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क्यों नहीं होनी चाहिए जवाहर बाग कांड की सीबीआई जांच : हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 06 Jul 2016 01:09 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : demo
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मथुरा के जवाहर बाग में हुई घटना की जांच सीबीआई से कराने को लेकर दाखिल जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि इस घटना की जांच सीबीआई को सौंपने में उसे क्या आपत्ति है। प्रदेश सरकार को 14 जुलाई तक अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। अवनीश उपाध्याय और एक अन्य जनहित याचिका में जवाहर बाग कांड की जांच सीबीआई या एसआईटी से कराने की मांग की गई है। याचिका पर न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति आरएन कक्कड़ की खंडपीठ सुनवाई कर रही है।
याचिका में कहा गया है कि जवाहर बाग की घटना में सत्तारूढ़ दल और सरकार में शामिल कई लोगों के अलावा दूसरे प्रदेशों के नक्सली समूहों की संलिप्तता की बात भी सामने आई है। ऐसे में इसकी जांच सीबीआई से कराना आवश्यक है। सरकार घटना में शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को मुआवजा देने में भी भेदभाव कर रही है। याची अधिवक्ता का कहना था कि जवाहर बाग घटना के मास्टर माइंड रामवृक्ष यादव को सरकार ने मात्र 14 दिन के लिए धरना देने की अनुमति दी थी। इसके बाद वहां पूरा नगर बस गया। असलहे जमा हो गए। यह सब राजनीतिक संरक्षण के बिना मुमकिन नहीं है। राजनीतिक शह के कारण ही पुलिस बेबस हो गई।
हाईकोर्ट ने यदि पार्क खाली कराने का आदेश न दिया होता तो स्थिति और भी भयावह होने वाली थी। घटना में दो पुलिसकर्मियों सहित 27 लोगों के मरने की बात आ रही है। यह आंकड़ा भी विश्वसनीय नहीं है। सीबीआई जांच से स्पष्ट हो सकेगा कि कुल कितनी मौतें हुई हैं। अधिवक्ता योगेश अग्रवाल ने एसआईटी जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकार ने जांच के लिए जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा को न्यायिक आयोग बनाया है। मगर आयोग को कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।
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वह सिर्फ जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। जांच एजेंसी से जांच कराने पर उसे मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने का अधिकार होगा।
कोर्ट ने महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह से जानना चाहा कि इस मामले की जांच क्यों न सीबीआई से कराई जाए। महाधिवक्ता ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति की है। उन्होंने कहा कि याचिका मात्र मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है जो विश्वसनीय नहीं मानी जा सकती है।
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याचिका में कहा गया है कि जवाहर बाग की घटना में सत्तारूढ़ दल और सरकार में शामिल कई लोगों के अलावा दूसरे प्रदेशों के नक्सली समूहों की संलिप्तता की बात भी सामने आई है। ऐसे में इसकी जांच सीबीआई से कराना आवश्यक है। सरकार घटना में शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को मुआवजा देने में भी भेदभाव कर रही है। याची अधिवक्ता का कहना था कि जवाहर बाग घटना के मास्टर माइंड रामवृक्ष यादव को सरकार ने मात्र 14 दिन के लिए धरना देने की अनुमति दी थी। इसके बाद वहां पूरा नगर बस गया। असलहे जमा हो गए। यह सब राजनीतिक संरक्षण के बिना मुमकिन नहीं है। राजनीतिक शह के कारण ही पुलिस बेबस हो गई।
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हाईकोर्ट ने यदि पार्क खाली कराने का आदेश न दिया होता तो स्थिति और भी भयावह होने वाली थी। घटना में दो पुलिसकर्मियों सहित 27 लोगों के मरने की बात आ रही है। यह आंकड़ा भी विश्वसनीय नहीं है। सीबीआई जांच से स्पष्ट हो सकेगा कि कुल कितनी मौतें हुई हैं। अधिवक्ता योगेश अग्रवाल ने एसआईटी जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकार ने जांच के लिए जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा को न्यायिक आयोग बनाया है। मगर आयोग को कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।
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वह सिर्फ जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। जांच एजेंसी से जांच कराने पर उसे मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने का अधिकार होगा।
कोर्ट ने महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह से जानना चाहा कि इस मामले की जांच क्यों न सीबीआई से कराई जाए। महाधिवक्ता ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति की है। उन्होंने कहा कि याचिका मात्र मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है जो विश्वसनीय नहीं मानी जा सकती है।