{"_id":"5ac262094f1c1bc2618b51db","slug":"15226885261015-ambedkar-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोडवेज की 15 बस ने डाल रखी है जोखिम में यात्रियों की जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोडवेज की 15 बस ने डाल रखी है जोखिम में यात्रियों की जान
Updated Mon, 02 Apr 2018 10:48 PM IST
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अंबेडकरनगर। अकबरपुर डिपो की 15 बसों ने यात्रियों की जान जोखिम में डाल रखी है। असल में 62 बसों के बेड़े में 15 बसें ऐसी हैं, जो नीलामी सीमा पार करने के बाद भी सड़कों पर दौड़ायी जा रही हैं। 10 बस ऐसी हैं, जो नीलामी सीमा पार करने की कगार पर हैं। जुगाड़ के सहारे इन बसों का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा 25 निजी बसें भी जर्जर हालत में फर्राटा भर रही हैं। नतीजा यह कि सड़क पर दौड़ रहीं यह बसें जहां तहां खड़ी हो जाती हैं, जिससे अक्सर यात्रियों को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। गर्मी बढ़ने के दौरान अब बसों की यह खस्ताहाली यात्रियों की मुसीबत और ज्यादा बढ़ा सकती है।
एक दिन पहले रविवार को बाराबंकी में जिस प्रकार से परिवहन निगम की बस आग का गोला बनी, उसने परिवहन निगम पर बसों के संचालन व यात्रियों के हित को लेकर दिखाई जा रही गंभीरता पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। दरअसल सिर्फ बाराबंकी में इस प्रकार की खटारा बसों का संचालन नहीं हो रहा, जिले में भी यात्रियों के लिए ऐसी बसें जोखिम का सबब बनी हुई हैं। अकबरपुर रोडवेज में 62 बसों का बेड़ा है। इनमें से कोई एक दो बस नहीं, लगभग एक चौथाई बस से चलना यात्रियों के लिए किसी खतरे से कम नहीं। कारण यह है कि कुल 15 बस ऐसी हैं, जो नीलामी सीमा 11 लाख किमी की दूरी तय कर चुकी हैं, या फिर 10 वर्ष से अधिक का समय पूरा कर चुकी हैं। इसके बावजूद इन बसों को नीलाम करने या फिर बेड़े से हटाने की बजाए उन्हें मामूली मरम्मत कर सड़कों पर दौड़ाया जा रहा। 10 बसें नीलामी की सीमा पार करने की कगार पर हैं। जुगाड़ के सहारे इन बसों का भी संचालन किया जा रहा है। इस प्रकार की खटारा बसों को जिस तरह सड़कों पर उतारा जा रहा, उसके चलते कई बार असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है। अक्सर जहां तहां इस प्रकार की बसें खड़ी हो जाती हैं, जिसका खामियाजा आमतौर पर यात्रियों को भुगतना पड़ता है। यह संयोाग ही है कि जिले में अब तक बाराबंकी जैसी घटना इन बसों से नहीं हुई, लेकिन आगे इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता।
80 निजी बसों का हो रहा संचालन, राजस्व को चपत
परिवहन निगम की बसों की दयनीय स्थिति का सीधा लाभ निजी बसों के संचालक उठा रहे हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 80 निजी बसों के संचालन से परिवहन निगम को बड़ी राजस्व चपत लग रही है। इनमें भी लगभग 25 बसें ऐसी हैं, जो खटारा हो चुकी हैं। इसके बावजूद भी इनका संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। उधर एआरटीओ केएन सिंह ने बताया कि सघन जांच अभियान के चलते 60 प्रतिशत बसों का फिटनेस सही हो गया है। जो 40 प्रतिशत बसें शेष रह गई हैं, उनका भी फिटनेस शीघ्र ही दुरुस्त हो जाएगा।
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यात्रियों के हित में उठाए जाएं ठोस कदम
अमर उजाला टीम को अकबरपुर बस स्टेशन पर मिले शुकुलबाजार के शिवप्रकाश व राजेश ने कहा कि परिवहन निगम बसों का सिर्फ किराया ही आए दिन बढ़ाया जाता है, लेकिन यात्रियों के हित के लिए ठोस कदम नहीं उठाया जाता। जान जोखिम में डालकर यात्रियों को इस प्रकार की खटारा बसों से यात्रा करने को मजबूर होना पड़ रहा है। आजमगढ़ जाने के लिए बस पर बैठे शहजादपुर के रामजनम ने नाराजगी जताते हुए कहा कि खटारा बसें अक्सर जहां तहां खड़ी हो जाती हैं। इससे न सिर्फ गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लगता है, बल्कि यात्री भी असुरक्षित रहते हूैं। अतरौलिया जाने के लिए अकबरपुर बस स्टेशन पर बस का इंतजार कर रहे अकबरपुर के फारूक अहमद ने कहा कि यात्रियों के हित को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। ऐसी बसों का संचालन कतई नहीं करना चाहिए, जो नीलामी सीमा पार कर चुकी हैं या फिर खटारा हो चुकी हैं।
