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Prayagraj News: अचानक थमे पहिए, अधूरी रह गई दिल्ली की यात्रा
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दिल्ली रूट की ट्रेन निरस्त होने की वजह से प्रयागराज जंक्शन के रिजर्वेशन काउंटर पर टिकट निरस्ती
राजधानी दिल्ली की ओर रफ्तार भरने वाली ट्रेनों के पहिए अचानक थमे तो संगमनगरी के मुसाफिरों की परेशानी बढ़ गईं। प्रयागराज, हमसफर, शकूरबस्ती स्पेशल, हमसफर क्लोन को अचानक निरस्त किए जाने से यात्रियों की यात्रा की पूरी योजना पूरी तरह बेपटरी हो गई है।
हालत यह है कि पसीना बहाकर और लंबी मशक्कत के बाद अपनी सीट आरक्षित कराने वाले प्रयागराज मंडल की ही सात प्रमुख ट्रेनों के तकरीबन आठ हजार कफंर्म टिकट निरस्त हो गए। लोग बोरिया-बिस्तर बांधकर स्टेशन पहुंचने की तैयारी में थे, तभी इन रद्द हुए फेरों की खबर ने उनके सारे मंसूबों पर पानी फेर दिया।
आंकड़ों की बात करें तो अकेले ट्रेन संख्या 02275 प्रयागराज-दादरी हमसफर क्लोन के 1,734 यात्री इस व्यवस्था की भेंट चढ़े हैं, जबकि यूपी संपर्क क्रांति के 1,354, नई दिल्ली हमसफर एक्सप्रेस के 1,248, प्रयागराज एक्सप्रेस के 1,136 और श्रम शक्ति एक्सप्रेस के 1,049 यात्री अपनी बर्थ खो बैठे। इसके अलावा स्पेशल ट्रेन 02417 के 865 और शताब्दी एक्सप्रेस के 573 मुसाफिरों की उम्मीदें भी बीच रास्ते में ही दम तोड़ गईं।
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इस व्यवस्था की सबसे बड़ी मार तो उन हजारों बेबस और लाचार आम यात्रियों पर पड़ी है, जो जनरल टिकट लेकर खचाखच भरे डिब्बों में सफर करने की उम्मीद लगाए बैठे थे। ट्रेनें रद होने के बाद अब रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ और मायूसी का अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ है, और हर कोई बस यही सोच रहा है कि आखिर ऐन वक्त पर मंजिल तक कैसे पहुंचेंगे।
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हालत यह है कि पसीना बहाकर और लंबी मशक्कत के बाद अपनी सीट आरक्षित कराने वाले प्रयागराज मंडल की ही सात प्रमुख ट्रेनों के तकरीबन आठ हजार कफंर्म टिकट निरस्त हो गए। लोग बोरिया-बिस्तर बांधकर स्टेशन पहुंचने की तैयारी में थे, तभी इन रद्द हुए फेरों की खबर ने उनके सारे मंसूबों पर पानी फेर दिया।
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आंकड़ों की बात करें तो अकेले ट्रेन संख्या 02275 प्रयागराज-दादरी हमसफर क्लोन के 1,734 यात्री इस व्यवस्था की भेंट चढ़े हैं, जबकि यूपी संपर्क क्रांति के 1,354, नई दिल्ली हमसफर एक्सप्रेस के 1,248, प्रयागराज एक्सप्रेस के 1,136 और श्रम शक्ति एक्सप्रेस के 1,049 यात्री अपनी बर्थ खो बैठे। इसके अलावा स्पेशल ट्रेन 02417 के 865 और शताब्दी एक्सप्रेस के 573 मुसाफिरों की उम्मीदें भी बीच रास्ते में ही दम तोड़ गईं।
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इस व्यवस्था की सबसे बड़ी मार तो उन हजारों बेबस और लाचार आम यात्रियों पर पड़ी है, जो जनरल टिकट लेकर खचाखच भरे डिब्बों में सफर करने की उम्मीद लगाए बैठे थे। ट्रेनें रद होने के बाद अब रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ और मायूसी का अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ है, और हर कोई बस यही सोच रहा है कि आखिर ऐन वक्त पर मंजिल तक कैसे पहुंचेंगे।