खराबी को भी वह लोग ठीक करने में माहिर हैं। तीनों भाई एक कारखाने में ही काम करते हैं। तीनों की शादी भी हुई है और बच्चे भी हैं।
तीनों भाइयों की आंखों में रोशनी भले ही नहीं है, लेकिन वह अपने परिवार के लिए किसी प्रकाशपुंज से कम नहीं हैं। तीनों भाइयों ने कभी खुद को दिव्यांग महसूस नहीं होने दिया। तीनों भाई न सिर्फ अपने मोहल्ले व आसपास के क्षेत्रों में घूम टहल लेते हैं, बल्कि दुकानों पर सामानों की खरीदारी व पैसों का लेनदेन भी कर लेते हैं।
दिव्यांगता व आर्थिक तंगी से जूझ रहे इन तीनों भाइयों की सुध न तो कभी प्रशासन ने ली और न ही जनप्रतिनिधियों ने। इनके लिए जन प्रतिनिधियों व अधिकारियों के भाषण व दावे निरर्थक ही साबित हो रहे हैं। इस परिवार को सरकारी सुविधा के नाम पर सिर्फ गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाला राशनकार्ड उपलब्ध है।
सरकार भले ही दिव्यांगों व गरीबों के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। दिव्यांग अख्तर हुसैन की मानें तो कई बार पक्की छत की मांग की गई, लेकिन आवास नहीं मिल सका। सूची में नाम भी भिजवाया गया, लेकिन कुछ लोगों द्वारा अवैध धन की मांग की गई। धन न उपलब्ध करा पाने के चलते उसका भी लाभ नहीं मिल सका। इसके चलते टिनशेड में ही बीवी-बच्चों के साथ जिंदगी गुजारनी पड़ रही है।
दिलाया जाएगा योजनाओं का लाभ
संबंधित लोगों के बारे में अब तक मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं है। इसके बारे में जानकारी कराई जाएगी। पात्रता के अनुसार उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। सरकार दिव्यांगों के हितों को लेकर गंभीर है। इसमें कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
- कोमल यादव, एसडीएम