{"_id":"69592adbc81d94a5a501b7f6","slug":"woman-ration-dealer-did-not-get-relief-on-the-charge-of-black-marketing-in-ration-distribution-2026-01-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : राशन वितरण में कालाबाजारी के आरोप में महिला कोटेदार को नहीं मिली राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : राशन वितरण में कालाबाजारी के आरोप में महिला कोटेदार को नहीं मिली राहत
Sat, 03 Jan 2026 08:12 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 03 Jan 2026 08:12 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राशन वितरण में धोखाधड़ी और तकनीकी हेरफेर के मामले में गाजियाबाद की एक उचित दर दुकान संचालक शाहिन बेगम को राहत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने दुकान लाइसेंस रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी।
विज्ञापन
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राशन वितरण में धोखाधड़ी और तकनीकी हेरफेर के मामले में गाजियाबाद की एक उचित दर दुकान संचालक शाहिन बेगम को राहत देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने दुकान लाइसेंस रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार की एकल पीठ ने दिया है।
विज्ञापन
जुलाई 2018 को एनआईसी की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश के 43 जिलों में राशन वितरण में बड़े पैमाने पर विसंगतियां पाई गई थीं। जांच में सामने आया कि याचिकाकर्ता ने केवल तीन आधार कार्ड का उपयोग करके 697 कार्डधारकों के नाम पर राशन की निकासी की थी। इस अनियमितता के आधार पर अधिकारियों ने कोटेदार का लाइसेंस रद्द कर दिया था। इसे शाहिन ने चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
विज्ञापन
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद ई-पॉस मशीन और सर्वर की तकनीकी खराबी के चलते गड़बड़ी की बात को मानने से इन्कार कर दिया। कहा कि 697 कार्डधारक का राशन केवल तीन आधार नंबरों का उपयोग कर निकालना तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया कृत्य है। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता यह समझाने में विफल रही कि उसने कैसे 697 लोगों का राशन मात्र तीन आधार कार्डों पर जारी किया। कोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए दुर्भावना के आरोपों को भी सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया और लाइसेंस रद्दीकरण के आदेश को बरकरार रखा।
विज्ञापन