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आखिर कहां जाएंगे रक्षा अध्ययन के छात्र

Sun, 27 Oct 2019 08:51 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 27 Oct 2019 08:51 PM IST
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UPPSC PCS mains subjects
UPPSC PCS mains subjects
पीसीएस से विषय हटाए जाने से घटेगी विषय की लोकप्रियता
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शिक्षण संस्थानों में भी छात्र-छात्राओं की संख्या पर पड़ेगा असर
प्रयागराज, 27 अक्तूबर। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा से पांच विषय हटा दिए हैं लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि जो अभ्यर्थी केवल पीसीएस परीक्षा की तैयारी के लिए इन विषयों की पढ़ाई कर रहे हैं, अब वे कहां जाएंगे? वहीं, रक्षा अध्ययन के विशेषज्ञ आयोग के इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं। उनका दावा है कि वर्तमान परिदृश्य में देश की सुरक्षा का विषय सबसे महत्वपूर्ण है और ऐसे में रक्षा अध्ययन विषय को मुख्य परीक्षा से बाहर कर देना उचित नहीं है।
पीसीएस-2019 की मुख्य परीक्षा से रक्षा अध्ययन, समाजकार्य, अरबी, फारसी और कृषि अभियांत्रिकी विषय का हटाया गया है। पीसीएस परीक्षा की तैयारी के हिसाब से छात्रों के बीच सबसे लोकप्रिय विषय रक्षा अध्ययन और समाज कार्य है। रक्षा अध्ययन के इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ही 500 से अधिक छात्र हैं। विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेजों में भी रक्षा अध्ययन विषय के छात्रों की बड़ी संख्या है। इसके अलावा अन्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भी रक्षा अध्ययन छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि पीसीएस से रक्षा अध्ययन विषय हटाए जाने के कारण भविष्य में इस विषय के छात्रों की संख्या भी कम होगी।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में रक्षा अध्ययन के प्रो. आरके उपाध्याय का कहना है कि एक तरफ देश के चुनिंदा आईएएस एवं आईपीएस अफसरों को नेशनल डिफेंस कॉलेज में एक साल का कोर्स कराया जाता है। सरकार गुड़गांव में नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी खोलने जा रही हैं। वहीं, पीसीएस जैसी प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा से रक्षा अध्ययन जैसे महत्वपूर्ण विषय को परीक्षा से बाहर किया जाना समझ से परे है। प्रो. उपाध्याय का कहना है कि परीक्षा का पेपर आयोग और उसके विशेषज्ञ तैयार करते हैं।अगर अभ्यर्थी रक्षा अध्ययन विषय में अच्छे अंक प्राप्त कर रहे हैं तो इसमें उनका क्या दोष है। एनीमल हसबेंड्री जैसे बहुत से ऐसे विषय हैं, जिन्हें पीसीएस में शामिल किए जाने का कोई औचित्य नहीं। आयोग को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
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