UPESSC : प्रोफेसर कीर्ति के एक साल के कार्यकाल में नहीं हो पाई एक भी भर्ती, चार बार टालनी पड़ी पीजीटी
दो साल पहले अस्तित्व में आए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में अभी कोई भर्ती प्रक्रिया तो पूरी नहीं हुई है लेकिन उठापटक शुरू हो गई है। बिना कोई भर्ती किए ही एक साल पहले नियुक्त अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय को इस्तीफा देना पड़ा।
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दो साल पहले अस्तित्व में आए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में अभी कोई भर्ती प्रक्रिया तो पूरी नहीं हुई है लेकिन उठापटक शुरू हो गई है। बिना कोई भर्ती किए ही एक साल पहले नियुक्त अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय को इस्तीफा देना पड़ा। बताया जा रहा है कि एक साल के कार्यकाल के दौरान कोई भर्ती प्रक्रिया पूरी न कर पाना ही उनके इस्तीफे का कारण बना। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग एवं माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को मर्ज करके अगस्त 2023 में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन किया गया था। इस आयोग के पास सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय, माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती करने की जिम्मेदारी है।
इस मकसद से 14 मार्च 2024 को आयोग में 12 सदस्यों की नियुक्ति की गई। इसी क्रम में सचिव, परीक्षा नियंत्रक आदि की नियुक्ति के बाद एक सितंबर 2024 को अध्यक्ष पद पर गोरखपुर की प्रो. कीर्ति पांडेय को नियुक्त किया गया। उन्होंने पांच सितंबर को कार्यभार भी संभाल लिया। उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से विज्ञापन संख्या 51 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों के लिए आवेदन मांगे जा चुके थे। इसी तरह से माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की भी ओर से भी पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (पीजीटी) और ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (टीजीटी) के लिए आवेदन लिए जा चुके थे।
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती नहीं हो सकी पूरी
आयोग की अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद पहले से विज्ञापित इन पदों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के अलावा नई भर्तियां भी शुरू किए जाने की उम्मीद थी लेकिन प्रतियोगियों को निराशा मिली। इस दौरान नई भर्तियों के लिए आवेदन मांगा जाना तो दूर पुरानी भर्तियों की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो पाई। आयोग ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए परीक्षा तो कराई लेकिन उसके परिणाम को लेकर विवाद शुरू हो गया है। इसकी वजह से आयोग को साक्षात्कार की तारीख स्थगित करनी पड़ी है। अब आपत्तियों के निस्तारण के बाद साक्षात्कार कराए जाने की घोषणा की गई है।
आयोग की ओर से पीजीटी भर्ती परीक्षा के लिए भी चार बार तिथि घोषित की गई लेकिन तैयारी ही पूरी नहीं हो पाई। इसकी वजह से हर बार परीक्षा टालनी पड़ी। अब पीजीटी की परीक्षा 15 और 16 अक्तूबर को कराने की घोषणा की गई है। इसके लिए परीक्षा केंद्रों की सूची मांग ली गई है लेकिन अब अध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में अब इस भर्ती परीक्षा को लेकर भी असमंजस की स्थिति बन गई है। इस तरह से आयोग के गठन के बाद दो साल में कोई भी भर्ती नहीं हो पाई है।
इसके अलावा प्रतियोगियों ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उनकी ओर से प्रत्यावेदन भी दिए गए हैं। अभ्यर्थियों ने काली सूची में शामिल संस्था को आयोग में काम दिए जाने की भी शिकायत की है। उनकी यह भी शिकायत है कि आयोग में सेवानिवृत्त और संविदा कर्मियों से भी काम लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि एक साल पहले अध्यक्ष का कार्यभार संभालने वाली प्रो. कीर्ति पांडेय पर इसे लेकर काफी दबाव था और उनसे मांगकर इस्तीफा लिया गया है। हालांकि उन्होंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा देने की बात कही है।
भर्तियों को लेकर बनी दुविधा
शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से अभ्यर्थियों की आपत्तियों के निस्तारण के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती का साक्षात्कार कराने की घोषणा की गई है। इसके अलावा 15 व 16 अक्तूबर को पीजीटी और 18 व 19 दिसंबर को टीजीटी भर्ती परीक्षा प्रस्तावित है। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) भी 29 और 30 जनवरी को प्रस्तावित है। ऐसे में टीईटी के जल्द विज्ञापन की उम्मीद थी लेकिन अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद इन भर्तियों को लेकर फिर से असमंजस की स्थिति बन गई है। युवा मंच के अनिल सिंह का कहना है कि इन परीक्षाओं को लेकर आयोग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।