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जालसाज निदेशकों पर रहम, कर्मचारियों पर सितम क्यों : हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 31 Jan 2026 02:45 AM IST
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Why is there leniency towards fraudulent directors and harsh treatment towards employees High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कम समय में रुपये दोगुने करने का झांसा देने वाली कंपनी को बचाने और उसके छोटे कर्मचारियों को जेल भेजने पर हैरानी जताई है। कोर्ट ने प्रयागराज के पुलिस आयुक्त से 11 फरवरी तक व्यक्तिगत हलफनामा तलब किया है। पूछा है कि क्या वजह है कि पुलिस कंपनी के निदेशकों पर रहम कर रही है और छोटे कर्मचारियों पर सितम ढहा रही है।
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सवाल किया कि नौ विवेचक बदलने के बाद भी किसी अधिकारी ने कंपनी के निदेशकों के खिलाफ जांच की जहमत क्यों नहीं उठाई। दोषी विवेचकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी और एजेंट के खिलाफ जालसाजी की धाराएं कैसे लगाई गईं, जबकि लोगों को कंपनी ने बॉन्ड जारी किया है। इन तल्ख सवालों संग न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने आरोपी मोहम्मद वसीम को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
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मामला प्रयागराज के फूलपुर थाना क्षेत्र का है। वर्ष 2017 में दर्ज एफआईआर के मुताबिक वसीम पर आरोप है कि उसने मातृ पितृ सहयोग एग्रोटेक लिमिटेड कंपनी के एजेंट के रूप में शिकायतकर्ता से छह लाख रुपये जमा कराए थे। कंपनी ने पांच साल में रुपये दोगुने करने का वादा किया था, लेकिन बाद में कंपनी का दफ्तर बंद हो गया और निदेशक फरार हो गए। पुलिस ने केवल एजेंट (वसीम) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
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आरोपी ने जमानत पर रिहाई के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दलील दी कि उसने साफ नियत के साथ शिकायतकर्ता के छह में से पांच लाख रुपये पहले वापस कर दिए हैं, बाकी रुपये ब्याज समेत जेल से बाहर आने के बाद वापस कर देगा। इस पर शिकायतकर्ता ने सहमति जताई कि यदि उसके रुपये वापस होते हैं तो उसे जमानत पर वसीम की रिहाई पर कोई आपत्ति नहीं है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मामले में अब तक कुल नौ विवेचक बदले जा चुके हैं। इसके बावजूद किसी भी अधिकारी ने उस कंपनी या उसके निदेशकों के खिलाफ जांच करने की जहमत नहीं उठाई, जिसने निवेशकों के पैसे हड़पे और बॉन्ड जारी किए। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि बिना किसी ठोस आधार के एजेंट के खिलाफ जालसाजी की धाराएं लगा दी गईं, जबकि बॉन्ड कंपनी ने जारी किए थे।
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