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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   UPESSC Secretary and Controller of Examinations High Court and explain how 33 out of 125 questions incorrect

High Court : सचिव और परीक्षा नियंत्रक अदालत में उपस्थित होकर बताएं 125 में 33 प्रश्न कैसे हो रहे गलत

Tue, 04 Aug 2026 08:47 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 04 Aug 2026 08:47 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में गलत प्रश्न पूछे जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कहा कि आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक अदालत में उपस्थित होकर बताएं कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया क्या है।

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UPESSC Secretary and Controller of Examinations High Court and explain how 33 out of 125 questions incorrect
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षा में बड़ी संख्या में गलत प्रश्न पूछे जाने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कहा कि आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक अदालत में उपस्थित होकर बताएं कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया क्या है। आखिर 125 प्रश्नों में से 33 प्रश्न गलत कैसे हो रहे हैं। यह सवाल न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने प्रयागराज निवासी आदित्य सिंह और 17 अन्य की याचिका पर दिया है।

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याचियों ने टीजीटी के अंग्रेजी के पेपर में पाठ्यक्रम से बाहर व गलत सवाल पूछने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि पहले पाठ्यक्रम से बाहर के 29 प्रश्न पाए गए थे। इसके अतिरिक्त विशेषज्ञों ने चार अन्य प्रश्न भी गलत पाए हैं। इस प्रकार 125 प्रश्नों में से 33 त्रुटिपूर्ण हैं। आयोग ने इन प्रश्नों के अंक शेष सही प्रश्नों में वितरित करते हुए नई संशोधित चयन सूची तैयार की है। इसमें 42 नए अभ्यर्थियों को चयन सूची में शामिल किया गया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने आयोग की इस कार्यवाही पर असंतोष व्यक्त किया।

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कोर्ट ने कहा-25 प्रतिशत से अधिक प्रश्न गलत...विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल

कोर्ट ने कहा कि जब किसी परीक्षा में 25 प्रतिशत से अधिक प्रश्न गलत पाए जा रहे हों, तब सिर्फ अंक पुनर्वितरित कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यह प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा आयोजित करने की पूरी प्रक्रिया की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को पांच अगस्त को दोपहर दो बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। दोनों अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करना होगा कि प्रश्नों का निर्माण किस प्रक्रिया के तहत किया जाता है।

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