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फिर खुलेगी जाकिर नाईक पर देशद्रोह के मुकदमे की फाइल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 19 Jul 2016 02:25 AM IST
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कट्टरपंथी प्रचारक जाकिर नाईक के खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मुकदमे की फाइल फिर खुलेगी। झांसी की अदालत में वर्ष 2011 में दर्ज किए गए इस मुकदमे में हाईकोर्ट ने स्टे दे रखा है। नाईक की याचिका का विरोध कर रहे मुद्दसर इलियास खां ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा है कि ढाका कांड के बाद उनके पास नाईक के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। लिहाजा पांच साल पहले दर्ज हुई इस याचिका पर सुनवाई की जाए। मामला सोमवार को न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी की अदालत में पेश हुआ। कोर्ट ने इसे सुनवाई के लिए 28 जुलाई को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इस दौरान याची को अपने साक्ष्य हलफनामे के साथ कोर्ट में दाखिल करने की इजाजत दी है।
मुद्दसर इलियास के अधिवक्ता साहिद सिद्दिकी ने बताया कि जाकिर नाईक ने 2006 में झांसी में बयान दिया था कि मुस्लिमों को उग्रवादी होना चाहिए। कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज और पम्फलेट भी बांटे गए जिससे एक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। याची ने झांसी की अदालत में 2008 में जाकिर नाईक के खिलाफ देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और भावनाओं को भड़काने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। 2011 में अदालत ने उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था। इस वारंट को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने जाकिर के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न पाते हुए अगले आदेश तक किसी भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई थी। तक यह याचिका हाईकोर्ट में लंबित है। अब याची ने प्रार्थनापत्र देकर इस मामले पर सुनवाई करने की मांग की है।
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मुद्दसर इलियास के अधिवक्ता साहिद सिद्दिकी ने बताया कि जाकिर नाईक ने 2006 में झांसी में बयान दिया था कि मुस्लिमों को उग्रवादी होना चाहिए। कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज और पम्फलेट भी बांटे गए जिससे एक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। याची ने झांसी की अदालत में 2008 में जाकिर नाईक के खिलाफ देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और भावनाओं को भड़काने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। 2011 में अदालत ने उनके खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था। इस वारंट को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने जाकिर के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न पाते हुए अगले आदेश तक किसी भी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाई थी। तक यह याचिका हाईकोर्ट में लंबित है। अब याची ने प्रार्थनापत्र देकर इस मामले पर सुनवाई करने की मांग की है।
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