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हाईकोर्ट : बालिग को अपनी मर्जी से धर्म व जीवनसाथी चुनने का अधिकार, माता पिता नहीं सीमित कर सकते स्वतंत्रता

Thu, 17 Sep 2026 01:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 17 Sep 2026 01:03 PM IST
सार

High Court News : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली के चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक बालिग नागरिक को अपनी स्वेच्छा से धर्म चुनने और अपनी पसंद के जीवनसाथी के साथ रहने का संवैधानिक अधिकार है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की पीठ ने कहा कि माता-पिता या परिवार की असहमति किसी वयस्क की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजी स्वायत्तता को बाधित नहीं कर सकती। यह आदेश आयुष के मित्र मोहम्मद सुल्तान द्वारा दाखिल की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान आया।

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youth have right choose their religion and life partner their own free will
आयुष मलिक जो अब रहमान बन गया है चांदनी कुरैशी के साथ। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली के चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बालिग को अपनी मर्जी से धर्म चुनने, उसका पालन करने और अपनी पसंद के जीवनसाथी के साथ रहने का सांविधानिक अधिकार है। परिवार या माता-पिता की असहमति किसी वयस्क की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजी स्वायत्तता को सीमित नहीं कर सकती।

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यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने दिया है। आयुष के दोस्त मोहम्मद सुल्तान ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। उसने आरोप लगाया था कि आयुष को उसके पिता ने अवैध रूप से घर में रोक रखा है। नौ सितंबर को कोर्ट ने आदेश दिया था कि आयुष को 16 सितंबर को अदालत में पेश किया जाए। आदेश के अनुपालन में 16 सितंबर को शामली कोतवाली के एसआई रवि दत्त शर्मा ने आयुष को अदालत में पेश किया।

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कोर्ट ने आयुष और उसके पिता देवराज सिंह मलिक से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की। आयुष ने बताया कि वह 31 साल का है। उसने वर्ष 2014 में बिना किसी डर, लालच, दबाव या जबरदस्ती के स्वेच्छा से इस्लाम धर्म स्वीकार किया था। तब से वह उसके रीति-रिवाजों का पालन कर रहा है। उसने यह भी कहा कि वह चांदनी कुरैशी से शादी करना चाहता है।

आयुष के पिता ने अदालत को बताया कि उनके बेटे को भटकाया गया है। उसकी भलाई को देखते हुए वह धर्म परिवर्तन और विवाह के फैसले के खिलाफ हैं। कोर्ट ने कहा कि बालिग के व्यक्तिगत फैसलों पर अभिभावकों की असहमति सांविधानिक अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकती। कोर्ट ने आयुष को अपनी इच्छा से रहने, अपने पसंद के धर्म का पालन करने और कानून के मुताबिक वैवाहिक संबंध स्थापित करने के लिए स्वतंत्र कर दिया। 

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यह है मामला

आयुष के पिता ने छह जून 2026 को पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि युवती ने उनके बेटे को प्रेम जाल में फंसाकर उसका जबरन धर्मांतरण कराया है। तहरीर पर पुलिस ने चांदनी कुरैशी, उनके पिता इस्लाम कुरैशी और एक रिश्तेदार के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैर-कानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2021 और बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया था। 24 जुलाई को ट्रायल कोर्ट से आरोपियों को जमानत मिल गई थी।

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