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Prayagraj News: छुट्टी के दिन कराया काम, बिना सुरक्षा किट के लगाए मजदूर
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गंगा प्रदूषण जल निगम की ओर से सदियाबाद के ककराहा घाट के पास स्थित गुरु सेतुआ घाट पर इन दिनों सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है। रविवार को कार्यदायी संस्था जेडब्ल्यूआईएल की तरफ से अवकाश घोषित किया गया था लेकिन ठेकेदार ने अवकाश के दिन भी मजदूरों से जबरन काम कराया।
इस दौरान मजदूरों को बिना सुरक्षा किट के सीवर लाइन डालने के लिए गड्ढे में उतार दिया गया। बताया जा रहा है कि ठेकेदार का काम पीछे चल रहा था। समय पर काम पूरा करने के लिए ठेकेदार ने मजदूरों का मेहनताना रोक रखा था, ताकि मजदूर ढूंढने में समय बर्बाद न हो। मजदूर गया प्रसाद इसी इसी जल्दबाजी की भेंट चढ़ गए।
चार मार्च 2025 को शुरू हुए काम को तीन अक्तूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। अब तक मात्र 40 फीसदी काम पूरा हो सका है। मात्र छह महीने का समय शेष बचा है। गंगा प्रदूषण के अधिशासी अभियंता सुरेंद्र सिंह परमार का कहना है कि जहां दुर्घटना हुई उस जगह का काम देवी इंटरप्राइजेस नाम की फर्म कर रही थी। जिसे टर्मिनेट करने के साथ ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। 186 करोड़ रुपये की लागत से दो नालों की टैपिंग व सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है। सीवर प्लांट स्टेशन के जरिये गंदे पानी को यमुना नदी में जाने से रोका जाना है। वहीं सीवर प्लांट स्टेशन के जरिये दूषित पानी को ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने का काम किया जाएगा।
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इनसेट
शादी में जाते तो टल सकता था हादसा...
गया प्रसाद पुत्र कृपाल पाल धमोर में पत्नी समरा, बेटी वंदना (12), बेटा विशाल (11) और विकास (8) के साथ रहता था। हाल ही में बेटी ने 11वीं की परीक्षा पास की थी। परिजनों का आरोप है कि पिछले करीब पांच दिन से गया प्रसाद को मजदूरी नहीं मिली थी। आरोप लगाया कि रविवार को मजदूरी देने के बहाने उसे जबरन काम पर बुलाया गया था। घटना के बाद पत्नी का रो-रोकर हाल बेहाल है, कहा कि पति को एक रिश्तेदार के घर शादी में जाना था लेकिन वह काम पर चले गए। अगर शादी में जाते तो हादसा टल सकता था।
12 फीट गहरा गड्ढा, सुरक्षा के नहीं थे इंतजाम
करीब 12 फीट गहरे गड्ढे में काम के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, जिससे हादसा हो गया। अचानक मिट्टी खिसकने से मौके पर अफरातफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना सुबह करीब 10 बजे की है, लेकिन बचाव का कार्य 11 बजे से शुरू हुआ। बचाव कार्य के दौरान जेसीबी गया प्रसाद के गर्दन में फंस गई थी, जिससे उसका काफी खून भी बहा। शव के बाहर निकालते ही गांव के प्रधान समेत अन्य लोग आ गए और हंगामा शुरू कर दिया।
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इस दौरान मजदूरों को बिना सुरक्षा किट के सीवर लाइन डालने के लिए गड्ढे में उतार दिया गया। बताया जा रहा है कि ठेकेदार का काम पीछे चल रहा था। समय पर काम पूरा करने के लिए ठेकेदार ने मजदूरों का मेहनताना रोक रखा था, ताकि मजदूर ढूंढने में समय बर्बाद न हो। मजदूर गया प्रसाद इसी इसी जल्दबाजी की भेंट चढ़ गए।
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चार मार्च 2025 को शुरू हुए काम को तीन अक्तूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। अब तक मात्र 40 फीसदी काम पूरा हो सका है। मात्र छह महीने का समय शेष बचा है। गंगा प्रदूषण के अधिशासी अभियंता सुरेंद्र सिंह परमार का कहना है कि जहां दुर्घटना हुई उस जगह का काम देवी इंटरप्राइजेस नाम की फर्म कर रही थी। जिसे टर्मिनेट करने के साथ ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। 186 करोड़ रुपये की लागत से दो नालों की टैपिंग व सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है। सीवर प्लांट स्टेशन के जरिये गंदे पानी को यमुना नदी में जाने से रोका जाना है। वहीं सीवर प्लांट स्टेशन के जरिये दूषित पानी को ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने का काम किया जाएगा।
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शादी में जाते तो टल सकता था हादसा...
गया प्रसाद पुत्र कृपाल पाल धमोर में पत्नी समरा, बेटी वंदना (12), बेटा विशाल (11) और विकास (8) के साथ रहता था। हाल ही में बेटी ने 11वीं की परीक्षा पास की थी। परिजनों का आरोप है कि पिछले करीब पांच दिन से गया प्रसाद को मजदूरी नहीं मिली थी। आरोप लगाया कि रविवार को मजदूरी देने के बहाने उसे जबरन काम पर बुलाया गया था। घटना के बाद पत्नी का रो-रोकर हाल बेहाल है, कहा कि पति को एक रिश्तेदार के घर शादी में जाना था लेकिन वह काम पर चले गए। अगर शादी में जाते तो हादसा टल सकता था।
12 फीट गहरा गड्ढा, सुरक्षा के नहीं थे इंतजाम
करीब 12 फीट गहरे गड्ढे में काम के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, जिससे हादसा हो गया। अचानक मिट्टी खिसकने से मौके पर अफरातफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना सुबह करीब 10 बजे की है, लेकिन बचाव का कार्य 11 बजे से शुरू हुआ। बचाव कार्य के दौरान जेसीबी गया प्रसाद के गर्दन में फंस गई थी, जिससे उसका काफी खून भी बहा। शव के बाहर निकालते ही गांव के प्रधान समेत अन्य लोग आ गए और हंगामा शुरू कर दिया।