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बदइंतजामी से लड़खड़ाई वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई की व्यवस्था
Thu, 23 Jul 2020 03:03 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 23 Jul 2020 03:03 AM IST
सार
- हाईकोर्ट के वकीलों ने लगाया लिंक न मिलने, क्यूबिक में गंदगी का आरोप
- बार अध्यक्ष और महासचिव ने की पुरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हाईकोर्ट में मुकदमों की सुनवाई सिर्फ वीडियो कांफ्रेंसिंग से करने की व्यवस्था पहले दिन ही बदइंतजामी की भेंट चढ़ गई। बुधवार को मुकदमा बहस करने गए ज्यादातर वकील इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं। अधिवक्ताओं ने सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के बाहर बनाए गए क्यूबिक में भारी अव्यवस्था और गंदगी का आरोप लगाया है। वहीं हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर खुली अदालत में सुनवाई की व्यवस्था ही लागू करने की मांग की है।
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हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित व्यवस्था के तहत गेट संख्या तीन ए, तीन बी, पांच और स्टेडियम साइड में वीडियो कांफ्रेंसिंग के क्यूबिक बनाए गए हैं। इन पर उस कोर्ट का विवरण लिखा था कि किस क्यूबिक से कौन सी कोर्ट में लगे मुकदमों की बहस की जाएगी। अधिवक्ता सुबह दस बजे जब क्यूबिक पहुंचे तो वहां लगे कंप्यूटरों का लिंक शुरू नहीं हुआ था। करीब 11 बजे तक यही स्थिति रही। वकीलों का आरोप है कि क्यूबिक का आकार काफी छोटा है। वहां सिर्फ एक मेज रखी है, जहां तीन या चार वकील खड़े होकर बहस नहीं कर सकते। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो सकता। वकीलों का कहना है क्यूबिक में गंदगी इतनी है कि वहां पान और गुटखे के पाउच पड़े थे। सैनिटाइजेशन नहीं किया गया था और न ही सैनिटाइजर रखा गया था। ऐसे में उनको निश्चित कोरोना संक्रमण हो जाएगा।
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क्यूबिक में एक हेडफोन, सभी रह रहे इस्तेमाल
वकीलों का कहना था कि क्यूबिक में फाइल हाथ में लेकर खड़े होकर मुकदमा कैसे किया जा सकता है। जहां क्यूबिक बनाए गए थे, वहां वकीलों की भीड़ लग गई और शोर गुल होने लगा इससे स्थिति और खराब हो गई। सरकारी पक्ष के वकीलों को भी मुकदमा बहस करने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। अधिवक्ता जगदीश बुंदेला का कहना है कि एक क्यूबिक में एक ही हेड फोन था। सभी वकीलों को उसी का इस्तेमाल करना था, इससे तो संक्रमण का खतरा है। हेडफोन को सैनिटाइज करने की कोई व्यवस्था नहीं थी। अधिवक्ता अनूप बर्नवाल को मुकदमे का लिंक मिला पर उनकी फाइल ही कोर्ट नहीं पहुंची थी, लिहाजा डेट लग गई। वहीं अधिवक्ता मिथलेश तिवारी का कहना है कि वह पूरे दिन हाईकोर्ट में खड़े रहे, मगर उनको मुकदमे का लिंक नहीं मिला। पूर्व उपाध्यक्ष एसके गर्ग का कहना है कि मुकदमों की सुनवाई खुली अदालत में हो या हाईकोर्ट एक माह के लिए बंद कर दिया जाए।
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अध्यक्ष, महासचिव ने की पुरानी व्यवस्था से सुनवाई की मांग
हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह और महासचिव प्रभाशंकर मिश्र ने मुख्य न्यायमूर्ति को पत्र लिख कर खुली अदालत में सुनवाई की मांग की है। उनका कहना है कि वह तरीका ज्यादा सुरक्षित है। सीमित संख्या में वकीलों को प्रवेश देने से संक्रमण का खतरा कम है, जबकि क्यूबिक की व्यवस्था में संक्रमण का खतरा अधिक है। अध्यक्ष का कहना है कि वर्तमान वीडियो कांफ्रेंसिंग की व्यवस्था न सिर्फ अव्यवहारिक है, बल्कि असफल भी है। 99 प्रतिशत वकील तकनीकी रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं। उनको ई-फाइलिंग में तमाम दिक्कतें हैं। मौजूदा व्यवस्था में यह भी साफ नहीं है कि मुकदमों में काउंटर और रिज्वाइंडर एफिडेविट का आदान-प्रदान कैसे होगा। अध्यक्ष का यह भी कहना है कि बार का फोटो एफिडेविट सेंटर बंद होने से बार के आर्थिक स्रोत में कमी आई है और कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं हो पा रहा है, इसलिए मैन्युअल फाइलिंग की व्यवस्था लागू कर फोटो एफिडेविट सेंटर खोलने की अनुमति दी जाए।
सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी
तमाम वकीलों ने सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप पर कमेंट लिखकर और वीडियो शेयर कर नई व्यवस्था के प्रति नाखुशी जाहिर की है। उनका कहना है कि इन हालात में वह निश्चित ही संक्रमण के शिकार के हो जाएगा। वीडियो में क्यूबिक में फैली गंदगी और सोशल डिस्टेसिंग की समस्या को दिखाया गया है।