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ऊॅं लिखने से किसी कानून का उल्लंघन नहीं होता: हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 06 May 2017 02:17 AM IST
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हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड कंपनी हरिद्वार द्वारा निर्मित टॉयलेट उत्पादों के लोगो में ऊॅँ लिखे जाने के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि किसी लोगो में ऊॅं लिखने या रामदेव की फोटो लगाने से किसी कानून का उल्लंघन नहीं होता है। कोर्ट का कहना था कि ऐसा लगता है कि याची का उद्देश्य प्रचार पाना मात्र है। खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले रवींद्र सिंह कुशवाहा ने इस मामले को लेकर जनहित याचिका दाखिल की थी, जिस पर न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी की खंडपीठ ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता गौरव सिंह का कहना था कि ऊॅं हिंदू धर्म में एक पवित्र मंत्र का स्थान रखता है। जैन, सिख और बौद्ध धर्म अनुयायी भी इसे मंत्र मानते हैं। पतंजलि आयुर्वेद द्वारा तैयार टॉयलेट उत्पादों के लोगों में इस मंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे हिंदुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचती है। याची की दलील थी कि ट्रेड मार्क एक्ट की धारा नौ के तहत धार्मिक भावना को आहत करने वाले चिन्हों का पंजीकरण नहीं किया जा सकता है। आईपीसी की धारा 295(ए) के तहत भी ऐसा करना अपराध है। कोर्ट ने इस मामले में कई न्यायिक निर्णयों पर भी विचार करने के बाद निष्कर्ष दिया कि ऊॅं का इस्तेमाल प्रचार में करने से किसी कानून का उल्लंघन नहीं होता है।
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याची के अधिवक्ता गौरव सिंह का कहना था कि ऊॅं हिंदू धर्म में एक पवित्र मंत्र का स्थान रखता है। जैन, सिख और बौद्ध धर्म अनुयायी भी इसे मंत्र मानते हैं। पतंजलि आयुर्वेद द्वारा तैयार टॉयलेट उत्पादों के लोगों में इस मंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे हिंदुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचती है। याची की दलील थी कि ट्रेड मार्क एक्ट की धारा नौ के तहत धार्मिक भावना को आहत करने वाले चिन्हों का पंजीकरण नहीं किया जा सकता है। आईपीसी की धारा 295(ए) के तहत भी ऐसा करना अपराध है। कोर्ट ने इस मामले में कई न्यायिक निर्णयों पर भी विचार करने के बाद निष्कर्ष दिया कि ऊॅं का इस्तेमाल प्रचार में करने से किसी कानून का उल्लंघन नहीं होता है।
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