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चैटिंग करते वक्त आंकड़ों के प्रयोग में बरतें सावधानी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 02 Sep 2018 01:24 AM IST
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उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में शनिवार को ‘स्टेटिस्टिकल टेक्निक्स, बिग डाटा एनालिसिसि एंड रिसर्च’ विषय पर अंतर्राष्ट्रीय सिंपोजियम का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता बांड बिजनेस स्कूल, बांड युनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया के प्रो. कुलदीप कुमार ने कहा कि सांख्यिकी के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को इंटरनेट पर चैटिंग करते समय आंकड़ों का प्रयोग अत्यंत सावधानी से करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन के विविध आर्थिक, व्यापारिक, सामाजिक आदि क्षेत्रों में व्यापक डाटा का इस्तेमाल करते हुए उपयोगी निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं और उनके अनुसार नीतियों का निर्धारण किया जा सकता है। मुक्त विवि के कुलपति प्रो. केएन सिंह ने कहा कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का सर्वाधिक जोर उच्च शिक्षा के संवर्धन एवं शोध में गुणवत्ता लाने पर है। शोध कार्यों से उन्हीं को जुड़ना चाहिए, जिनमें इसके लिए अभिवृत्ति हो। यह सामान्य अध्ययन से बहुत आगे बढ़कर है। उन्होंने कहा कि सांख्यिकी पूर्ण सत्य नहीं, बल्कि अर्ध सत्य है। हम इसके तहत गरीबी ओर उत्पादकता में संबंध निकाल सकते हैं लेकिन करीबी को जानने के लिए केवल डाटा ही पर्याप्त नहीं है। इस क्षेत्र मेें फील्ड वर्क का आज भी कोई विकल्प नहीं है।
मुख्य अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनूप चतुर्वेदी ने कहा कि आज डाटा टेक्निक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हो गई है। पहले जिन क्षेत्रों में सांख्यिकी का प्रवेश नहीं था, आज उनमें बिग डाटा एनालिसिस का प्रयोग जनहित में किया जाता है। चिकित्सकीय एवं स्वास्थ्य संबंधी शोधों में इसका इस व्यापक पैमाने पर प्रयोग हो रहा है। सिम्पोजियम का संचालन डॉ. श्रुति, धन्यवाद ज्ञापन रजिस्ट्रार डॉ. अरुण कुमार गुप्ता एवं आगंतुकों को स्वागत डॉ. आशुतोष गुप्ता ने किया। बेबी आस्था एवं रुचि बाजपेयी ने वंदेमातरम की प्रस्तुति की। इस दौरान 150 से अधिक प्रतिभागियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
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उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन के विविध आर्थिक, व्यापारिक, सामाजिक आदि क्षेत्रों में व्यापक डाटा का इस्तेमाल करते हुए उपयोगी निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं और उनके अनुसार नीतियों का निर्धारण किया जा सकता है। मुक्त विवि के कुलपति प्रो. केएन सिंह ने कहा कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का सर्वाधिक जोर उच्च शिक्षा के संवर्धन एवं शोध में गुणवत्ता लाने पर है। शोध कार्यों से उन्हीं को जुड़ना चाहिए, जिनमें इसके लिए अभिवृत्ति हो। यह सामान्य अध्ययन से बहुत आगे बढ़कर है। उन्होंने कहा कि सांख्यिकी पूर्ण सत्य नहीं, बल्कि अर्ध सत्य है। हम इसके तहत गरीबी ओर उत्पादकता में संबंध निकाल सकते हैं लेकिन करीबी को जानने के लिए केवल डाटा ही पर्याप्त नहीं है। इस क्षेत्र मेें फील्ड वर्क का आज भी कोई विकल्प नहीं है।
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मुख्य अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग के अध्यक्ष प्रो. अनूप चतुर्वेदी ने कहा कि आज डाटा टेक्निक्स के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हो गई है। पहले जिन क्षेत्रों में सांख्यिकी का प्रवेश नहीं था, आज उनमें बिग डाटा एनालिसिस का प्रयोग जनहित में किया जाता है। चिकित्सकीय एवं स्वास्थ्य संबंधी शोधों में इसका इस व्यापक पैमाने पर प्रयोग हो रहा है। सिम्पोजियम का संचालन डॉ. श्रुति, धन्यवाद ज्ञापन रजिस्ट्रार डॉ. अरुण कुमार गुप्ता एवं आगंतुकों को स्वागत डॉ. आशुतोष गुप्ता ने किया। बेबी आस्था एवं रुचि बाजपेयी ने वंदेमातरम की प्रस्तुति की। इस दौरान 150 से अधिक प्रतिभागियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए।
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