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UPESSC : परीक्षा शुल्क की रकम से मालामाल हुआ आयोग, परीक्षा के इंतजार में भटक रहे अभ्यर्थी

Fri, 13 Jun 2025 05:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 13 Jun 2025 05:42 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को अपने गठन के बाद अभ्यर्थियों की फीस के तौर पर जमा तकरीबन 87 करोड़ रुपये मिले और अभ्यर्थियों को मिला टीजीटी-पीजीटी भर्ती के लिए तीन साल का इंतजार।

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UPESSC: Commission became rich with the amount of examination fee, candidates are wandering around waiting for
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को अपने गठन के बाद अभ्यर्थियों की फीस के तौर पर जमा तकरीबन 87 करोड़ रुपये मिले और अभ्यर्थियों को मिला टीजीटी-पीजीटी भर्ती के लिए तीन साल का इंतजार। तीन बार परीक्षा टलने के बाद अभ्यर्थियों को अब यह भी भरोसा नहीं रह गया है कि चौथी बार पीजीटी परीक्षा समय से कराई जा सकेगी या नहीं।

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प्रदेश के अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) व प्रवक्ता (पीजीटी) के पदों पर भर्ती के लिए नौ जून 2022 को विज्ञापन आया था। 16 जुलाई 2022 को आवेदन की प्रक्रिया पूरी हुई थी। इस दौरान टीजीटी के 3539 पदों के लिए 8.69 हजार और पीजीटी के 624 पदों के लिए 4.50 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे। यानी कुल 13.19 लाख आवेदन आए थे।
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प्रतियोगी छात्राें का दावा है कि तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को तकरीबन 87 करोड़ रुपये परीक्षा शुल्क के रूप में प्राप्त हुए थे। सामान्य व ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए 750 रुपये और एससी-एसटी अभ्यर्थियों के लिए 450 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया था। आवेदन करने वालों में तकरीबन चार लाख अभ्यर्थी एससी व एसटी वर्ग के थे।

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ब्याज के तौर पर ही मिल रहे हर साल साढ़े तीन करोड़ रुपये

21 अगस्त 2023 को जब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के गठन का अधिनियम आया तो उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के विलय की कार्यवाही शुरू हुई। इसके बाद दोनों संस्थानों की संपत्तियां एवं परिसंपत्तियां शिक्षा सेवा चयन आयोग को सौंप दी गईं। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि कुल धनराशि पर सालाना साढ़े तीन फीसदी ब्याज को ही जोड़ लिया जाए तो प्रति वर्ष तीन करोड़ रुपये ब्याज के तौर पर आ रहे हैं।

तीन साल में नौ करोड़ रुपये ब्याज के रूप में आ चुके हैं। प्रतियोगी छात्र संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विक्की खान का कहना है कि हर माह अध्यक्ष, सदस्यों, अफसरों व कर्मचारियाें का वेतन इसी धनराशि से दिया जाता है। परीक्षा का आयोजन भी इसी धनराशि से कराया जाता है। तीन साल से परीक्षा शुल्क के रुपये संस्थान के खाते में पड़े हैं। आयोग इसी पैसे से चल रहा है. लेकिन अभ्यर्थी तीन साल से परीक्षा के लिए भटक रहे हैं।
अभ्यर्थियों का दावा, डेढ़ करोड़ में हुई थी पिछली परीक्षा

अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि वर्ष 2021 की टीजीटी-पीजीटी परीक्षा पर डेढ़ करोड़ रुपये खर्च हुए थे। 2022 के विज्ञापन में परीक्षा शुल्क के रूप में 87 करोड़ रुपये जमा किए गए। अभ्यर्थियों की मांग है कि आयोग परीक्षा शुल्क के रूप में मिली धनराशि के एक-एक रुपये के खर्च का हिसाब दे।

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