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भारतीय भाषाओं-बोलियों का 118 वर्ष बाद होगा सर्वेक्षण
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Vardha University will research on Indian Languages
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा का प्रयागराज क्षेत्रीय केंद्र करेगा अध्ययन
कुलपति ने बताया- देश भर में 110 करोड़ लोग हिंदी और उसकी सहायक भाषा बोलते-पढ़ते
प्रयागराज। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा का क्षेत्रीय केंद्र हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं का सर्वेक्षण करेगा। इसके अंतर्गत देश के अलग-अलग अंचलों में बोली और पढ़ी जाने वाली भारतीय भाषाओं का आंकड़ा तैयार किया जाएगा। कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि हिंदी विवि का क्षेत्रीय केंद्र जनवरी 2020 से झूंसी में निर्माणाधीन निजी भवन में स्थानांतरित हो जाएगा। इसी के साथ सर्वेक्षण का भी काम शुरू हो जाएगा। बताया, भाषा विज्ञानी जार्ज ग्रियर्सन ने 1902 में लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया के तहत भारतीय भाषाओं का सर्वेक्षण किया था, अब 118 वर्ष बाद किसी विवि की ओर से इस दिशा में काम शुरू होगा।
हिंदी विवि के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल सोमवार को क्षेत्रीय केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के बाद खास बातचीत में उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विवि वर्धा की स्थापना हिंदी के साथ भारतीय भाषाओं के उन्नयन के लिए हुई थी।
भारतीय भाषाओं के सर्वेक्षण के लिए उन्होंने प्रयागराज और वाराणसी को सबसे मुफीद जगह बताई। बताया, प्रयागराज में स्थापित विवि के क्षेत्रीय केंद्र को यह महत्वपूर्ण दायित्व दिया जा रहा है। अपने देश में अलग-अलग अंचलों में हिंदी एवं उसकी सहयोगी भाषाओं को बोलने और प्रयोग करने वालों में 110 करोड़ लोग शामिल हैं। मारीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद, टौबैको सहित कई दूसरे देशों को मिलाकर पूरे विश्व में 130 करोड़ हिंदी अथवा उसकी सहायक भाषाएं बोली जाती हैं। बताया कि हिंदी का स्वरूप बदल रहा है, इसकी पूरे विश्व में स्वीकार्यता बढ़ी है।
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भाषा-बोलियों का होगा सूक्ष्म अध्ययन
कुलपति ने बताया कि जार्ज ग्रियर्सन से पहले दैनिक जीवन में व्यवहृत भाषाओं और बोलियों का इतना सूक्ष्म अध्ययन पहले कभी नहीं हुआ था। इसके बाद अपने देश में भारतीय भाषाओं का सर्वेक्षण नहीं हुआ। ग्रियर्सन के बाद यह काम हिंदी विवि का प्रयागराज स्थित क्षेत्रीय केंद्र करेगा। बताया कि बुद्ध और अशोक की धर्मलिपि के बाद ग्रियर्सन की ओर से किया गया सर्वे ही पहला ग्रंथ है, जिसमें दैनिक जीवन में बोली जानेवाली भाषाओं और बोलियों का दिग्दर्शन प्राप्त होता है। ग्रियर्सन के 21 अंक के सर्वे में देश की 179 भाषाओं और 544 बोलियों का सविस्तार सर्वेक्षण है। साथ ही भाषाविज्ञान और व्याकरण संबंधी सामग्री से भी वह पूर्ण है। बताया कि उनका विवि नए मुहावरों के विकास और वर्धा शब्द कोश के विकास की दिशा में काम कर रहा है।
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कुलपति ने बताया- देश भर में 110 करोड़ लोग हिंदी और उसकी सहायक भाषा बोलते-पढ़ते
प्रयागराज। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा का क्षेत्रीय केंद्र हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं का सर्वेक्षण करेगा। इसके अंतर्गत देश के अलग-अलग अंचलों में बोली और पढ़ी जाने वाली भारतीय भाषाओं का आंकड़ा तैयार किया जाएगा। कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि हिंदी विवि का क्षेत्रीय केंद्र जनवरी 2020 से झूंसी में निर्माणाधीन निजी भवन में स्थानांतरित हो जाएगा। इसी के साथ सर्वेक्षण का भी काम शुरू हो जाएगा। बताया, भाषा विज्ञानी जार्ज ग्रियर्सन ने 1902 में लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया के तहत भारतीय भाषाओं का सर्वेक्षण किया था, अब 118 वर्ष बाद किसी विवि की ओर से इस दिशा में काम शुरू होगा।
हिंदी विवि के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल सोमवार को क्षेत्रीय केंद्र का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के बाद खास बातचीत में उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विवि वर्धा की स्थापना हिंदी के साथ भारतीय भाषाओं के उन्नयन के लिए हुई थी।
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भारतीय भाषाओं के सर्वेक्षण के लिए उन्होंने प्रयागराज और वाराणसी को सबसे मुफीद जगह बताई। बताया, प्रयागराज में स्थापित विवि के क्षेत्रीय केंद्र को यह महत्वपूर्ण दायित्व दिया जा रहा है। अपने देश में अलग-अलग अंचलों में हिंदी एवं उसकी सहयोगी भाषाओं को बोलने और प्रयोग करने वालों में 110 करोड़ लोग शामिल हैं। मारीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद, टौबैको सहित कई दूसरे देशों को मिलाकर पूरे विश्व में 130 करोड़ हिंदी अथवा उसकी सहायक भाषाएं बोली जाती हैं। बताया कि हिंदी का स्वरूप बदल रहा है, इसकी पूरे विश्व में स्वीकार्यता बढ़ी है।
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भाषा-बोलियों का होगा सूक्ष्म अध्ययन
कुलपति ने बताया कि जार्ज ग्रियर्सन से पहले दैनिक जीवन में व्यवहृत भाषाओं और बोलियों का इतना सूक्ष्म अध्ययन पहले कभी नहीं हुआ था। इसके बाद अपने देश में भारतीय भाषाओं का सर्वेक्षण नहीं हुआ। ग्रियर्सन के बाद यह काम हिंदी विवि का प्रयागराज स्थित क्षेत्रीय केंद्र करेगा। बताया कि बुद्ध और अशोक की धर्मलिपि के बाद ग्रियर्सन की ओर से किया गया सर्वे ही पहला ग्रंथ है, जिसमें दैनिक जीवन में बोली जानेवाली भाषाओं और बोलियों का दिग्दर्शन प्राप्त होता है। ग्रियर्सन के 21 अंक के सर्वे में देश की 179 भाषाओं और 544 बोलियों का सविस्तार सर्वेक्षण है। साथ ही भाषाविज्ञान और व्याकरण संबंधी सामग्री से भी वह पूर्ण है। बताया कि उनका विवि नए मुहावरों के विकास और वर्धा शब्द कोश के विकास की दिशा में काम कर रहा है।