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रेलवे : खिड़कियों से बाहर प्लेटफॉर्म पर नहीं सीधे चलित डस्टबिन में जाएगा कचरा, स्वच्छता मित्रों की तैनाती

Mon, 19 Oct 2026 03:50 PM IST
विनोद सिंह राहुल शर्मा, प्रयागराज
राहुल शर्मा, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 19 Oct 2026 03:50 PM IST
सार

उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने प्रयागराज जंक्शन और कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर गंदगी से निपटने के पारंपरिक तरीउत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने प्रयागराज जंक्शन और कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर गंदगी से निपटने के पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। एनसीआर प्रशासन के ‘विशेष अभियान 6.0’ के तहत रेलवे ने पहली बार पहिये वाली चलित डस्टबिन यानी ‘व्हील डस्टबिन’ के साथ स्वच्छता मित्रों की कोच-टू-कोच तैनाती की है।कों को पूरी तरह बदल दिया है। एनसीआर प्रशासन के ‘विशेष अभियान 6.0’ के तहत रेलवे ने पहली बार पहिये वाली चलित डस्टबिन यानी ‘व्हील डस्टबिन’ के साथ स्वच्छता मित्रों की कोच-टू-कोच तैनाती की है।
 

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Waste will no longer be thrown from train windows onto the platform; instead
कोच के आगे व्हील डस्टबिन के साथ खड़े स्वच्छता मित्र। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) ने प्रयागराज जंक्शन और कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर गंदगी से निपटने के पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। एनसीआर प्रशासन के ‘विशेष अभियान 6.0’ के तहत रेलवे ने पहली बार पहिये वाली चलित डस्टबिन यानी ‘व्हील डस्टबिन’ के साथ स्वच्छता मित्रों की कोच-टू-कोच तैनाती की है।

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अक्सर देखा जाता था कि जैसे ही कोई ट्रेन प्रयागराज जंक्शन के प्लेटफॉर्म पर आकर ठहरती थी, स्लीपर और जनरल कोचों की खिड़कियों से कचरा सीधे नीचे फेंक दिया जाता था। इस गंदगी से निपटने के लिए पहली बार एनसीआर ने पहिये वाली चलित डस्टबिन (व्हील डस्टबिन) के साथ स्वच्छता मित्रों की कोच-टू-कोच तैनाती का अनोखा दांव खेला है।
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ट्रेन के रुकते ही ये स्वच्छता मित्र दौड़कर हर कोच के पास पहुंचते हैं और खिड़कियों से ही यात्रियों का कचरा अपने डस्टबिन में ले लेते हैं, जिससे कचरा नीचे गिर ही नहीं पाता। इस अनूठी पहल का असर यह हुआ कि प्लेटफॉर्म पर गंदगी फैलने की समस्या का काफी हद तक समाधान हो गया है।
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प्रयोगात्मक तौर पर फिलहाल यह व्यवस्था प्रयागराज जंक्शन और कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर रोजाना लंबी दूरी की अलग-अलग पांच चुनिंदा ट्रेनों में शुरू की गई है। इसके अलावा जोन के आगरा कैंट, ग्वालियर, झांसी, मथुरा, अलीगढ़, इटावा और मिर्जापुर आदि में भी जल्द ही इस व्हील डस्टबिन सुविधा का विस्तार किया जाएगा।


पहली बार दो स्टेशनों पर व्हील डस्टबिन की शुरुआत की गई है। साथ ही वैज्ञानिक निस्तारण के लिए स्रोत स्तर पर ही कचरे को चार रूप में सूखा, गीला, सेनेटरी और घरेलू हानिकारक कचरे में बांटा जा रहा है। इससे रीसाइक्लिंग की प्रक्रिया बेहद आसान हो गई है। - डाॅ. शिवम शर्मा, सीपीआरओ, एनसीआर

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