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जीएसटी के विरोध में बंद का जिले में रहा मिलाजुला असर
Updated Fri, 30 Jun 2017 11:47 PM IST
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जीएसटी के विरोध में बंद रहे बाजार
अंबेडकरनगर। जीएसटी के विरोध में व्यापार मंडल के प्रांतीय आह्वान पर शुक्रवार को जिले में बंद का मिला-जुला असर रहा। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे-बड़े बाजारों में पूर्वाह्न तक तो ज्यादातर दुकानें बंद रहीं। हालांकि दोपहर बाद दुकानें खुलने लगीं। उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पर बाइक रैली निकली। व्यापारियों ने कहा कि केंद्र सरकार काला कानून जबरदस्ती थोपना चाहती है। व्यापारी इस काले कानून को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। चेतावनी दी गई कि यदि केंद्र सरकार द्वारा काला कानून वापस नहीं लिया गया तो व्यापारी चुप बैठने वाले नहीं हैं। इससे बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
गौरतलब है कि उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय आह्वान पर शुक्रवार को प्रदेश बंद का आह्वान किया गया था। इसका जिले में मिला-जुला असर दिखाई दिया। शहरी क्षेत्रों में पूर्वाह्न तक लगभग सभी दुकानें बंद रहीं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इक्का-दुक्का दुकानें खुली रहीं। हालांकि दोपहर होते-होते ज्यादातर बाजारों में दुकानें खुल गईं। अंबेडकरनगर उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष दयाशंकर मद्धेशिया के नेतृत्व में शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर बाइक रैली निकली। केंद्र व राज्य सरकार के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए कहा कि जीएसटी जैसा काला कानून जबरदस्ती व्यापारियों पर थोपा जा रहा है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसे लागू करना पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वक्ताओं ने मांग करते हुए कहा कि जीएसटी को सरल, पारदर्शी एवं व्यवहारिक बनाया जाए। व्यापारियों को सजा की व्यवस्था समाप्त की जाए। इसके चलते अक्सर व्यापारियों का उत्पीड़न किया जाता है। मंडी शुल्क को जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है। यह पूरी तरह गलत है। इसे भी जीएसटी में लागू किया जाए। एक सूत्री सरल जीएसटी कर की व्यवस्था की जाए। ऑनलाइन रिटर्न की व्यवस्था समाप्त की जाए। इससे विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कपड़ा, ब्रांडेड अनाज, तिलहन, कृषि यंत्र एवं जीवनोपयोगी वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया जाए। इसे जीएसटी में लाने से आमजन के सामने विभिन्न प्रकार की समस्याएं खड़ी होंगी। कहा गया कि विक्रेता यदि जीएसटी नहीं जमा करता है तो खरीदार की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। महीने में तीन रिटर्न के स्थान पर एक त्रैमासिक रिटर्न की व्यवस्था की जाए। चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस काले कानून के विरोध में लगातार एवं पूरी मजबूती के साथ आवाज बुलंद की जाएगी। इस दौरान जिला उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष शिवकुमार वर्मा, दलसिंगार वर्मा, रणधीर कुमार, मुमताजुलहक, ज्ञानप्रकाश आर्य, संजय कुमार अग्रवाल आदि मौजूद रहे। बाद में विभिन्न मांगों से संबंधित सीएम को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सदर को सौंपा गया।
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अंबेडकरनगर। जीएसटी के विरोध में व्यापार मंडल के प्रांतीय आह्वान पर शुक्रवार को जिले में बंद का मिला-जुला असर रहा। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे-बड़े बाजारों में पूर्वाह्न तक तो ज्यादातर दुकानें बंद रहीं। हालांकि दोपहर बाद दुकानें खुलने लगीं। उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पर बाइक रैली निकली। व्यापारियों ने कहा कि केंद्र सरकार काला कानून जबरदस्ती थोपना चाहती है। व्यापारी इस काले कानून को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। चेतावनी दी गई कि यदि केंद्र सरकार द्वारा काला कानून वापस नहीं लिया गया तो व्यापारी चुप बैठने वाले नहीं हैं। इससे बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
गौरतलब है कि उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय आह्वान पर शुक्रवार को प्रदेश बंद का आह्वान किया गया था। इसका जिले में मिला-जुला असर दिखाई दिया। शहरी क्षेत्रों में पूर्वाह्न तक लगभग सभी दुकानें बंद रहीं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इक्का-दुक्का दुकानें खुली रहीं। हालांकि दोपहर होते-होते ज्यादातर बाजारों में दुकानें खुल गईं। अंबेडकरनगर उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष दयाशंकर मद्धेशिया के नेतृत्व में शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर बाइक रैली निकली। केंद्र व राज्य सरकार के विरुद्ध नारेबाजी करते हुए कहा कि जीएसटी जैसा काला कानून जबरदस्ती व्यापारियों पर थोपा जा रहा है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसे लागू करना पूरी तरह दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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वक्ताओं ने मांग करते हुए कहा कि जीएसटी को सरल, पारदर्शी एवं व्यवहारिक बनाया जाए। व्यापारियों को सजा की व्यवस्था समाप्त की जाए। इसके चलते अक्सर व्यापारियों का उत्पीड़न किया जाता है। मंडी शुल्क को जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है। यह पूरी तरह गलत है। इसे भी जीएसटी में लागू किया जाए। एक सूत्री सरल जीएसटी कर की व्यवस्था की जाए। ऑनलाइन रिटर्न की व्यवस्था समाप्त की जाए। इससे विभिन्न प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कपड़ा, ब्रांडेड अनाज, तिलहन, कृषि यंत्र एवं जीवनोपयोगी वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया जाए। इसे जीएसटी में लाने से आमजन के सामने विभिन्न प्रकार की समस्याएं खड़ी होंगी। कहा गया कि विक्रेता यदि जीएसटी नहीं जमा करता है तो खरीदार की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए। महीने में तीन रिटर्न के स्थान पर एक त्रैमासिक रिटर्न की व्यवस्था की जाए। चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस काले कानून के विरोध में लगातार एवं पूरी मजबूती के साथ आवाज बुलंद की जाएगी। इस दौरान जिला उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष शिवकुमार वर्मा, दलसिंगार वर्मा, रणधीर कुमार, मुमताजुलहक, ज्ञानप्रकाश आर्य, संजय कुमार अग्रवाल आदि मौजूद रहे। बाद में विभिन्न मांगों से संबंधित सीएम को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सदर को सौंपा गया।
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