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कॉलेजों के शिक्षकों का कार्य बहिष्कार वापस

Sun, 05 Jan 2020 12:54 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jan 2020 12:54 AM IST
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Work boycott of college teachers back
Work boycott of college teachers back
कॉलेजों के शिक्षकों का कार्य बहिष्कार वापस
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छात्र हित में ऑक्टा कार्यकारिणी की बैठक में हुआ निर्णय
विकास के लिए नए कुलपति का भी सहयोग करेगा ऑक्टा
प्रयागराज। छात्र हित, समाज हित और राष्ट्रपति की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संगठक महाविद्यालयों के शिक्षक शनिवार को काम पर लौट आए। ऑक्टा कार्यकारिणी की बैठक में दो दिनों तक चले कार्य बहिष्कार को वापस लेने का निर्णय लिया गया। साथ ही सहमति जताई गई कि जो भी नया कुलपति होगा, विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के विकास के लिए ऑक्टा उनका पूरा सहयोग और समर्थन करेगा।
इविंग क्रिश्चियन कॉलेज (ईसीसी) में हुई ऑक्टा कार्यकारिणी की बैठक में महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह ने पिछले चार वर्षों में प्रो. आरएल हांगलू की ओर से महाविद्यालयों के लिए किए गए कार्यों को याद करते हुए यह प्रस्ताव रखा गया कि इसके लिए प्रो. हांगलू का आभार ज्ञापन किया जाए। सभी सदस्यों ने एकमत से उनके द्वारा किए गए कार्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। ऑक्टा सदस्यों ने प्रो. हांगलू का इस्तीफा स्वीकार किए जाने को एक दुखद खबर बताते हुए कहा कि हम अत्यंत आश्चर्य एवं दुख के साथ राष्ट्रपति के इस निर्णय को स्वीकार करते हैं।
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कहा कि वस्तुत: यह आंदोलन प्रो. हांगलू के कार्यों के आधार पर राष्ट्रपति द्वारा उनका त्यागपत्र स्वीकार न किए जाने की प्रार्थना के संदर्भ में था। राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफा स्वीकार कर लेने के बाद अब आंदोलन की प्रासंगिकता नहीं रही, इसलिए ऑक्टा अपने आंदोलन को वापस लेता है। सदस्यों ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि कॉलेजों में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के दो तिहाई से अधिक पद खाली है, विश्वविद्यालय में शिक्षकों के 65 फीसदी से अधिक पद खाली हैं और अब कुलपति का पद भी खाली हो गया है। बैठक की अध्यक्षता ऑक्टर अध्यक्ष डॉ. आरपी सिंह ने की। इसमें ऑक्टा उपाध्यक्ष डॉ. रेखा रानी, डॉ. रणधीर सिंह, डॉ. नरेंद्र बाजपेयी, डॉ. कैलाश नाथ सिंह, डॉ. रामपाल गंगवार, डॉ. विवेक कुमार निगम, डॉ. धीरज चौधरी आदि मौजूद रहे।
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शिक्षकों पर दर्ज एफआईआर को लेकर उठाए सवाल
ऑक्टा के 80 सदस्यों पर धारा 144 के उल्लंघन के आरोप में पुलिस की ओर से दर्ज की गई एफआईआर पर ऑक्टा के पदाधिकारियों ने सवाल उठाए हैं। महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह का कहना है कि दो जनवरी को शाम चार बजे सुभाष चौराहे से चर्च चौराहे तक शांतिपूर्ण जुलूस निकालने की सूचना पुलिस एवं जिला प्रशासन को दो घंटे पहले दी गई थी। शासन ने इसके लिए लिखित अनुमति नहीं दिया और न ही लिखित या मौखिक रूप से मना गया। सभी सदस्य 4.30 बजे तक सुभाष चौराहे पर इकट्ठा हुए। पुलिस एवं प्रशासन के अफसरों के कहने पर ऑक्टा ने जुलूस न निकालने की बात मान ली और मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देकर लौट गए। इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकार्डिंग एवं फोटो ऑक्टा के पास है। फिर भी पुलिस ने आश्चर्यजनक तरीके से एफआईआर दर्ज कर ली।
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