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Prayagraj News: बरसात में सब्जियों के दाम में उछाल, रसोई का बजट बिगड़ा
Thu, 09 Jul 2026 02:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Thu, 09 Jul 2026 02:20 AM IST
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बरसात का मौसम शुरू होते ही सब्जियों की कीमतों में तेजी आई है। टमाटर, हरी मिर्च और अन्य हरी सब्जियों के दाम बढ़ने से आम लोगों की रसोई का बजट प्रभावित हुआ है। बढ़ती महंगाई के कारण लोगों की थाली से सब्जियां दूर होती दिख रही हैं।
स्थानीय बाजार में टमाटर 40 से 50 रुपये प्रति किलो फुटकर बिक रहा है। हरी मिर्च के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। लौकी और नेनुआ सहित अन्य हरी सब्जियों की कीमतों में भी उछाल देखा जा रहा है। नेनुआ 30 से 35 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। अन्य मौसमी सब्जियों के भाव भी पहले की तुलना में अधिक हैं।
सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि बारिश के चलते मंडियों में सब्जियों की आवक कम हुई है। इसके साथ ही परिवहन लागत बढ़ने के कारण कीमतों में वृद्धि हुई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले जहां कम खर्च में कई प्रकार की सब्जियां खरीदी जा सकती थीं, वहीं अब सीमित मात्रा में ही खरीदारी करनी पड़ रही है।
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गृहिणियों का कहना है कि सब्जियों की लगातार बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। परिवार का मासिक खर्च संभालना कठिन हो गया है। यदि आने वाले दिनों में सब्जियों की आवक नहीं बढ़ी, तो कीमतों में और अधिक इजाफा हो सकता है। इससे आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
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स्थानीय बाजार में टमाटर 40 से 50 रुपये प्रति किलो फुटकर बिक रहा है। हरी मिर्च के दाम में भी बढ़ोतरी हुई है। लौकी और नेनुआ सहित अन्य हरी सब्जियों की कीमतों में भी उछाल देखा जा रहा है। नेनुआ 30 से 35 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। अन्य मौसमी सब्जियों के भाव भी पहले की तुलना में अधिक हैं।
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सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि बारिश के चलते मंडियों में सब्जियों की आवक कम हुई है। इसके साथ ही परिवहन लागत बढ़ने के कारण कीमतों में वृद्धि हुई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले जहां कम खर्च में कई प्रकार की सब्जियां खरीदी जा सकती थीं, वहीं अब सीमित मात्रा में ही खरीदारी करनी पड़ रही है।
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गृहिणियों का कहना है कि सब्जियों की लगातार बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। परिवार का मासिक खर्च संभालना कठिन हो गया है। यदि आने वाले दिनों में सब्जियों की आवक नहीं बढ़ी, तो कीमतों में और अधिक इजाफा हो सकता है। इससे आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।