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मौसम बदले रंग हजार, चटक धूप, तो कहीं झमाझम बारिश
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 19 Aug 2015 01:00 AM IST
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इलाहाबाद। मानसून इस बार गिरगिट की तरह रंग बदल रहा है। कभी चटक धूप, तो कभी आसमान में काले घने बादल और झमाझम बारिश हो रही है। दूरदराज की बात तो छोडे़ शहर के कुछ इलाकों में झमाझम बारिश हो रही है तो कई इलाकाें में बूंदाबांदी भी नही हो रही है। मौसम के साथ साथ पारा भी आए दिन गोते लगा रहा है। कभी पारा 30 डिग्री तो अचानक चौबीस घ्ंांटे के भीतर 35 डिग्री पार हो रहा है। मंगलवार को भी मौसम का कुछ ऐसा ही मिजाज देखने को मिला। शहर के कुछ इलाकों में बारिश हुई तो कई इलाकों में बूंदाबांदी भी नहीं हुई।
मौसम विभाग के मुताबिक एक दिन पूर्व तापमान जो 30.2 डिग्री था वह चौबीस घंटे के भीतर 33.5 डिग्री पहुंच गया। यह स्थिति तब रही कि जबकि शहर केकई इलाकों में दिन भर अलग अलग समय पर बारिश होती रही। न्यूनतम तापमान भी 26.2 डिग्री पर पहुंच गया। अधिकतम आर्र्दता 98 फीसदी और न्यूनतम 72 फीसदी दर्ज की गई। मौसम के जानकार भी भौचक है। मौसम विज्ञानी डॉ. एसएस ओझा का कहना है कि वाकई में मौसम का तेजी से बदलता मिजाज चौंकाने वाला है।
हवाओं की टकराहट से खंडित मानसून का माहौल बन गया है। सुकून देने वाली बात यह है कि रुक रुककर बारिश हो रही है। जिसने आम आदमी को गर्मी व उमस से राहत दिलाने के साथ ही किसानों को भी सिंचाई से राहत दे दी है। मौसम विज्ञानी डॉ. ओझा का कहना है कि पछुवा हवाएं जैसे ही प्रभावी होती है तो पारा अचानक चढ़ जाता है और इसकी वजह से आसमान से बादल भी नदारद हो जाते हैं। डॉ. ओझा के मुताबिक मौसम का यह मिजाज आने वाले दिनों में भी देखने को मिले तो ताज्जुब नही।
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मौसम विभाग के मुताबिक एक दिन पूर्व तापमान जो 30.2 डिग्री था वह चौबीस घंटे के भीतर 33.5 डिग्री पहुंच गया। यह स्थिति तब रही कि जबकि शहर केकई इलाकों में दिन भर अलग अलग समय पर बारिश होती रही। न्यूनतम तापमान भी 26.2 डिग्री पर पहुंच गया। अधिकतम आर्र्दता 98 फीसदी और न्यूनतम 72 फीसदी दर्ज की गई। मौसम के जानकार भी भौचक है। मौसम विज्ञानी डॉ. एसएस ओझा का कहना है कि वाकई में मौसम का तेजी से बदलता मिजाज चौंकाने वाला है।
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हवाओं की टकराहट से खंडित मानसून का माहौल बन गया है। सुकून देने वाली बात यह है कि रुक रुककर बारिश हो रही है। जिसने आम आदमी को गर्मी व उमस से राहत दिलाने के साथ ही किसानों को भी सिंचाई से राहत दे दी है। मौसम विज्ञानी डॉ. ओझा का कहना है कि पछुवा हवाएं जैसे ही प्रभावी होती है तो पारा अचानक चढ़ जाता है और इसकी वजह से आसमान से बादल भी नदारद हो जाते हैं। डॉ. ओझा के मुताबिक मौसम का यह मिजाज आने वाले दिनों में भी देखने को मिले तो ताज्जुब नही।
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