फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Well done Sonali: Humanity is alive only because of good hearts like you, got the destitute elderly admitted i

शाबाश सोनाली : तुम्हारे जैसे नेकदिलों से ही जिंदा है इंसानियत, बेसहारा बुजुर्ग को एसआरएन में कराया भर्ती

Mon, 28 Oct 2024 06:31 PM IST
विनोद सिंह सत्येंद्र पटेल, संवाद न्यूज एजेंसी
सत्येंद्र पटेल, संवाद न्यूज एजेंसी Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 28 Oct 2024 06:31 PM IST
सार

सोनाली की यह कहानी इंसानियत के जिंदाबाद होने की है। अल्लापुर में रहकर बीए कर रही सोनाली शर्मा शनिवार दोपहर करीब 12 बजे अलोपीदेवी मंदिर के पास से ई-रिक्शा से जा रही थी। तभी मंदिर के बाहर अचेत पड़े एक बुजुर्ग पर निगाह पड़ी।

विज्ञापन
Well done Sonali: Humanity is alive only because of good hearts like you, got the destitute elderly admitted i
एसआरएन अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मंदिर के गेट पर अचेत बुजुर्ग को देख सोनाली एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराने लाई थी। डॉक्टर राजी थे, इस शर्त पर कि देखभाल के लिए वही वहां रुके। छात्रा के लिए यह संभव न था। सो, डॉक्टरों के दबाव में वापस छोड़ने गई तो दुकानदारों ने खरीखोटी सुनाई। वह फिर अस्पताल गई और पुलिस के दखल से साढ़े चार घंटे बाद इलाज शुरू कराकर ही दम लिया।

विज्ञापन

सोनाली की यह कहानी इंसानियत के जिंदाबाद होने की है। अल्लापुर में रहकर बीए कर रही सोनाली शर्मा शनिवार दोपहर करीब 12 बजे अलोपीदेवी मंदिर के पास से ई-रिक्शा से जा रही थी। तभी मंदिर के बाहर अचेत पड़े एक बुजुर्ग पर निगाह पड़ी। तुरंत ई-रिक्शा से उतर कर पास पहुंची तो बुजुर्ग के पैर में गहरा घाव पाया। इसमें कीड़े पड़ चुके थे, बदबू भी आ रही थी।

विज्ञापन

एंबुलेंस बुलाकर सोनाली अपरिचित बुजुर्ग को लेकर एसआरएन अस्पताल पहुंची। डॉक्टरों ने बाहर से दवा लाने के लिए कहा। सोनाली ने उन्हें बताया कि वह छात्रा है, उसके पास इतने पैसे नहीं हैं। इस पर डॉक्टरों ने बुजुर्ग की ड्रेसिंग कर दी। फिर भी, करीब 50 रुपये की दवा उसे लानी ही पड़ी। डॉक्टरों ने उसे बुजुर्ग को उसी स्थान पर छोड़ आने को कहा।

विज्ञापन
विज्ञापन


डॉक्टरों ने भर्ती से किया इनकार

वह 80 रुपये में ई-रिक्शा कर बुजुर्ग को मंदिर के गेट पर छोड़ने पहुंची। इस पर दुकानदारों ने उसे भला-बुरा कहा और बुजुर्ग को अस्पताल में ही छोड़ आने को कहा। सोनाली के पास पैसे नहीं थे। इस पर दुकानदारों ने अस्पताल तक का किराया देकर ई-रिक्शा में बैठा दिया। वह दोबारा एसआरएन पहुंची और डॉक्टरों से पूरी बात बताई।


बकौल सोनाली, डॉक्टरों ने कहा कि बुजुर्ग को भर्ती तभी करेंगे, जब इनकी देखभाल के लिए तुम यहां रुकोगी। बेतुकी शर्त पर उसकी अस्पताल स्टाफ से कहासुनी भी हो गई। बुजुर्ग के हाल और तंत्र की अमानवीयता देखकर सोनाली रो पड़ी। यह सूचना एसआरएन पुलिस चौकी के एसआई विवेक राय तक गई तो उन्होंने तुरंत डॉक्टरों से बात की। अंतत: सोनाली की नेकदिली से बुजुर्ग भर्ती हुए, इलाज शुरू हुआ।

इसी रवैये से मदद नहीं करते हैं लोग

सरकारी तंत्र के इसी रवैये के कारण चाहते हुए भी लोग मदद के लिए आगे नहीं आते। इसी कारण गंभीर रूप से घायलों को अस्पताल तक पहुंचाकर जान बचाने में पुरस्कार देने की योजना भी फलीभूत नहीं हो पा रही। सवाल है कि जब अस्पताल का काम ही इलाज करना है तो सोनाली को इतनी जद्दोजहद क्यों करनी पड़ी। सवाल उन दुकानदारों से भी है, जो खुद बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचा सकते थे, लेकिन आगे नहीं आए। जब एक छात्रा ने पहल की तो सारा जिम्मा उसी पर डाल दिया। सवाल उन राहगीरों से भी है, जिन्होंने बुजुर्ग को देखकर भी अनदेखा किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed