हाईकोर्ट : प्रतिबंधित मांझे की रोकथाम के लिए पुलिस ने क्या किए इंतजाम, पुलिस की नाकामी पर कोर्ट खफा, एसओपी तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए पुलिस के प्रयासों को नाकाफी बताया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों के दावों के बावजूद मांझे से लोगों के घायल होने की खबरें लगातार अखबारों में आ रही हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए पुलिस के प्रयासों को नाकाफी बताया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों के दावों के बावजूद मांझे से लोगों के घायल होने की खबरें लगातार अखबारों में आ रही हैं। इससे साफ है कि जो प्रयास नहीं करने चाहिए थे, वह पुलिस नहीं कर रही है।
इस टिप्पणी के साथ मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने प्रयागराज निवासी डॉ.कमल कुमार जायसवाल की जनहित याचिका पर पुलिस अधिकारियों से विस्तृत जानकारी तलब की है। पूछा है कि प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए पुलिस विभाग में कोई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू है या नहीं।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित मांझे के खतरे से निपटने के लिए केवल एक बार कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए निरंतर प्रयास की जरूरत है। पुलिस विभाग में ऐसी कोई एसओपी मौजूद नहीं है तो संबंधित अधिकारियों को इसको तैयार करनी होगी। तीन दिसंबर को मामले की सुनवाई होगी।