नई बसों का भेजा गया है प्रस्ताव
62 बसों के बेड़े में 15 बसें नीलामी सीमा पार कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें ठीक कराकर संचालन किया जा रहा है। निगम मुख्यालय को 10 नई बसें उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है। -कमाल अहमद, एआरएम
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एक दिन पहले रविवार को बाराबंकी में जिस प्रकार से परिवहन निगम की बस आग का गोला बनी, उसने परिवहन निगम पर बसों के संचालन व यात्रियों के हित को लेकर दिखाई जा रही गंभीरता पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। दरअसल सिर्फ बाराबंकी में इस प्रकार की खटारा बसों का संचालन नहीं हो रहा, जिले में भी यात्रियों के लिए ऐसी बसें जोखिम का सबब बनी हुई हैं। अकबरपुर रोडवेज में 62 बसों का बेड़ा है। इनमें से कोई एक दो बस नहीं, लगभग एक चौथाई बस से चलना यात्रियों के लिए किसी खतरे से कम नहीं। कारण यह है कि कुल 15 बस ऐसी हैं, जो नीलामी सीमा 11 लाख किमी की दूरी तय कर चुकी हैं, या फिर 10 वर्ष से अधिक का समय पूरा कर चुकी हैं। इसके बावजूद इन बसों को नीलाम करने या फिर बेड़े से हटाने की बजाए उन्हें मामूली मरम्मत कर सड़कों पर दौड़ाया जा रहा। 10 बसें नीलामी की सीमा पार करने की कगार पर हैं। जुगाड़ के सहारे इन बसों का भी संचालन किया जा रहा है। इस प्रकार की खटारा बसों को जिस तरह सड़कों पर उतारा जा रहा, उसके चलते कई बार असहज स्थिति उत्पन्न हो जाती है। अक्सर जहां तहां इस प्रकार की बसें खड़ी हो जाती हैं, जिसका खामियाजा आमतौर पर यात्रियों को भुगतना पड़ता है। यह संयोाग ही है कि जिले में अब तक बाराबंकी जैसी घटना इन बसों से नहीं हुई, लेकिन आगे इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता।
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80 निजी बसों का हो रहा संचालन, राजस्व को चपत
परिवहन निगम की बसों की दयनीय स्थिति का सीधा लाभ निजी बसों के संचालक उठा रहे हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 80 निजी बसों के संचालन से परिवहन निगम को बड़ी राजस्व चपत लग रही है। इनमें भी लगभग 25 बसें ऐसी हैं, जो खटारा हो चुकी हैं। इसके बावजूद भी इनका संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। उधर एआरटीओ केएन सिंह ने बताया कि सघन जांच अभियान के चलते 60 प्रतिशत बसों का फिटनेस सही हो गया है। जो 40 प्रतिशत बसें शेष रह गई हैं, उनका भी फिटनेस शीघ्र ही दुरुस्त हो जाएगा।
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यात्रियों के हित में उठाए जाएं ठोस कदम
अमर उजाला टीम को अकबरपुर बस स्टेशन पर मिले शुकुलबाजार के शिवप्रकाश व राजेश ने कहा कि परिवहन निगम बसों का सिर्फ किराया ही आए दिन बढ़ाया जाता है, लेकिन यात्रियों के हित के लिए ठोस कदम नहीं उठाया जाता। जान जोखिम में डालकर यात्रियों को इस प्रकार की खटारा बसों से यात्रा करने को मजबूर होना पड़ रहा है। आजमगढ़ जाने के लिए बस पर बैठे शहजादपुर के रामजनम ने नाराजगी जताते हुए कहा कि खटारा बसें अक्सर जहां तहां खड़ी हो जाती हैं। इससे न सिर्फ गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लगता है, बल्कि यात्री भी असुरक्षित रहते हूैं। अतरौलिया जाने के लिए अकबरपुर बस स्टेशन पर बस का इंतजार कर रहे अकबरपुर के फारूक अहमद ने कहा कि यात्रियों के हित को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। ऐसी बसों का संचालन कतई नहीं करना चाहिए, जो नीलामी सीमा पार कर चुकी हैं या फिर खटारा हो चुकी हैं।
नई बसों का भेजा गया है प्रस्ताव
62 बसों के बेड़े में 15 बसें नीलामी सीमा पार कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें ठीक कराकर संचालन किया जा रहा है। निगम मुख्यालय को 10 नई बसें उपलब्ध कराए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है। -कमाल अहमद, एआरएम